स्वच्छ हवा को लगाने होंगे पौधे, उड़ने से रोकनी होगी धूल

-वायु प्रदूषण के लिए धूल कण हैं जिम्मेदार -एयर एक्शन प्लान पर दो वर्ष में नहीं हो सका अमल

JagranFri, 04 Jun 2021 08:30 PM (IST)
स्वच्छ हवा को लगाने होंगे पौधे, उड़ने से रोकनी होगी धूल

आगरा, जागरण संवाददाता। शनिवार को विश्व पर्यावरण दिवस है। वर्ष 1972 से प्रतिवर्ष पांच जून को लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए यह दिन मनाया जा रहा है। बावजूद इसके प्रदूषण का स्तर कम होने के बजाय बढ़ा ही है। आगरा तो इस मामले में अत्यंत संवेदनशील है। यहां ताजमहल के धवल संगमरमरी सौंदर्य को वायु प्रदूषण से बचाने के लिए ही 30 दिसंबर, 1996 को सुप्रीम कोर्ट ने ताज ट्रेपेजियम जोन बनाने का आदेश करते हुए सभी प्रदूषणकारी उद्योगों पर रोक लगा दी थी। एक जून, 2019 को आगरा का एयर एक्शन प्लान भी लांच किया गया, लेकिन उस पर आज तक अमल नहीं हो सका है।

आगरा में वायु प्रदूषण के लिए मुख्य रूप से अति सूक्ष्म कण (पीएम2.5) और धूल कण (पीएम10) जिम्मेदार हैं। कोरोना काल में वर्ष 2020 में हुए लाकडाउन और इस वर्ष हुई आंशिक बंदी में औद्योगिक व मानवीय गतिविधियों पर रोक लगने से वायु प्रदूषण कुछ कम जरूर हुआ है, लेकिन स्थिति इतनी भी ठीक नहीं हुई है कि निश्चित होकर बैठ जाएं। विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या (चार जून) पर वर्ष 2018 में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआइ) 136 था, जो शुक्रवार को 81 रहा। यह पिछले वर्ष के एक्यूआइ 66 से अधिक था। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार एक्यूआइ 0-50 तक रहने पर ही वायु गुणवत्ता अच्छी स्थिति में रहती है। पर्यावरण को संरक्षित रखना है तो हमें अधिक से अधिक पौधे लगाने के साथ धूल कणों को उड़ने से रोकने के लिए समुचित इंतजाम करने होंगे। विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर एक्यूआइ

वर्ष, एक्यूआइ

2018, 136

2019, उपलब्ध नहीं

2020, 66

2021, 81

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यह करने होंगे उपाय

-पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की गाइडलाइन के अनुसार जिले के कुल क्षेत्रफल के 33 फीसद में वन क्षेत्र होना चाहिए। फारेस्ट सर्वे आफ इंडिया की वर्ष 2019 की रिपोर्ट के अनुसार यहां केवल 6.5 फीसद क्षेत्रफल में ही वन क्षेत्र है, जो मानक से बहुत कम है। अधिक से अधिक पौधे लगाने होंगे।

-निर्माण कार्यों में धूल उड़ने से रोकने के लिए उचित इंतजाम किए जाएं। पानी का नियमित छिड़काव हो और ग्रीन कर्टेन लगाए जाएं।

-सड़कों से धूल नहीं उड़े, इसके लिए फुटपाथ पर इंटरलाकिग टाइल्स या घास लगाई जाए।

-यमुना की तलहटी से धूल कण नहीं उड़ें, इसके लिए यमुना में वर्ष भर पानी की व्यवस्था और उसके किनारों पर पौधे लगाए जाएं।

-वाहनजनित प्रदूषण को रोकने के लिए सार्वजनिक परिवहन के साधनों और इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रयोग को बढ़ावा दिया जाए।

-यमुना प्रदूषित न हो इसके लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की संख्या बढ़ाई जाए। नालों के अशोधित पानी और सीवेज को यमुना में जाने से रोका जाए।

-यातायात को व्यवस्थित किया जाए, जिससे कि जाम नहीं लगे। इससे वाहनजनित वायु व ध्वनि प्रदूषण भी कम होगा।

-कूड़ा जलने पर प्रभावी रोक लगानी होगी।

-पेड़ों को काटने के बजाय उन्हें प्रोजेक्ट के डिजाइन में शामिल किया जाए या ट्रांसलोकेट किया जाए।

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औद्योगिक व मानवीय गतिविधियों पर रोक हमेशा नहीं लगाई जा सकती है। हमें ऐसे रास्ते खोजने होंगे, जिनसे पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचे। अधिक से अधिक पौधे लगाकर, धूल उड़ने से रोकने के इंतजाम कर और यातायात को व्यवस्थित कर हम स्थिति में सुधार कर सकते हैं।

-कमल कुमार, प्रभारी अधिकारी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड प्रदूषण का मानव स्वास्थ्य पर काफी बुरा असर पड़ता है। विकास के नाम पर पेड़ों को काटने के बजाय उन्हें प्रोजेक्ट में शामिल करें या फिर उन्हें ट्रांसलोकेट किया जाए। निर्माण कार्यों में धूल उड़ने से रोकने का इंतजाम नहीं करने वाले विभागों के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

-डा. शरद गुप्ता, पर्यावरणविद

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