अलीगढ़ में छह सौ बीघा सरकारी जमीन का 92 लोगों को फर्जी पट्टा

जमीन का फर्जी आवंटन हो गया।92 लोगों के नाम यह भूमि दर्ज की गई।

सरकारी जमीनों में फर्जीवाड़ा कम होने का नाम नहीं ले रहा है। अब ऐसा ही एक मामला गभाना कसेरू ग्राम पंचायत में सामने आया है। यहां पर करीब 600 बीघा जमीन का फर्जी आवंटन हो गया।92 लोगों के नाम यह भूमि दर्ज की गई।

Sandeep kumar SaxenaSat, 27 Feb 2021 11:55 AM (IST)

अलीगढ़, जेएनएन। सरकारी जमीनों में फर्जीवाड़ा कम होने का नाम नहीं ले रहा है। अब ऐसा ही एक मामला गभाना कसेरू ग्राम पंचायत में सामने आया है। यहां पर करीब 600 बीघा जमीन का फर्जी आवंटन हो गया।92 लोगों के नाम यह भूमि दर्ज की गई। ग्रामीणों की शिकायत पर प्रशासन ने जांच की तो पूरे मामले का पर्दाफाश हो गया। तहसील के रिकार्ड में पट्टे से जुड़े दस्तावेज तक नहीं मिले हैं। फर्जी आवंटन में 16 लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हो चुके हैं।

यह है मामला

पिछले दिनों कसेरू ग्राम पंचायत के लोगों से डीएम से शिकायत की थी। इसमें पंचायत में करीब 600 बीघा जमीन का फर्जी पट्टा आवंटन की बात कही गई थी। इस पर डीएम ने एसडीएम को जांच के आदेश दिए। इसमें एसडीएम ने आवंटियों दस्तावेज लिए तो सामने आया कि इसमें ग्राम समाज की जमीन पर 1999 में 92 लोगों के फर्जी पट्टे होने की बात सामने आई। जिन लोगों के द्वारा पट्टा होने की बात कही जा रही थी। उनके दस्तावेजों में फसली वर्ष 1406-1411 की खतौनी में नाम इंद्राज दर्शाए गए। तत्कालीन एसडीएम द्वारा पट्टा आवंटन का आदेश भी मिला, लेकिन तहसील के रिकार्ड में ऐसा कोई भी दस्तावेज नहीं था। खतौनी में भी कोई कागजात नहीं थे। प्रशासन की ओर से इसके चलते मुकदमा भी दर्ज हुआ है। इसमें गायत्री, हेतपाल, बीना देवी, रामवीर गिरी, ऋषि पाल, शारदा देवी, रेखा देवी, स्व. दुलारी देवी, स्व.सत्यवती, रानीदेवी, स्व.देवी ङ्क्षसह, राकेश, किरनपाल, जय किशोर, मन्जू देवी, महेश ङ्क्षसह के खिलाफ चंडौस में मुकदमा दर्ज हुआउ है। डीएम ने बताया कि फर्जी आवंटन की बात सामने आई थी। इसमें कुछ लोगों पर मुकदमा दर्ज हुआ है।

यह तथ्य आए सामने

जांच में सामने आया कि 1986 में प्रधान ने लोगों के नाम 600 बीघा जमीन कृषि पट्टा किया था। स्थानीय लोगों ने पट्टों के गलत आवंटन की शिकायत की। इसके बाद पूरा मामला राजस्व परिषद तक पहुंच गय। यहां से 2019 में परिषद ने 35 पट्टे सही माने और36 निरस्त कर दिए। जिन लोगों के पट्टे निरस्त हुए वह हाईकोर्ट चले गए। अभी यह मामला यहां भी चल रहा है।

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