Aligarh Health Department: सास-बहू के साथ अब बेटे को भी परिवार नियोजन की सीख Aligarh News

परिवार नियोजन कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए अभी तक सरकार सास-बहू सम्मेलनों का आयोजन करती रही है। सरकार का मानना है बहुतायत घरों में परिवार नियोजन पर सास-बहू की नहीं चलती बेटे का फैसला ही अंतिम होता है।

Sandeep Kumar SaxenaTue, 21 Sep 2021 05:46 PM (IST)
सरकार का मानना है बहुतायत घरों में परिवार नियोजन पर सास-बहू की नहीं चलती।

अलीगढ़,जागरण संवाददाता। परिवार नियोजन कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए अभी तक सरकार सास-बहू सम्मेलनों का आयोजन करती रही है। सरकार का मानना है बहुतायत घरों में परिवार नियोजन पर सास-बहू की नहीं चलती, बेटे का फैसला ही अंतिम होता है। लिहाजा, अब कार्यक्रम में थोड़ा संसोधन हुआ। अब परिवार नियोजन के लिए सास-बहू-बेटा सम्मेलन का आयोजन होगा। इसमें तीनों को संयुक्त रूप से परिवार नियोजन के लिए प्रेरित किया जाएगा। ये सम्मेलन 20 सितंबर से 20 अक्टूबर तक समस्त उप स्वास्थ्य केंद्रों पर आयोजित किए जाएंगे।

सबने निभाई अहम  भूमिका

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. आनंद उपाध्याय ने बताया कि जिले में उपकेंद्र स्तर पर आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से सास-बहूृ-बेटा सम्मेलन होंगे। इसका उद्देश्य सास और बहू के मध्य समन्वय व संवाद स्थापित कर उनके पारस्परिक अनुभव के आधार पर परिवार नियोजन के कार्यक्रम को बढ़-चढ़कर रुचिकर बनाना है। बेटे को भी संवाद में शामिल किया जा रहा है।

परिवार नियोजन कार्यक्रम के नोडल अधिकारी व अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. एसपी सिंह ने बताया कि खेल व अन्य गतिविधियों के माध्यम सेे इस कार्यक्रमों को और बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे प्रजनन स्वास्थ्य के प्रति अपनी अवधारणाओं, व्यवहार एवं बदलाव में विश्वास आएगा । सम्मेलन में बेटा से आशय सास के बेटे अर्थात प्रतिभाग करने वाली बहू के पति से है। प्रत्येक सम्मेलन में प्रति आशा 8-10 परिवारों से सास-बेटा व बहू प्रतिभाग करेगी। इस तरह प्रत्येक सम्मेलन में लगभग 90 प्रतिभागी शामिल होंगे।

बास्केट आफ च्वाइंस की जानकारी

डा. सिंह के अनुसार सम्मेलन में नव दंपतियों व वृद्ध माता को बास्केट आफ च्वाइस के बारे में जानकरी दे जाएगी। इससे पूर्व लक्षित दंपति की लाइन लिस्टिंग तैयार करेंगी। सभी स्वास्थ्य इकाइयों पर परिवार नियोजन के साधन उपलब्ध हैं। जो लोग इन सेवाओं को आगे बढ़कर अपनाना चाहते हैं, वह निजी अस्पतालों और सरकारी अस्पतालों तक पहुंचने के लिए अपने क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता का सहयोग ले सकते है।

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