Woman Doctor Murder : कुछ दिन पहले पत्नी से हुआ था अरुण का झगड़ा, उसी दिन बनाई हत्या की योजना Aligarh news

अलीगढ़ जागरण संवाददाता। इंटीग्रेटिड कोरोना कंट्रोल रूम में करीब छह महीने तैनात रहीं डा. आस्था अग्रवाल की हत्या का मुख्य कारण पति अरुण अग्रवाल से चला आ रहा विवाद ही रहा। अरुण ने उसके चरित्र पर भी शक जताया है।

Anil KushwahaTue, 19 Oct 2021 10:29 AM (IST)
इंटीग्रेटिड कोरोना कंट्रोल रूम में करीब छह महीने तैनात रहीं डा. आस्था अग्रवाल।

अलीगढ़, जागरण संवाददाता। इंटीग्रेटिड कोरोना कंट्रोल रूम में करीब छह महीने तैनात रहीं डा. आस्था अग्रवाल की हत्या का मुख्य कारण पति अरुण अग्रवाल से चला आ रहा विवाद ही रहा। अरुण ने उसके चरित्र पर भी शक जताया है। पुलिस पूछताछ में बताया कि आक्सीजन प्लांट और मकान आस्था अपने नाम कराना चाहती थी। इसके लिए दबाव बना रही थी। इसे लेकर पंद्रह दिन पहले विवाद हुआ। उसी दिन हत्या की योजना बना ली थी।

आस्था और उसके साथ काम करने वाले मनीष चौधरी पर शक जताते हुए अरुण ने बताया कि इनके संबंधों को लेकर दोनों के बीच पारिवारिक कलह बनी रहती थी। वह आस्था के व्यवहार से मानसिक रूप से बहुत परेशान रहता था। रोकने -टोकने पर पत्नी गाली- गलौज तक करने लगती थी। पारिवारिक कलह को लेकर ही मई 2021 को आक्सीजन प्लांट में गैस की कालाबाजारी करने को लेकर वीडियो व आडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुई थीं, जिसकी काफी चर्चा हुई थी। पिछले दिनों मनीष ने उसके साथ मारपीट भी की थी। 28 सितंबर को अरुण व आस्था के बीच घर में ही ऐसा झगड़ा हुआ कि अलग रहने की नौबत आ गई। उसी दिन अरुण ने हत्या की योजना बना ली थी। लेकिन, कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था। झगड़े की वजह से कभी-कभार प्लांट पर रुकने लगा। इसके चलते घटना से एक सप्ताह पहले उसने अपने गार्ड विकास से चर्चा की और हत्या की सुपारी दे डाली।

दो लाख में तय हुई थी बात

अरुण का कासिमपुर में राधिका आक्सीजन प्लांंट है। विकास 10 साल पुराना कर्मचारी है। इसके चलते उसने अरुण की बात मान ली और अपने ही गांव के दो लोगों को बुलाया। पहले दो लाख रुपये में बात तय हुई थी। लेकिन, विकास के हस्तक्षेप के बाद सुपारी एक लाख में तय हो गई थी।

हल्का आदमी अकेला कैसे मार सकता है...

पुलिस को जब डा. आस्था अग्रवाल का शव घर मे फंदे पर लटका मिला तो जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां हाथ लगीं। घटनास्थल पर पुलिस को एक बाल्टी रखी मिली। फंदे से आस्था के पैर जमीन को छू रहे थे और नीले थे। बाल बिखरे थे। चेहरे व शरीर पर कई जगह खरोंच जैसे निशान थे। मुंह से खून निकल रहा था। इससे संदेह होने पर फोरेंसिक टीम व डाग स्क्वाड ने जांच की। अगले दिन पुलिस की यही आशंका पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सही साबित हुई। इसमें गला दबाकर हत्या करने व बाद में आत्महत्या का रूप देने को शव को फंदे पर लटकाने की पुष्टि हुई। इधर, अरुण का वजन भी कम है। ऐसे में पुलिस पहले ही दिन समझ गई कि अरुण अकेला आस्था को नहीं मार सकता। फिर सीसीटीवी फुटेज में भी अन्य लोग नजर आ गए थे। जांच में ये भी साफ हुआ कि आस्था को खुद की हत्या होने की आशंका थी। अरुण ने भाड़े के अपराधियों के साथ मिलकर पहले शराब पी थी। उनके बीच हो रही बातों को सुनकर ही आस्था ने बहन आकांक्षा की एक दोस्त को मैसेज किया था, जिसमें उसने हत्या की योजना बनाए जाने की बात कहते हुए कहा था कि अगर उसे कुछ हो जाए तो बच्चों को बहन के पास भिजवा देना। आस्था की यही आशंका सच भी साबित हुई।

पहले सहमे थे बच्चे, फिर खुद दिखाया पुलिस को पूरा रूट

पुलिस ने डा. आस्था के बड़े बेट 10 वर्षीय अर्णव व आठ साल की बेटी आन्या से घटना की जानकारी ली। पिता के धमकाने से वे पहले काफी भयभीत थे, लेकिन बाद में सहज हो गए और पूरी कहानी बता दी। उन्होंने बताया कि माता-पिता के बीच अक्सर झगड़ा व मारपीट तक होती थी। पिता के साथ पूरी घटना में तीन अन्य लोग और भी शामिल थे। उस समय उन्हें ट्यूटर पढ़ा रहे थे। पिता ने उनसे जल्दी पढ़ाकर जाने का कहा था। बताया था कि वे बच्चों को घुमाने ले जा रहे हैं। बच्चों ने पिता की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को अपने बयानों में बताया कि उन्हें मां की हत्या की जानकारी थी। घर से बाहर ले जाते समय अरुण समेत चारों लोग व दोनों बच्चे साथ थे। पिता ने बताया था कि मां की मौत हो गई है। अरुण ने प्लांट पर जाकर अशोक को छोड़ा था। तब भी बच्चे साथ थे। इसके बाद ताऊ के घर दोनों को बच्चों को छोड़ दिया। बच्चों ने ही पुलिस का पूरा रूट भी दिखाया था। फिलवक्त दोनों ही बच्चे आस्था की बहन के पास हैं। आस्था के चार भाई -बहन थे। जिनमें बड़े भाई अमित अमेरिका में बडी बहन आरती दिल्ली व छोटी बहन आकांक्षा आगरा व छोटा भाई अभिनय नोएडा में रहता है।

200 से अधिक स्थानों पर खंगाले सीसीटीवी कैमरे

हाई प्रोफाइल मामला होने पर पुलिस टीमों ने घटनास्थल से लेकर शहर भर में करीब दो सौ से अधिक स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला ।इनमें घटना वाली रात आरोपित कार से घर पहुंचा था। जबकि सुपारी किलर पैदल- पैदल ही आते दिखाई दिए। घटना के बाद अरुण अपने बच्चों को कार से लेकर भाई तरुण अग्रवाल के घर पहुंचता हुआ व दोनों बच्चों को सौंपते हुए दिखाई पड़ा। रात में भागते समय बस स्टैंड के पास कार में तेल भरवाते हुए भी उसकी फुटेज कैद हो गई। अगले दिन सुबह 6: 30 बजे यमुना एक्सप्रेस वे पर जेवर टोल से गुजरते में वहां लगे कैमरों में उसकी कार जाती हुई दिखी। अरुण व अशोक दिल्ली गए और पवन व विकास अलग हो गए । अरुण यहां से पहाडगंज, दिल्ली पहुंचा और एक पार्किंग में कार को खड़ा कर दिया। मोबाइल फोन की लोकेशन से उसके चंडीगढ़ मे होने की जानकारी मिली। अरुण चंडीगढ़ के बाद शिमला घूमने चला गया। फिर वापस दिल्ली आ गया। यहां से वह गाड़ी लेकर सुपारी की शेष रकम देने के साथ ही कोर्ट में सरेंडर करने के लिए आया था।

पांच राज्यों में खोजती रहीं पुलिस की चार टीमें

हत्या में आरोपित पति अरुण अग्रवाल की तलाश में पुलिस की चार टीमें दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान में खोजबीन कर रही थीं। सर्विलांस टीम मोबाइल फोन की लोकेशन व सीडीआर खंगालने में जुटी हुई थी।

लालच में आकर फंस गया गार्ड विकास

आक्सीजन प्लांट में काम करने वाला विकास अरुण का विश्वासपात्र था। अरुण ने उसे भरोसे में लेकर उसके जरिए हत्या की उसके ही गांव के पवन व अशोक को सुपारी दी थी। तीनों परिवार में आर्थिक तंगी के चलते एक लाख की मोटी रकम देकर लालच में आ गए और हत्या करने को राजी हो गए। पहली बार ही उन्होंने किसी आपराधिक वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस अब फरार अशोक की तलाश करने के साथ ही आरोपितों के खिलाफ कोर्ट में ठोस साक्ष्य एकत्रित कर सजा दिलाने को मजबूत पैरवी करने के प्रयासों में जुट गई है।

हत्या के बदले मिले फांसी की मिले सजा

डा. आस्था अग्रवाल की हत्या के राजफाश के बाद बहन आकांक्षा व भाई अमित व अभिनय ने पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की। उन्होंने राजफाश को लेकर संतुष्टी जताई। उन्होंने कहा कि हत्यारे बहनोई को फांसी की सजा मिले। तब ही उन्हें सकून मिलेगा।

भाई को पता थी पूरी बात

अरुण ने बच्चों को छोड़ते वक्त तरुण को पूरी बात बता दी थी। लेकिन, उसने पुलिस के सामने सच नहीं बोला। तरुण जानता था कि अरुण ने ही हत्या की है और वह फरार है। पुलिस को सबसे पहला सुराग अशोक के मोबाइल फोन से मिला था। अशोक ने अपना फोन अरुण को दे दिया था। पुलिस उसी को ट्रेस किया था।

पुलिस को भी मिलती थी झगड़े की सूचना

अरुण व आस्था के बीच झगड़ा न सिर्फ परिवार के लोगों को पता था, बल्कि पुलिस तक भी इसकी सूचना पहुंचती थी। कई बार आस्था ने 112 नंबर पर पुलिस को झगड़े की जानकारी दी थी। तब लैपर्ड घर पहुंचती थी। लेकिन, पति-पत्नी का विवाद बाद में शांत हो जाता था। थाने में कभी कोई शिकायत नहीं आई।

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