जाटलैंड में नई रणनीति के साथ भाजपा कर रही तैयारी Aligarh News

हाल में जहरीली शराब का मामला इनसे भाजपा के प्रति किसानों की नाराजगी बढ़ी है। हालांकि भाजपा ने स्थिति को भांप भी लिया है। इसलिए प्रभावी रणनीति के साथ जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में सभी दलों को मात दे दिया है।

Sandeep Kumar SaxenaSun, 13 Jun 2021 11:58 AM (IST)
जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में सभी दलों को मात दे दिया है।

अलीगढ़, जेएनएन। कृषि बिल कानून का विरोध हो या फिर अभी हाल में जहरीली शराब का मामला इनसे भाजपा के प्रति किसानों की नाराजगी बढ़ी है। हालांकि भाजपा ने स्थिति को भांप भी लिया है। इसलिए प्रभावी रणनीति के साथ जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में सभी दलों को मात दे दिया है। 40 से अधिक सदस्य आपने साथ भाजपा ने कर लिया है। मगर, आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा प्रभावी रणनीति बनाने की तैयारी में है, जिससे जाटलैेंड पर कब्जा बना रहे।

2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने नया इतिहास रचने का काम किया था। भाजपा जिले की सातों विधानसभा सीटों पर काबिज हुई थी। यह पहली बार था कि जब सभी सातों सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी। ऐसा रामलहर में भी नहीं हुआ था। अब चूंकि सरकार के चार साल पूरे हो गए तो हालात कुछ और हैं। जिले में खैर और इगलास विधानसभा क्षेत्र जाटलैंड के रुप में माना जाता है। इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में जाटों की संख्या अधिक है। इन दोनों सीटों पर भी भाजपा ने जीत दर्ज कर एक नया इतिहास बनाने का काम किया था, क्योंकि दोनों सीटें एक साथ भाजपा के पास कभी नहीं रही हैं। मगर, अब इन दोनों सीटों के लिए भाजपा को कड़ी मेहनत करनी होगी। क्योंकि कृषि कानून बिल के विरोध के चलते किसान भाजपा से कुछ नाराज चल रहे हैं। खैर और इगलास विधानसभा क्षेत्र से बड़ी संख्या में किसानों ने आंदोलन में सहभागिता भी की थी। भाजपा नेताओं का कई बार इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में विरोध भी हो चुका है। इससे साफ पता चलने लगा है कि धीरे-धीरे जमीन खिसकने लगी है। इधर, जहरीली शराब मामले में भी भाजपा की किरकिरी हुई है। पुलिस-प्रशासन और अाबकारी विभाग के खिलाफ अभी तक सख्त कार्रवाई न होने से लोगों में रोष बना हुआ है। जहरीली शराब से प्रभावित लोग भी खैर और इगलास विधानसभा क्षेत्र से हैं। ऐसे में किसान और आम जनता की भी नाराजगी भाजपा को झेलनी पड़ रही है।

स्थिति को भांप चुकी है भाजपा

हालांकि, जाटलैंड की स्थिति को भाजपा पहले ही भांप चुकी है। इसलिए पार्टी ने जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी को पहले मजबूत करने की कवायद तेज की थी। भाजपा ने जिला पंचायत सदसय की नौ सीटों पर जीत दर्ज की थी। मगर, इतने सदसयों से सदस्य बनना दूर था। सत्ता में रहने के बाद भी यदि जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी हाथ से चली जाती तो भाजपा के लिए मुश्किल हो जाती। चर्चा तेज होने लगती कि पार्टी की स्थिति कमजोर हो रही है। इसलिए पार्टी ने सबसे पहले जिला पंचायत सदस्यों को एकजुट करने का काम किया। अब भाजपा दावा कर रही है कि उसके पास 40 से अधिक सदस्य हैं, जबकि अध्यक्ष बनने के लिए 24 सदस्यों की जरूरत होती है। ऐसे में भाजपा का ही अध्यक्ष बनना तय माना जा रहा है। जिला पंचायत सदस्यों में सबसे अधिक जाट समाज से सदस्य थे, उनकी संख्या 17 है। अब सभी को अपने साथ लेकर भाजपा ने यह प्रदर्शित करने की कोशिश की है कि जाट उनके साथ है।

विधानसभा चुनाव में भी रहेगा साथ

भाजपा नेताओं का दावा है कि विधानसभा चुनाव में भी जाट समाज भाजपा के साथ रहेगा। जिलाध्यक्ष चौधरी ऋषिपाल सिंह ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार ने सर्वसमाज के लिए काम किया है। जाट की राजनीति सभी दल करना चाहते हैं, मगर उन्हें हासिये पर रखा है। भाजपा एकमात्र दल है, जिसने बढ़ाने का काम किया है। प्रदेश से लेकर केंद्र तक में जाट समाज के लोग मंत्री से लेकर अच्छे पदों पर हैं। इतना पिछली किसी सरकारों ने नहीं किया है। इसलिए 2022 में पूरा समाज भाजपा के साथ रहेगा, उन्हें पता है कि राष्ट्रहित में सिर्फ भाजपा ही काम करती है। अन्य दल तो सिर्फ वोट बैंक की राजनीति करते हैं।

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