परिवर्तन से नेता जी के चेहरे पर आई मुस्‍कान, अब नए दौर में लिखेंगे नई कहानी Aligarh news

कमल वाली पार्टी में हर्ष है खुशियां मनाई जा रही हैं। जिले में परिवर्तन से उनके अंदर नया उत्साह और नई उमंग सी आ गई है। करीब चार वर्षों में पार्टी के नेताओं ने तमाम जतन किए मगर परिवर्तन नहीं करा सकेंगे थे।

Anil KushwahaThu, 29 Jul 2021 10:03 AM (IST)
कमल वाली पार्टी में हर्ष है, खुशियां मनाई जा रही हैं।

अलीगढ़, जेएनएन।  कमल वाली पार्टी में हर्ष है, खुशियां मनाई जा रही हैं। जिले में परिवर्तन से उनके अंदर नया उत्साह और नई उमंग सी आ गई है। करीब चार वर्षों में पार्टी के नेताओं ने तमाम जतन किए, मगर परिवर्तन नहीं करा सकें थे। सीएम से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक के दरबार में दस्तक लगा दी। शिकायतों का अंबार लगा दिया था। इस बीच कई बार आमने-सामने तकरार तक हुई। नुमाइश में तो मंच पर ही सदन के नेता और जिले के अधिकारी में बहस हो गई। बमुश्किल स्थिति सामान्य हुई थी। ये तस्वीरें पार्टी के नेताओं के जेहन में किसी फिल्म की तरह घूमती रहीं। पार्टी के नेता हताश और निराश हुए, मगर उनकी सुनी नहीं गई। आखिर अब जब परिवर्तन हुआ तो कई के चेहरे पर मुस्कुराट दिखी। नेताजी अब कह रहे हैं कि छोड़ों कल की बातें, कल की बात पुरानी, नए दौर में लिखेंगे हम नई कहानी...

बहुत विनोद करते हैं...

आंदोलनों में साइकिल की रफ्तार तेज है। कभी जेसीबी पर पुलता फूंक कर बढ़त बनाने की कोशिश की जाती है तो कुछ नेताजी ऐसे हैं, जनता का दुख-दर्द जानने के लिए जलभराव में प्रवेश कर जाते हैं। मकसद एक ही है कि उनके संघर्ष की कहानी लखनऊ पहुंचे और वो भैयाजी के नजर में छा जाएं। 2022 का रास्ता उनके लिए साफ हो जाए। ऐसे में एक-एक सीट पर जोड़-तोड़ चल रहा है। तस्वीर महल पर एक नेताजी मिल गए। उन्होंने कहा कि शहर सीट से यदि पार्टी ने उन्हें टिकट दिया तो फिर तो जीत सुनिश्चित है। सत्ता में रहा हूं तो हर वर्ग का मैंने काम कराया है। नेताजी ने दावा किया कि कमल वाली पार्टी के समर्थक भी उन्हें ही वोट देंगे, क्योंकि वो उनके भी दुख-दर्द में हमेशा शरीक होते रहे हैं। इस पर एक भाई साहब ठहाके मारकर हंसने लगे, बोलें कमल वाले क्यों आपको वोट देने लगे। सच, आप बहुत विनोद करते हो।

अब अधिकारी नेताजी की नहीं सुनते

एक दौर था जब सत्ता दल की हनक हुआ करती थी। एक आवाज में अधिकारी दौड़े चले आते थे, कहीं ऊपर शिकायत न हो जाए इसलिए नेताजी काे मनाने में जुट जाया करते थे। मगर अब दौर बदल चुका है। सत्ता दल में नेताजी और जनप्रतिनिधियों तक की नहीं सुनी जा रही है। रामघाट रोड पर पीएसी के पास गड्ढों के जख्म के मामले में कुछ ऐसा ही हुआ है। यहां इतने बड़े गड्ढे हो गए हैं कि कभी भी किसी की जान जा सकती है। इन गड्ढों को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। सत्ता दल के नेताजी डीएम से लेकर कमिश्नर तक से कह चुके, पीडब्ल्यूडी के अधिकारी से भी शिकायत की। नाराजगी जताई, मगर गड्ढें भरे नहीं गए। हर किसी के जेहन में एक बड़ा सवाल है कि 20 फिट गड्ढे नहीं भरवा सकें तो जनता की अन्य समस्याओं का कैसे निस्तारण कराते होंगे?

जिले में एक भी नेता नहीं किया तैयार

इस समय नीले रंग की पार्टी फिर से ब्राह्मणों की चिंता करने लगी है। पार्टी के महासचिव तो प्रदेश में ब्राह्मणों की स्थिति को लेकर बहुत दुखी हैं। मानों आंखें भर आई हैं। दरअसल, पार्टी 2007 के दौर को फिर से वापस लाना चाहती है। सोशल इंजीनियरिंग का यह फार्मूला कितना फिट बैठेगा यह तो आने वाला वक्त बताएगा, मगर इसको लेकर जिले में विप्र समाज में चर्चाएं तेज होने लगी हैं। समाज के लोगों का दर्द उभर कर आने लगा है। उनका कहना है? कि पार्टी को सत्ता तक पहुंचाने का काम किया, मगर हमारे ही नेताओं को पार्टी ने छिटक दिया। हाथरस में भैयाजी को दरकिनार कर दिया, जो कभी ब्राह्मणों का चेहरा हुआ करते थे। जिले में एक भी ब्राह्मण चेहरा सामने नहीं आया। विप्र समाज के लोग कह रहे हैं कि आखिर चुनाव के समय ही क्यों उनकी याद आती है? इन पांच सालों में आखिर क्यों नहीं सोचा?

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