बसपा ने सतीश मिश्रा को आगे रामवीर को गढ़ में दी चुनौती Hathras News

बसपा की और से जनपद में आयोजित ब्राह्मण सम्मेलन के एनवक्त पर स्थगित होने के पीछे कई राजनीतिक सवाल उठ रहे हैं। वहीं बसपा के असंतुष्ट कार्यकर्ताओं के विरोध और पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय के गढ़ में सम्मेलन का आयोजन सीधे चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

Anil KushwahaWed, 04 Aug 2021 01:22 PM (IST)
बसपा की जनपद में आयोजित ब्राह्मण सम्मेलन के एनवक्त पर स्थगित होने के पीछे कई राजनीतिक सवाल उठ रहे हैं।

हाथरस, जेएनएन।  बसपा की और से जनपद में आयोजित ब्राह्मण सम्मेलन के एनवक्त पर स्थगित होने के पीछे कई राजनीतिक सवाल उठ रहे हैं। वहीं बसपा के असंतुष्ट कार्यकर्ताओं के विरोध और पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय के गढ़ में सम्मेलन का आयोजन सीधे चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। उधर, बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश मिश्रा हाथरस की सीमा से होकर अलीगढ़ गए और चले गए। सूत्रों के अनुसार सतीश मिश्रा का दूसरे सप्ताह में यहां का कार्यक्रम बन सकता है।

जिला पंचायत सदस्‍य के टिकट वितरण को लेकर नाराजगी

जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में टिकट वितरण को लेकर बसपा में शुरू हुई विरोध की चिंगारी अभी शांत नहीं हुई है। बसपा से निष्कासित बंटी भैया के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने तीन अगस्त को आयोजित ब्राह्मण सम्मेलन में कोआर्डिनेटरों व जिलाध्यक्ष का विरोध करने फैसला लिया था। उन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। रविवार की दोपहर तक सबकुछ ठीक चल रहा था। अचानक हालात बदले और हाथरस में ब्राह्मण सम्मेलन स्थगित हो गया। सतीश मिश्रा आगरा से सीधे हाथरस होते हुए अलीगढ़ निकल गए। वहां वे सीधे हाथरस होते हुए निकल गए। उनके न आने पर बसपा कार्यकर्ताओं ने जिलाध्यक्ष और कोआर्डिनेटर के पुतले फूंककर अपना रोष जाहिर कर दिया।

रामवीर उपाध्याय का मजबूत गढ़ है हाथरस

हाथरस जनपद में विधानसभा की तीन सीटें हैं। तीनों सीटों पर रामवीर उपाध्याय एक-एक कर विधायक बने हैं। मौजूदा में सादाबाद क्षेत्र से विधायक हैं। इससे पहले वे हाथरस और सिकंदराराऊ से विधायक रह चुके हैं। बहुजन समाज पार्टी में वे ाापार्टी के साथ ब्राह्मण समाज के कद्दावर नेता रहे हैं। बसपा की ओर से राष्ट्रीय महासचिव सतीश मिश्रा के नेतृत्व में ब्राह्मण सम्मेलन का आयोजन करना राजनीतिक गलियारों में चर्चा है। सवाल इस बात का है कि बसपा सतीश मिश्रा को आगे कर रामवीर के गढ़ में ब्राह्मण समाज में कितना सेंध लगा पाएगी ? 2017 के विधानसभा चुनाव तक समाज भाजपा के साथ रहा है।

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