संसाधनों के अभाव में कमजोर पड़ा अलीगढ़ का ताला-हार्डवेयर कारोबार

Aligarh lock hardware business उत्तर प्रदेश में व्यापारिक माहौल बनाने के लिए भले ही योगी सरकार जुटी हो मगर संसाधनों के अभाव में देश-दुनिया के बाजारों में धाक जमाने वाला अलीगढ़ का ताला-हार्डवेयर कारोबार दिनों दिन कमजोर हो रहा है।

Sandeep Kumar SaxenaFri, 24 Sep 2021 09:28 AM (IST)
आइटीआइ रोड स्थित इंडस्ट्री एस्टेट में भी असुविधाओं का अभाव है।

अलीगढ़, जागरण संवाददाता। उत्तर प्रदेश में व्यापारिक माहौल बनाने के लिए भले ही योगी सरकार जुटी हो, मगर संसाधनों के अभाव में देश-दुनिया के बाजारों में धाक जमाने वाला अलीगढ़ का ताला-हार्डवेयर कारोबार दिनों दिन कमजोर हो रहा है। इस पारंपरिक मैन्युफैक्चरिंग के 100 साल बीतने के बाद भी धातु व उत्पादन की गुणवत्ता की जांच की व्यवस्था नहीं है। जिले के औद्योगिक क्षेत्र मूलभूत सुविधाओं के चलते विकसित नहीं हो रहे। रामघाट रोड स्थित ताला नगरी में नाले-नालियां चौक हैं। आइटीआइ रोड स्थित इंडस्ट्री एस्टेट में भी असुविधाओं का अभाव है। इनमें कामन इफ्युंट ट्रीटमेंट प्लांट (कामन ईटीपी) नहीं है। इसके अभाव में कास्टिंग व निकिल प्लांट का तेजाब व केमीकल युक्त पानी खाली प्लाटों में जा रहा है। जिससे भू जल दूषित हो रहा है। रेलवे फ्रेट कारिडोर बनने के बाद निर्यातकों को कंटेनर डिपो बनने की आस जागी थी, मगर यह भी पूरी नहीं हो रही।

यह हैं कारोबार में समस्‍याएं

प्रदेश सरकार ने ताला-हार्डवेयर कारोबार को वन डिस्ट्रक-वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) में चयन किया था। इसके बाद पिछले साल पीतल मूर्ति व आर्टवेयर निर्माण को भी इसमें शामिल कर लिया। इस क्षेत्र के उद्यमियों को लोन की जटिल प्रक्रिया, बैंक अफसरों की मनमानी व अन्य लापरवाही के चलते योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा। यह अफसरों के चेहतों तक सिमिट कर रह गई हैं। उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) दोनों सेक्टरों में अलग अलग 33 केबीके के बिजली घर नहीं बना पा रहा। सेक्टर वन में एक ही बिजली घर से काम चलाया जा रहा है। पार्क जंगल में बदले हुए हैं। कचरा उठाने की समुचित व्यवस्था नहीं है। ताला नगरी विकसित के दौरान तीन पानी की टंकियों का निर्माण किया गया था। पाइप लाइन न डलने के चलते इनका प्रयोग नहीं हो सका है। अब यह जर्जर हो चुकी हैं। सबमरसेबल का उपयोग बढने से जल दोहन हो रहा है। शासन का पौधा रोपण का अभियान कागजों तक समिट गया है। साउथ के राज्यों के लिए अलीगढ़ से सीधे सुपर फास्ट एक्सप्रेस ट्रेन नहीं हैं। दूसरे रेल मार्ग से उद्यमी जा रहे हैं। ओडीओपी योजना के तहत जिले में छह सीएफसी संचालित करने की योजना है। जिला उद्योग विभाग पिछले एक साल से इसके लिए प्रयास कर रहा है। इन्हें विकसित करने के लिए 15 करोड़ रुपये तक का सरकार अनुदान देगी। इसमें 10 फीसद पैसा व जमीन उद्यमियों के समूह की होगी। देशी-विदेशी आधुनिक मशीनों के लिए भी इस पैसा में बजट अलग से होगा। बिना लाभांस के इन केंद्रों का संचालन होगा। 

उद्योगों को विकसित करने के लिए सरकार पूरी तरह से प्रयासरत है। नए सीएफसी के लिए आवेदन आए हैं, कडी शर्त व प्रावधानों के चलते उद्यमियों के समूह रूचि नहीं ले रहे। कुछ पर वर्ता जारी है। जो सुविधाएं नहीं है, उसकी जानकारी उच्च स्तरीय अफसरों को समय समय पर देते हैं।

- श्रीनाथ पासवान, उपायुक्त उद्योग

हमने सीएफसी के लिए प्रयास किए थे, सरकार की कड़ी शर्त 25 उद्यमियों के समूह, 10 फीसद से अधिक किसी सदस्य की हिस्सेदारी व परिवार के सदस्यों का नाम न होना शामिल है। हम आधुनिक सुविधाओं के साथ इस केंद्र की स्थापना चाहते थे। मगर पीछे हट गए।

- मुकेश जैन, उद्योगपति

ताला-नगरी में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। यहां कचरा उठाने का उचित प्रबंधन नहीं है। रामघाट रोड अंधेरे में डूबा रहता है। पथ प्रकाश व्यवस्था न होने से उद्यमियों की सुरक्षा में सेंध है। उद्योग बंधु की बैठक में उठने वाली समस्याओं के प्रति अफसर संजीदा हों।

- मोहित गुप्ता, उद्यमी, तालानगरी

अर्से से कंटेनर डिपो की मांग की जा रही है। मगर सुनवाई नहीं हो रही। अलीगढ़ निर्मित उत्पादनों को प्रदर्शन करने के लिए एक कामन आडिटोरियम बनाया जाए। औद्योगिक क्षेत्रों में पार्कों की देख-रेख के लिए माली नियुक्त किए जाएं।साउथ के लिए सीधे ट्रेन हों।

- शमन माहेश्वरी, महामंत्री, अलीगढ़ उद्योग व्यापार मंडल

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