इलाज के दौरान दूसरे संविदाकर्मी की भी मौत

हरदुआगंज परियोजना में 11 जुलाई को बायलर की राख से जले तीन संविदाकर्मियों में से दो की मौत हो गई।

JagranWed, 28 Jul 2021 01:10 AM (IST)
इलाज के दौरान दूसरे संविदाकर्मी की भी मौत

संसू,अलीगढ़: हरदुआगंज परियोजना में 11 जुलाई को बायलर की राख से जले तीन संविदाकर्मियों में से दूसरा संविदाकर्मी भी 16 दिन बाद मौत से लड़ते -लड़ते हार गया। मंगलवार को दोपहर 12 बजे प्राइवेट अस्पताल वरूण ट्रामा में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। ये खबर सुनकर परिजनों में हाहाकार मच गया। इधर, परिजनों ने संविदाकार पर इलाज न करवाने का आरोप लगाया है। परिजनों ने शाम को शव को परियोजना के मुख्य गेट पर रखकर मुआवजे एवं नौकरी की मांग की। जानकारी मिलने पर पुलिस ने मौके पर जाकर परिजन एवं भीड़ को समझाने की कोशिश की लेकिन परिजन नहीं माने, हंगामा बढ़ता देख परियोजना के उच्च अधिकारी अधीक्षण अभियंता प्रेम धवन,सुनील गुप्ता, अधिशासी अभियंता विकास आनंद एवं राजू सिंह और मृतक के परिजन के बीच मुआवजे को लेकर बैठक हुई, जिसमें पांच लाख रुपये का चेक, बाउचर के हिसाब से इलाज का खर्च, शव संस्कार के लिए पांच हजार रुपये ,संविदा पर आश्रित को नौकरी एवं अधिकारियों की तरफ से सहयोग धनराशि मिलने पर परिजनों ने शव को गेट से हटाया।

हरदुआगंज तापीय परियोजना के अंदर 11 जुलाई की रात सभी संवदिाकर्मी नाइट ड़यूटी कर रहे थे। अचानक करीब 11 बजे ग्रेड फेल हो गया जिस कारण सात नंबर यूनिट चलते -चलते बंद हो गई। इसे दोबारा से लाइटअप करते समय बायलर बैक मार गया। बायलर की गर्म राख की चपेट में आने से तीन संविदाकर्मी प्रभा इंजीनियरिग व‌र्क्स के अंडर में सात नंबर यूनिट की कनवेयर को चलाने का काम करते थे, बुरी तरह से झुलस गए। इन्हें परियोजना चिकित्सालय लाया गया था, वहां से अलीगढ़ मेडिकल कालेज में रेफर कर दिया गया था।

विशाल कुमार पुत्र सत्यप्रकाश निवासी नगौला का परिजन शुरू से ही वरूण ट्रामा में निजी खर्च पर इलाज करा रहे थे। परिजन के अनुसार संविदाकार एक दिन भी संविदा कर्मी को देखने के लिए नहीं आया और न ही आर्थिक तौर पर मदद की। जानकारी मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुंच कर भीड़ को समझाने की कोशिश की, वह नहीं माने मुआवजे के लिए अड़े रहे। इससे पहले भी संविदाकार की तरफ से इलाज में लापरवाही के चलते सचिन कुमार उर्फ पिन्टू पुत्र विजय सिंह एफसीआइ कॉलोनी रामपुर की मौत मेडिकल कालेज में हो चुकी है। प्रबंधन की तरफ से पांच लाख का चेक मुआवजे के तौर पर दिया गया था।

परिजनों के अनुसार विशाल की तबीयत दिन -प्रतिदिन खराब होती जा रही थी। उन्होंने संविदाकार से कई बार इलाज के लिए पैसे की मांग की, लेकिन वह टालता रहा। सोमवार की रात को विशाल की तबीयत बिगड़ी और मंगलवार की दोपहर 12 बजे प्राइवेट अस्पताल में अंतिम सांस ली। वहीं, परिजनों ने शाम को परियोजना के मुख्य गेट के सामने शव को रख कर नौकरी एवं इलाज में खर्च हुए पैसे की मांग की। विशाल अपने परिवार में एक भाई और दो बहन में सबसे बड़ा था। मृतक के परिजनों का रो -रोकर बुरा हाल है। संविदाकार छोटे लाल से इस संबध में बात करने की कोशिश की गई, लेकिन बात नहीं हो सकी।

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