Aligarh Panchayat Chunav Result 2021: भाजपा के दिग्गज भी पस्त, तीसरे मोर्चे का बढ़ रहा दबदबा

चुनाव में दिग्गज भी पस्त नजर आ रहे हैं और तमाम सीटों पर उनकी स्थिति कमजोर बनी हुई है।

Aligarh Panchayat Chunav Result 2021 पश्चिम बंगाल की तरह जिला पंचायत चुनाव में भी भाजपा के दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। चुनाव में दिग्गज भी पस्त नजर आ रहे हैं और तमाम सीटों पर उनकी स्थिति कमजोर बनी हुई है।

Sandeep Kumar SaxenaMon, 03 May 2021 10:48 AM (IST)

अलीगढ़, जेएनएन। Aligarh Panchayat Chunav Result 2021: पश्चिम बंगाल की तरह जिला पंचायत चुनाव में भी भाजपा के दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। चुनाव में दिग्गज भी पस्त नजर आ रहे हैं और तमाम सीटों पर उनकी स्थिति कमजोर बनी हुई है। हालांकि अभी नतीजे आने बाकी हैं मगर जिस तरह की स्थिति बन रही है, उससे पार्टी का अध्यक्ष बनना भी मुश्किल लग रहा है। कई वरिष्ठ नेताओं के परिवार की महिलाएं मैदान में उतरी थीं, जिनकी स्थिति ठीक नहीं लग रही है। वो पीछे चल रही हैं। हालांकि, नतीजे पूरे आने के बाद ही सिथति स्पष्ट आएगी। 

भाजपाइयों के चेहरे पर हवाइयां उड़ी

जिला पंचायत चुनाव में भाजपा पहली बार पूरे दमखम के साथ मैदान में उतरी थी। इसलिए पार्टी ने छह महीने पहले से चुनाव की तैयारियों में पूरी ताकत झोंक दी थी। भाजपा ही एकमात्र ऐसी पार्टी थी जिसने 47 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। पार्टी के नेताओं का यह दावा था कि 30 से अधिक जिला पंचायत सदस्य जीत के आएंगे और पार्टी का अध्यक्ष होगा। भाजपाई उत्साह में ऐसे थे कि अध्यक्ष पद की कुर्सी को लेकर तैयारियां भी शुरू हो गई थी,  मगर देर रात जिस तरह से परिणाम आ रहे हैं उससे भाजपाइयों के चेहरे पर हवाइयां उड़ी हुई हैं। 30 सीटें बताई जा रही थी, हालात यह है कि 15 का भी आंकड़ा भाजपा के लिए छूना मुश्किल लग रहा है। चौंकाने वाली बात यह है की वरिष्ठ नेताओं की स्थिति सबसे खराब है। ऐसे में बड़े-बड़े दावे करने वाले नेता अब चुप्पी साधे हुए हैं। वार्ड नंबर 8 से वरिष्ठ भाजपा नेता राजेश भारद्वाज की पुत्रवधू हार के करीब है। वार्ड नंबर 47 से एटा सांसद राजवीर सिंह राजू भैया की समधन वह भाजपा की क्षेत्रीय उपाध्यक्ष ठाकुर श्युराज सिंह की पत्नी विजय देवी मैदान में हैं। उनकी भी स्थिति अच्छी नहीं बताई जा रही। वही पूर्व जिला अध्यक्ष विक्रम सिंह हिंडोल की पुत्रवधू अलका हिंडोल वार्ड नम्बर 28 से पीछे बताई जा रही हैं। चौधरी कल्याण सिंह की पत्नी संध्या सिंह वार्ड नम्बर 31 से पीछे बताई जा रही है।अन्य सीटों पर भी भाजपा के प्रत्याशी पीछे चल रहे हैं। वार्ड नंबर 19 से कृष्णपाल सिंह लाला प्रधान पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष चौधरी सुधीर सिंह से आगे बताए जा रहे हैं। जिले में कई सीटों पर पीछे चलने से स्थिति साफ नजर आ रही है कि भाजपा 10 से 15 सीटों पर सिमट कर रह जाएगी। बहरहाल जब तक पूरे नतीजे नहीं आ जाते तब तक पूरी स्थिति साफ नहीं होगी.

 नहीं आई दिग्गजों की मेहनत काम 

भाजपा ने जिला पंचायत चुनाव  को विधानसभा चुनाव से कम नहीं माना था। इसलिए चुनाव प्रचार में दिग्गजों की पूरी फौज उतार दी थी। एमएलसी और जिला प्रभारी श्री चंद्र शर्मा तो दो महीने से करीब अलीगढ़ में ही डेरा जमाए हुए थे। उन्होंने गांव-गांव जाकर संपर्क किया सभाएं की और भाजपा के प्रति माहौल बनाने का काम किया। मगर जिस प्रकार से नतीजे आ रहे हैं उसे देखते हुए यह साफ नजर आ रहा है कि उनकी मेहनत भी रंग नहीं लाई। वही प्रचार में एटा सांसद राजवीर सिंह राजू भैया, सूबे वित्त राज्य मंत्री संदीप सिंह, सांसद सतीश गौतम समेत जिले के सभी विधायक चुनाव में लगे हुए थे, उन्हें अपनी अपनी विधानसभा क्षेत्रों में प्रचार की जिम्मेदारी दी गई थी। साथ ही यह भी कहा गया था कि उनकी विधानसभा क्षेत्र में किसी भी तरह से कमजोर नहीं होना चाहिए। मगर भाजपा का यह लाव-लश्कर फिलहाल अभी काम आता नहीं दिखाई दे रहा है।

तीसरे मोर्चे की होगी बड़ी भूमिका

जिस  प्रकार से अभी जिला पंचायत सदस्यों की स्थिति दिखाई दे रही है, उससे साफ पता चल रहा है कि जिले में तीसरा मोर्चा मजबूत हो रहा है। निर्दलीयों की स्थिति मजबूत होगी और चौधरी सुधीर सिंह  पर दांव खेला जा सकता है। सर्वसम्मति से उनकी पत्नी को अध्यक्ष का दावेदार बनाया जा सकता है।  बहरहाल नतीजे आने के बाद रणनीति बनेगी, तभी सिथति पूरी तरह से स्पष्ट होगी। बहरहाल, जिला पंचायत सदस्यों की घेराबंदी शुरू हो गई है।

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