अलीगढ़ को साढ़े दस टन आक्सीजन मिली

हाल फिलहाल जिले में आक्सीजन की किल्लत नहीं हैं। गुरुवार को भी चार से पांच टन आक्सीजन और आने की उम्मीद है।

JagranTue, 27 Apr 2021 10:35 PM (IST)
अलीगढ़ को साढ़े दस टन आक्सीजन मिली

जागरण संवाददाता, अलीगढ़ : मंगलवार को जिले में एक साथ साढ़े दस टन आक्सीजन आई। इसमें उत्तराखंड के काशीपुर से साढ़े छह टन आक्सीजन सोमवार देर रात पहुंची, शाम को चार टन आक्सीजन रुड़की से मिल गई। हाल फिलहाल जिले में आक्सीजन की किल्लत नहीं हैं। गुरुवार को भी चार से पांच टन आक्सीजन और आने की उम्मीद है।

मंगलवार को जिले को दूसरे शहरों से आक्सीजन नहीं मिली थी। जेएन मेडिकल, दीनदयाल अस्पताल समेत अन्य कोरोना अस्पतालों में आक्सीजन की किल्लत शुरू हो गई थी। इसकी गूंज शासन तक पहुंच गई। वहां से प्रमुख सचिव ने उत्तराखंड के काशीपुर में बात की। इस पर साढ़े छह टन आक्सीजन जिले के लिए मंजूर हुई। सोमवार देर रात लिक्विड आक्सीजन जिले में पहुंच गई। इससे अस्पतालों में आपूर्ति हो सकी। इसके बाद मंगलवार शाम को भी जिले के हिस्से में चार टन गैस आई। रुड़की से इसकी आपूर्ति हुई। वहां से औषधि निरीक्षक हेमेंद्र चौधरी अपनी देखरेख में टैंकर को लेकर आए। उन्होंने गैस टैंकर को केसी प्लांट पर खाली कराया। यहां से जिलेभर के अस्पतालों को आपूर्ति दी गई।

यह हैं जिले के हालात

जिले में कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए सरकारी और निजी तौर पर 13 अस्पताल संचालित हैं। इनमें करीब 300 मरीज आक्सीजन के सहारे ही जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। इसके अलावा अन्य निजी अस्पतालों में आक्सीजन सपोर्ट पर तमाम मरीज भर्ती हैं। हर दिन करीब छह से सात टन आक्सीजन की जरूरत होती है, लेकिन जिले में महज तीन से चार टन ही आक्सीजन मिल रही है। इस हिसाब से मंगलवार का दिन काफी अच्छा रहा। करीब साढ़े दस टन आक्सीजन अलीगढ़ को मिली। हर दिन करीब दो से ढाई टन आक्सीजन कासिमपुर स्थित राधा इंडस्ट्रिीयल प्लांट से तैयार हो रही है।

जमाखोरी करने पर दर्ज होगा मुकदमा : प्रशासन के पास कुछ अस्पताल संचालकों द्वारा आक्सीजन की जमाखोरी की शिकायत पहुंची हैं। ऐसे में अब प्रशासन ने इसको लेकर सख्त रुख अपना लिया है। अब जमाखोरी व मुनाफाखोरी के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा। इसमें आरोपित मिलने पर संबंधित के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा। प्रशासन ने निर्देश दिए कि सभी प्लांट क्षमता के हिसाब से आक्सीजन पैदा करें। जिले में आठ प्लांट हैं। इनमें से कुछ ट्रेडर्स हैं, वहीं तीन ऐसे हैं जो लिक्विड के तौर पर गैस को बाहर से मंगाते हैं। यहां लाने के बाद मेडिकल आक्सीजन गैस में तब्दील करते हैं।

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