रोते को हंसाने वाले योगेश और प्रतीची ने खुद क्यों उठा लिया ऐसा कदम, सभी के मन में गूंज रहा सवाल

कारोबारी दंपती के कदम से आश्चर्यचकित हैं कालोनी वाले और रिश्‍तेदार। लोगों के लिए आदर्श थे दंपती मासूम का शव देख नम हो गईं आंखें। योगेश और प्रतीची दोनों काफी खुशमिजाज थे। आर्थिक रूप से भी संपन्न थे। खुदकुशी के पीछे की वजह समझ नहीं पा रहे हैं लोग।

Prateek GuptaSat, 04 Dec 2021 11:38 AM (IST)
वंशी विहार में बने इसी मकान में योगेश और प्रतीचि के शव मिले थे।

आगरा, जागरण संवाददाता। योगेश और प्रतीची रोते हुए लोगों को हंसाने वाले थे। जरूरत पड़ने आगे ब़ढ़कर लोगों की मदद करते थे। योगेश और प्रतीची कालाेनी वालों के लिए आदर्श दंपती थे। उन्होंने खुद क्यों ऐसा कदम उठा लिया, पांच साल की बेटी काव्या काे जहर देकर खुद भी मौत को गले लगा लिया। शुक्रवार की सुबह मारूति एंक्लेव कालोनी वालों को दंपती की खुदकुशी का पता चला तो आश्वर्यचकित थे। दंपती के घर पर जुटे सगे संबंधियों और परिचितों की आंखें मासूम काव्या का शव देख नम हो गईं।

बोले सगे संबंधी

कालोनी में हमारा करीब 22 साल पुराना साथ था। योगेश और प्रतीची दोनों काफी खुशमिजाज थे। आर्थिक रूप से भी संपन्न थे। उनसे रोज बातचीत होती थी। इस दौरान कभी ऐसा नहीं लगा कि वह इस तरह का कदम उठा सकते हैं।

राजेंद्र सक्सेना, कालोनीवासी

योगेश और उनके परिवार से 25 साल पुराना नाता है। योगेश के कारोबार शुरू करने के समय से साथ हैं। दंपती धार्मिक प्रवृत्ति और पूजा-पाठ में विश्वास करने वाले थे। उनके मन में खुदकुशी का विचार कैसे आ गया, समझ से परे है।

पवन कुमार,  परिचित

पांच दिन पहले ही योगेश से आखिरी बार बातचीत हुई थी। उनकी बातचीत के दौरान कहीं से भी यह नहीं लगा कि वह किसी तरह के तनाव में हैं। परिवार और अपने बारे में सब कुशल बता रहे थे। समझ नहीं आ रहा है कि अचानक क्या हुआ कि इतना बड़ा कदम उठा लिया।

योगेश मिश्रा, भाई

योगेश और प्रतीची दोनों सकारात्मक विचारों वाले थे।आर्थिक रूप से संपन्न हंसता-खेलता हुआ परिवार था। हमेशा दूसरों की मदद को तैयार रहते थे। उनके खुदकुशी करने की जानकारी मिलने पर स्तब्ध हूं। पुलिस को इसकी तह तक जाना चाहिए।

वीरेश तिवारी, जीजा

माता-पिता को एक पल भी नहीं छोड़ती थी मासूम, इंतजार करके सो गई

परिवार के करीबी लोगों ने बताया कि पांच साल की काव्या पिता योगेश और मां प्रतीची के बिना एक पल भी नहीं रहती थी। मां कहीं भी जाएं वह उनके साथ ही रहती थी। दंपती भी उसे बेहद प्यार करते थे। गुरुवार की शाम को जब पिता योगेश उसे और आद्या को घर पर छोड़कर गए तो वह दादी से बार-बार मां के बारे में पूछ रही थी। माता-पिता का इंतजार करते हुए सो गई थी। रात करीब दस बजे पिता लौटे तो उसे गोद में उठाकर कमरे में ले गए थे। माना जा रहा है उसे कुछ खिलाने के बहाने जहर दिया गया। इसके बाद उसका गला भी दबाया गया था।

प्रतीची ने मंदिर में रखवाई थी टंकी

बंशी विहार में योगेश मिश्रा ने सात साल पहले कार्यालय बनवाया था। कार्यालय के पीछे ही गेट बंद कालोनी दीप कुंज है। जिसमें 14 मकान हैं। कालोनी में रहने सभी परिवार की महिलाएं प्रतीची और उनके बच्चों काे जानती थी। क्योंकि प्रतीची कालोनी में बने मंदिर में नियमित रूप से आती थीं। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए उन्होंने पानी की टंकी वहां रखवा दी थी। कालोनी की महिलाओं ने बताया कि करीब तीन महीने से कार्यालय पर नहीं आ रही थीं। सुबह जब दंपती की मौत का पता महिलाओं को मिला तो सभी कार्यालय पर जुट गईं। 

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