एएमयू ने खोए अनमाेल हीरे, हर शिक्षक था अपनी फील्ड का मास्टर

शिक्षकों के जाने से कई छात्रों की पीएचडी भी अधर में फंस गई है।

कोरोना की दूसरी लहर ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। पिछले 20-25 दिन में सर सैयद के इस इदारे ने 16 ऐसे बहुमूल्य शिक्षकों को खोया जो अपने आप में ज्ञान के भंडार थे। अपनी विषय के विशेषज्ञ थे।

Sandeep Kumar SaxenaTue, 11 May 2021 07:00 AM (IST)

अलीगढ़, संतोष शर्मा। कोरोना की दूसरी लहर ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। पिछले 20-25 दिन में सर सैयद के इस इदारे ने 16 ऐसे बहुमूल्य शिक्षकों को खोया जो अपने आप में ज्ञान के भंडार थे। अपनी विषय के विशेषज्ञ थे। देश ही नहीं दुनिया भर के छात्र उनके काबिलियत के कायल थे। इन शिक्षकों के जाने से कई छात्रों की पीएचडी भी अधर में फंस गई है। ज्ञान के इन रत्नों के लिए परिवार वाले तो गम में है हीं यूनिवर्सिटी से जुड़ा हर व्यक्ति व्यथित है। कई प्रोफेसरों व सेवानिवृत्त कर्मचारियों की भी मौत हुई है। एएयमू के आस पास नया वायरस तो नहीं पैदा हो गया इसकी जांच के लिए यूनिवर्सिटी ने जांच के लिए सैंप भेजा है। 

फैमिली ला, पब्लिक इंटरनेशनल ला में थी महारथ हासिल 

एएमयू में यूं तो हर शिक्षक के जाने का गम है, लेकिन सबसे ज्यादा गमों का पहाड़ कानून संकाय के डीन प्रो. शकील अहमद समदानी के जाने का टूटा। प्रो. समदानी एक शिक्षक ही नहीं थे, बल्कि समाज में एकरूपता का धागा पिरोने वाले सख्श भी थे। हमेश हंस मुख रहने वाले प्रो. समदानी फैमिली ला, पब्लिक इंटरनेशनल ला, ह्यूमन राइट्स, इस्लामिक लीगल सिस्टम एंड कॉन्स्टीट्यूशनल ला आफ इंडिया के विशेषज्ञ थे। उन्होंने यूनिफार्म सिविल कोड और मुस्लिम तलाक के लिए निर्वाह भत्ता पर किताबें भी लिखीं। दो पुस्तकों पर काम कर रहे थ। एएमयू के लिए वो कितने महत्वपूर्ण थे इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वह यूनिवर्सिटी कोर्ट, एग्जीक्यूटिव काउंसिल, एकेडमिमक काउंसिल के सदस्य रहे। विश्वविद्यालय के संपत्ति अधिकारी (राजपत्रित), सांस्कृतिक शिक्षा केंद्र के समन्वयक भी रहे। 

वेदों के थे ज्ञाता 

 

एएमयू के संस्कृत विभाग के पूर्व चेयरमैन प्रो. खालिद बिन युसूफ का जाना यूनिवर्सिटी के लिए अपूरणीय क्षति है। प्रो. खालिद एएमयू के पहले ऐसे शिक्षक थे जिन्होंने ऋग्वेद में पीएचडी की। वह वेदों के ज्ञाता थे। संस्कृत को उन्होंने आत्मसात कर लिया था। डिपार्टमेंट के शिक्षक ही नहीं आसपास के कालेजों के शिक्षक भी उनसे मार्गदर्शन लेने आते थे। प्रो. खालिद संस्कृत विभाग में 30 साल से सेवारत थे। तीन साल चेयरमैन भी रहे। 2009-10 में यूनिवर्सिटी के वीएम हाल के प्रोवोस्ट और एएमयू कोर्ट के सदस्य भी रहे। वर्तमान में वह एएमयू की डिसएविलिटी यूनिट के समन्वयक थे। उन्होंने नौ किताबें लिखीं थीं। 991 में उन्हें ओपन दक्षेस राष्ट्रीय मौलाना अबुल कलाम आजाद निबंध लेखन प्रतियाेगिता का प्रथम पुरस्कार राष्ट्रपति शंकरदयाल शर्मा ने दिया था। 2005 में विजय रत्न अवार्ड उड़ीसा और असम के पूर्व राज्यपाल भीष्म नारायण सिंह के हाथों मिला था। 

बड़ा कृषि वैज्ञानिक खो दिया 

कोरोना काल में एएमयू ने प्रो. मुहम्मद अली खान के रूप में बड़ा वैज्ञानिक खो दिया। यूनिवसि्रटी के पोस्ट हार्वेस्ट इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलाजी विभाग में कार्यरत प्रो. खान पोस्ट हार्वेस्ट इंजीनियरिंग क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वह भारत सरकार के पर्यावरण और वन मंत्रालय की विभिन्न परियोजनाओं में प्रधान अन्वेषक थे। उन्होंने पीएचडी, स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों को पढ़ाया। खाद्य इंजीनियरिंग, खाद्य प्रसंस्करण, खाद्य उत्पाद निर्माण, प्राकृतिक रंगाई, आदि उनकी रुचि के विषय थे। उन्होंने 1990 में रुड़की विश्वविद्यालय से कंप्यूटर एडेड प्रोसेस प्लांट डिज़ाइन में विशेषज्ञता के साथ केमिकल इंजीनियरिंग में मास्टर आफ इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की। एएमयू में सेवाकाल के दौरान ही उन्होंने 2014 में पीएचडी की। पर्यावरण और वन मंत्रालय प्रायोजित कई परियोजनाओं पर भी उन्होंने काम किया। 

चिकित्सा क्षेत्र में किया काम 

एएमयू के जेएन मेडिकल कालेज के चिकित्सा विभाग के चेयरमैन प्रो. शादाब ए खान भी नहीं रहे। मेडिकल में चिकित्सा सेवाओं के सुधार में उन्हें याद किया जाएगा। उच्च स्तर की मेडिकल सेवाओं को सभी जन साधारण तक पहुंचाने के लिए प्रो. खान हमेशा चिंतित रहते थे। वह 1990 में जेएन मेडिकल कालेज से क्लिनिकल रजिस्ट्रार के रूप में जुड़े थे। 1992 में लेक्चरर नियुक्त हुए। बाद में वह एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर बन गए। उन्होंने कुवैत के अल-अमीरी अस्पताल में भी काम किया। प्रो. शादाब ने उच्च स्तरीय पत्रिकाओं में अपनी रूचि के विषयों पर लेख लिखे और चिकित्सा सम्मेलनों में भाग लिया। 

ये प्रोफेसर भी एएमयू ने खाेए

प्रो. शकील समदानी, पूर्व प्राक्टर प्रो. जमशेद, सिद्ददीकी, सुन्नी थियोलोजी डिपार्टमेंट के प्रो. एहसानउल्लाह फहद, उर्दू विभाग के प्रो. मौलाना बख्श अंसारी, राजनीतिक विज्ञान विभाग के प्रो. काजी,मोहम्मद जमशेद, मोलीजात विभाग के चेयरमैन प्रो. मो. यूनुस सिद्ददीकी, इलमुल अदविया विभाग के चेयरमैन गुफराम अहमद, मनोविज्ञान विभाग के चेयरमैन प्रो. साजिद अली खान, म्यूजियोलोजी विभाग के चेयरमैन डा. मोहम्मद इरफान, सेंटर फोर वीमेंस स्टडीज के डा. अजीज फैसल, यूनिवर्सिटी पालिटेक्निक के मोहम्मद सैयदुज्जमान, इतिहास विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर जिबरैल, संस्कृत विभाग के पूर्व चेयरमैन प्रो. खालिद बिन यूसुफ और अंग्रेजी विभाग के डा. मोहम्मद यूसुफ अंसारी आदि शामिल हैं। इनके अलावा कई सेवानिवृत्त प्रोफेसर भी शामिल हैं। इनमें प्रो. मोहम्मद शब्बीर, अहमद उमर फारूक, प्रो. फरमान हुसैन, प्रो. सिफत अफजल, प्रो. सईद सिद्दीकी, प्रो. एम मुबश्शिर, प्रो. मुहम्मद आरिफ सिद्दीकी आदि शामिल हैं। 

एएमयू में सेवारत 18 शिक्षकों की हुई मौत, 15 कोविड मरीज थे : प्रिंसिपल

अलीगढ़ : एएमयू के जेएन मेडिकल कालेज के प्रिंसिपल प्रो. शाहिद अली सिद्दीकी ने इंटरनेट मीडिया पर वायरल हो रही उस सूची का गलत करार दिया है जिसमें यूनिवर्सिटी के मरने वाले प्रोफेसरों की संख्या बताई जा रही है। प्रो. सिद्दीकी ने कहा है कि कोविड-19 की दूसरी लहर की शुरुआत के साथ 18 सेवारत शिक्षकों की मौत हुई है। इनमें 11 का निधन जेएनएमसी में हुआ, तीन का अलीगढ़ के निजी अस्पतालों में और चार की मृत्यु अलीगढ़ के बाहर हुई है। जिनमें से 15 कोविड या संदिग्ध कोविड मरीज थे। बाकी के तीन शिक्षकों की मृत्यु ब्रेन ट्यूबरकुलोसिस और लिवर की बीमारी जैसे गैर-कोविड कारणों से हुई है। 15 कोविड या संदिग्ध कोविड से हुई मौतों में भी चार अलीगढ़ के बाहर हुई हैं। इंटरनेट मीडिया पर यह भी गलत उल्लेख किया गया है कि पिछले एक महीने में जिन सेवानिवृत्त फैकल्टी सदस्यों की मृत्यु हुई है, उनका जेएनएमसी में इलाज चल रहा था। जबकि इनमें से कई रिटायर्ड शिक्षक अपनी मृत्यु के समय अलीगढ़ में थे ही नहीं। हम सभी मृतकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं। कहा विश्वविद्यालय ने अलीगढ़ में किसी नए कोविड वेरिएंट कि आशंका से जेएनएमसी लैब द्वारा एकत्रित नमूनों की जांच के लिए 

कर्मचारी अपनी सेवाएं देते हुए कोरोनावायरस से संक्रमित हुए

आइसीएमआर से भी संपर्क किया है। जिससे संभवतः बीमारी की गंभीरता में बढ़ोत्तरी हुई है। प्रो. सिद्दीकी न कहा है कि जेएनएमसी प्रशासन और उसके डाक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ की टीम 24 घंटे अपनी क्षमता के अनुसार काम कर रही हैं। हमारे कई स्वास्थ्य कर्मचारी अपनी सेवाएं देते हुए कोरोनावायरस से संक्रमित हुए हैं। हम सभी संबंधित विशेषकर एएमयू के कर्मचारियों को सर्वोच्च प्राथमिकता पर जल्द से जल्द टीकाकरण करवाने के लिए प्रेरित करते हैं क्योंकि टीका लगवाए हुए लोगों में मृत्यु की घटना बहुत कम है। मेडिकल कालेज भी एक टीकाकरण केंद्र है। सभी से शारीरिक दूरी का पालन करने और मास्क का इस्तेमल करने का आग्रह करते हैं।

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