छात्रों ने 75 फीसद से ऊपर की राह पकड़ी तो हो जाएगी चेकिंग, जानिए मामला Aligarh news

डा. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा की ओर से कोरोना संक्रमण काल में स्नातक व स्नातकोत्तर के विद्यार्थियों की परीक्षाएं कराने का फैसला तो किया है। मगर डेढ़ घंटे की परीक्षा कराने का फैसला किया गया है। साथ ही परीक्षाएं ओएमआर शीट पर कराई जाएंगी।

Anil KushwahaMon, 14 Jun 2021 03:20 PM (IST)
डा. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा की ओर से स्नातक व स्नातकोत्तर के विद्यार्थियों की परीक्षाएं कराने का फैसला किया है।

अलीगढ़, जेएनएन । बेहतरी के लिए 75, 80, 90 या 95 फीसद का स्तर हो तो काफी सुकून मिलता है। अगर ये फीसद शिक्षा के क्षेत्र में अंकों का हो तो विद्यार्थियों की खुशी का ठिकाना ही नहीं रहता। मगर जब 75 फीसद अंकों के ऊपर लेवल छूना ही नहीं है तो विद्यार्थी भी जीतोड़ मेहनत क्यों करेंगे? यह स्थिति इसलिए भी है कि परीक्षक भी विद्यार्थियों को बेभाव के नंबर न बांट दें। अक्सर देखने में आया है कि प्रायोगिक या मौखिक परीक्षा में अंकों की बरसात कर देते हैं। ऐसी स्थिति न बने इसलिए आलाधिकारियों की ओर से ही इस संबंध में प्रतिबंध लगाया गया है। अगर इस सीमा को परीक्षक पार करते हैंं तो उनकी चेकिंग भी हो सकती है।

डेढ़ घंटे की होगी परीक्षा

डा. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा की ओर से कोरोना संक्रमण काल में स्नातक व स्नातकोत्तर के विद्यार्थियों की परीक्षाएं कराने का फैसला तो किया है। मगर डेढ़ घंटे की परीक्षा कराने का फैसला किया गया है। साथ ही परीक्षाएं ओएमआर शीट पर कराई जाएंगी। जिससे मूल्यांकन में कापी चेक करने की समस्या न आए। पहले शिक्षक कापी जांचने से कोराेना संक्रमण होने का खतरा बताकर मूल्यांकन से मना कर चुके हैं। इस बार विवि ने इन विद्यार्थियों की प्रायोगिक परीक्षा की जगह केवल मौखिक परीक्षाएं कराने के ही निर्देश दिए हैं। इसका शिक्षकों व छात्रों ने स्वागत भी किया है। मगर विवि ने शिक्षकों पर नकेल कसने का फैसला भी किया है। इसके तहत परीक्षक मौखिक परीक्षा लेकर किसी भी विद्यार्थी को 75 फीसद अंक से ज्यादा नहीं देंगे। अगर कोई विद्यार्थी काफी बेहतर है और उसको इससे ज्यादा अंक दिए गए तो विश्वविद्यालय उसकी जांच-पड़ताल भी कर सकता है। 75 फीसद से ऊपर अंक पाने वाले छात्रों को विश्वविद्यालय बुलाकर उनकी याेग्यता का आकलन किया जा सकता है। वहां परीक्षक की पोल भी खुल सकती है। इस व्यवस्था के बारे में बताते हुए विश्वविद्यालय की जनसंपर्क अधिकारी डा. सुनीता गुप्ता ने बताया कि कुलपति प्रो. अशोक मित्तल ने परीक्षा समिति की बैठक में ये फैसला लिया है।

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