World Disability Day 2021: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद करेंगे मानसिक दिव्‍यांग एथलीट पूजा का सम्मान

आगरा निवासी हैं दिव्यांग खिलाड़ी। मिलेगा वर्ष 2020 के सर्वश्रेष्ठ दिव्यांग खिलाडी़ का राष्ट्रीय पुरस्कार। मानसिक दिव्‍यांग पूजा शंकर ने लगातार अच्‍छा प्रदर्शन कर कई पदक हासिल किए हैं। विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में राष्‍ट्रपति करेंगे सम्‍मानित।

Prateek GuptaThu, 02 Dec 2021 12:55 PM (IST)
आगरा की निवासी स्‍पेशल ओल‍ंपिक्‍स की अंतरराष्‍ट्रीय एथलीट पूजा शंकर।

आगरा, संदीप शर्मा। वर्ष 2013 में आस्ट्रेलिया के न्यू कासल्स में स्पेशल ओलिंपिक्स एशिया पैसिफिक रीजनल गेम्स में बाउची खेल में कांस्य पदक। वर्ष 2019 में संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी में स्पेशल ओलिंपिक्स वर्ल्ड समर गेम्स में 200 व 100 मीटर दौड़ में रजत व स्वर्ण पदक। यह उपलब्धियां अपने नाम दर्ज करने वाली मानसिक दिव्यांग पूजा शंकर गुरुवार को एक और उपलब्धि अपने नाम करने जा रही हैं। विश्व दिव्यांगजन दिवस पर राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद उन्हें नई दिल्ली के विज्ञान भवन में सम्मानित करेंगे।

उन्हें वर्ष 2020 का सर्वश्रेष्ठ दिव्यांग खिलाडी का राष्ट्रीय पुरस्कार दिया जाएगा। 44 वर्षीय पूजा का जन्म आगरा में हुआ। वह हिंदी के महान साहित्यकार बाबू गुलाबराय की प्रपौत्री हैं। पिता सुबोध शंकर उप्र आवास एवं विकास परिषद के मुख्य वास्तुविद नियोजक पद से सेवानिवृत और वर्तमान में शिक्षा के साथ मानसिक दिव्यांग बच्चों के उत्थान के लिए उप्र पेरेंट्स एसोसिएशन से जुड़े हैैं। मां अनु शंकर का निधन वर्ष 2004 में हो गया था। इनकी देखरेख दादी व पिता ने की। कोरोना के कारण पिछले पांच महीने से वह भाई-भाभी के साथ गुरुग्राम में रह रही हैं।

मेहनत से पाया मुकाम

जन्म से मानसिक दिव्यांग पूजा को बचपन को लगता था कि वह पढ़ाने भले अपने भाई-बहन का मुकाबला न कर पाएं, लेकिन खेलकूद से वह इस कमी को जरूर पूरा कर सकती हैं। 8-10 वर्ष की आयु से ही उन्होंने खेलों में रुचि ली और कड़ी मेहनत व दृढ़ इच्छाशक्ति से मुकाम पाया। पूजा शंकर पिछले 35 वर्षों से लखनऊ के आशा ज्योति स्कूल में शिक्षा, वोकेशनल ट्रेनिंग व खेलकूद प्रशिक्षण ले रही हैं। इन्हें राष्ट्रीय स्तर के मास्टर कोच मो. एज़ाज़ सिद्दीक़ी ने प्रशिक्षण दिया और खेल-कूद में निपुणता दिलाई। चरणबद्ध तरीके से पूजा ने जिले से राज्य व राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिताओं में परचम लहराकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का नाम रोशन किया। वर्ष 2002 में अपना पहला मेडल उनके निर्देशन में ही प्राप्त किया। खेलकूद के साथ वोकेशनल कार्यों विशेषकर सिलाई व कागज के लिफाफे बनाना उन्हें पसंद हैं।

अनदेखी से नाराज

पूजा ने इस सम्मान के लिए केंद्र सरकार को धन्यवाद दिया, लेकिन राज्य सरकार की अनदेखी से वह नाराज हैं। उनका कहना है कि उनकी तरह प्रदेश के 12 मानसिक दिव्यांग बच्चों ने वर्ष 2019 में अबू धाबी में हुए स्पेशल ओलिंपिक्स वर्ल्ड समर गेम्स में अनेक मेडल जीते। उन्हें भी प्रदेश सरकार को सम्मानित करना चाहिए। बता दें कि स्पेशल ओलिंपिक्स गेम्स सामान्य ओलंपिक्स की तरह ही चार-चार वर्ष के अंतराल पर विश्व के विभिन्न देशों में होते हैं, जिसमे लगभग 200 देशों के खिलाड़ी प्रतिभाग करते हैं।

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