Aligarh Municipal Corporation: यूजर चार्ज पर A to Z कंपनी से 11 साल पहले हुआ था अनुबंध

अनावासीय भवनों को छह श्रेणियों में बांटा गया,

पांच अप्रैल 10 को नगर निगम और ए टू जेड कंपनी के बीच हुए अनुबंध के बाद यूजर चार्ज लगाया गया था। आवासीय भवनों को चार श्रेणियों में बांंटकर प्रतिमाह 10 से 40 रुपये शुल्क निर्धारित हुआ। अनावासीय भवनों को छह श्रेणियों में बांटा गया

Sandeep Kumar SaxenaFri, 14 May 2021 11:24 AM (IST)

अलीगढ़, जेएनएन। नगर निगम के संपत्ति कर से यूजर चार्ज हटाने पर अफसरों की मौखिक सहमति तो मिल गई है, लेकिन संपत्ति कर के बिल से इसे हटाया नहीं जा सका। उपभोक्ता यूजर चार्ज काटकर बकाया बिल जमा कर रहे हैं। यूजर चार्ज वसूलने की 11 साल पहले बनी योजना अभी भी विवाद की वजह बनी हुई है। पहले इसे एटूजेड कंपनी वसूलती थी, अब नगर निगम वसूली कर रहा है। आपत्ति इस बात की है कि मद में ये वसूला जा रहा है, वह सेवा लोगों को मिल नहीं रही। पार्षदों ने ये मुद्​दा पुरजोर तरीके से उठाया था। बरती गईं खामियों पर निगम अधिकारियों से सवाल किए, मगर अधिकारी संतोषजनक जवाब न दे सके। 

अनावासीय भवनों को छह श्रेणियों में बांटा

पांच अप्रैल, 10 को नगर निगम और ए टू जेड कंपनी के बीच हुए अनुबंध के बाद यूजर चार्ज लगाया गया था। आवासीय भवनों को चार श्रेणियों में बांंटकर प्रतिमाह 10 से 40 रुपये शुल्क निर्धारित हुआ। अनावासीय भवनों को छह श्रेणियों में बांटा गया, जिसमें 50 से 500 रुपये तक चार्ज रखा। कंपनी द्वारा 40 लाख रुपये वसूल कर प्रतिमाह निगम को देना तय हुआ। वसूली कम होने पर निगम टिपिंग फीस से एक हिस्सा काट लेता है। टिपिंग फीस कलेक्शन प्वाइंट से कूड़ा उठाने के एवज में निगम द्वारा कंपनी को दी जाती है। यूजर चार्ज के मद में वर्ष 2015-16 में 1,49,60,000, 2016-17 में 2,06,42,738, 2017-18 मेें 2,56,62,338 व 2018-19 में 2,74,21,443 रुपये की आय हुई थी। जबकि, 40 लाख प्रति माह के हिसाब से 4,80,00,000 रुपये वार्षिक मिलना चाहिए था। इन चार वर्षों में करीब आठ करोड़ का घाटा हुआ। 2010 से अब तक कितना घाटा हुआ होगा, इसका सहज की अंदाजा लगाया जा सकता है। इसका लेकर आपत्तियां भी हुईं, लेकिन कुछ हुआ नहीं। पार्षद 

वसूली का अधिकार कंपनी पर 

वीरेंद्र सिंह ने बताया कि यूजर चार्ज बढ़ाने का प्रस्ताव 2019 में कार्यकारिणी ने पास किया था। वसूली का अधिकार कंपनी पर ही रहा। अब यूजर चार्ज को संपत्ति कर में शामिल कर दिया गया। संपत्ति कर के बिल में यूजर चार्ज लगकर आ रहा है। जबकि, नगर निगम अधिनियम 1959 के तहत संपत्ति कर में केवल गृहकर, ड्रेनेज व जलकर व स्वच्छता कर ही शामिल किया जा सकता है। हालांकि, अफसराें ने संपत्ति कर से यूजर चार्ज हटाने का दावा किया है, लेकिन कंम्प्यूटर सिस्टम को अपडेट नहीं करा सके। जो बिल उपभोक्ताओं को मिल रहे हैं, उनमें यूजर चार्ज की बकाया राशि अंकित होती है।

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