विद्यार्थियों की जरूरत के हिसाब से स्कूल संचालकों को करने होंगे कोर्स के आवेदन

2021 की परीक्षा में ये फायदा इंटरमीडिएट के छात्र-छात्राओं को मिलना था। मगर परीक्षा निरस्त हुईं और परिणाम छमाही व प्री-बोर्ड परीक्षा के अंकों के आधार पर जारी किया गया। विद्यार्थियों को अगली कक्षा में प्रमोट करने की प्रक्रिया अपनाई गई।

Sandeep Kumar SaxenaFri, 03 Dec 2021 03:32 PM (IST)
विद्यार्थियों को अगली कक्षा में प्रमोट करने की प्रक्रिया अपनाई गई।

अलीगढ़, जागरण संवाददाता। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (सीबीएसई) ने इंटरमीडिएट के विद्यार्थियों के लिए राहत देने वाला कदम उठाया। मगर विद्यार्थियों को इसका लाभ कई स्कूलों में नहीं मिल पा रहा है। नई व्यवस्था के तहत तीन मुख्य विषयों मेें से किसी एक में फेल होने पर छठवें अतिरिक्त विषय से उसको रिप्लेस यानी बदलकर पास हुआ जा सकता है। 2021 की परीक्षा में ये फायदा इंटरमीडिएट के छात्र-छात्राओं को मिलना था। मगर परीक्षा निरस्त हुईं और परिणाम छमाही व प्री-बोर्ड परीक्षा के अंकों के आधार पर जारी किया गया। विद्यार्थियों को अगली कक्षा में प्रमोट करने की प्रक्रिया अपनाई गई।

यह हैं नियम

हाईस्कूल के विद्यार्थियों के लिए ऐसी सुविधा सीबीएसई ने की थी। सीबीएसई के इस कदम से जिले के लगभग हजारों विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा। पिछले साल इंटरमीडिएट में 5609 विद्यार्थी पंजीकृत थे। नई व्यवस्था के तहत अगर किसी विद्यार्थी ने छठवां अतिरिक्त विषय ले रखा है तो वो अपने फेल होने वाले विषय से उसको बदलकर पास हो सकता है। ये अतिरिक्त विषय स्किल बेस्ड भी हो सकता है। कोरोना काल मेंं प्रभावित हुई पढ़ाई के बीच सीबीएसई ने इंटरमीडिएट छात्रों के लिए भी राहत देने वाला कदम उठाया। इंटरमीडिएट के छात्र-छात्राओं को ये सुविधा तभी मिल सकेगी जब वे छठवां विषय लें। इसके साथ ये भी जरूरी होगा कि स्कूल संचालकों ने अपने यहां छठवें विषय को पढ़ाने के लिए कोई सब्जेक्ट ले रखा हो। अतिरिक्त विषय लेने व उसकी पढ़ाई कराने की व्यवस्था करने में स्कूल संचालकों को अतिरिक्त खर्च भी करना पड़ता है। स्कूल की तरफ से अतिरिक्त विषय संचालित करने पर ही विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलेगा। मगर अब सीबीएसई की अोर से नए सत्र से हर विद्यालय को विद्यार्थियों की जरूरत को देखते हुए अपने यहां अतिरिक्त विषय लेना होगा।

कंपार्टमेेंट परीक्षा से मिली मुक्ति

पिछले साल तक इंटरमीडिएट में किसी एक विषय में फेल होने पर विद्यार्थी को कंपार्टमेेंट परीक्षा देनी होती थी। इसको पास कर वो अपना साल बचाने में कामयाब होता था। इसके लिए आवेदन करना पड़ता था, फीस जमा करनी पड़ती थी। अब सब्जेक्ट रिप्लेस की सुविधा के चलते उनको कंपार्टमेंट परीक्षा भी नहीं देनी होगी।

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