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Weekend Lockdown: वीकेंड की पार्टियां और मस्ती बंद, लोग परेशान

आगरा, प्रभजोत कौर। लॉकडाउन के चलते बिजनस, नौकरी, बचत और यहां तक कि मूलभूत संसाधन खोने के डर से लोगों में चिड़चिड़ापन, गुस्‍सा और नेगेटिव विचार हावी हो रहे हैं। यह तनाव हर आयु वर्ग में अलग-अलग कारणों से बढ़ रहा था। युवा अपने भविष्य को लेकर, महिलाएं घर में बढ़ी जिम्मेदारियों को लेकर और बच्चे घर में बंद होने से तनाव में थे। अनलॉक हुआ तो लोगों ने डर के साथ ही सही, पर घर से निकलना शुरू किया। पूरा हफ्ते काम के बाद शनिवार-रविवार अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ समय बिताना शुरू किया। इससे तनाव में काफी हद तक आराम भी मिला। अब शासन ने दो दिन की बंदी के आदेश किए हैं। यह बंदी लोगों को प्रोफेशनली तो पसंद आ रही है लेकिन व्यकि्तगत तौर पर आजादी छिनने का डर उन्हें सता रहा है।

लॉकडाउन की अवधि लंबी होने के चलते घरों में कैद लोगों के दिनचर्या में बदलाव का असर मनोविकार के रूप में सामने आने लगा था।मनोचिकित्सकों के पास तनाव के कारण परेशान लोगों के फोन आम दिनों के मुकाबले ज्यादा पहुंचने लगे। इसी तनाव से घरेलू हिंसा के मामले भी बढ़े। तीन महीने बाद अनलॉक 1.0 में अपनी पुरानी दिनचर्चा में लौटने पर सभी संतुष्ट नजर आए। हालांकि बच्चे, युवा और महिलाएं अभी भी घरों में ही थे। लेकिन बाहर निकलने की छूट ने तनाव को काफी हद तक कम कर दिया था।

वीकेंड पर होती थी पार्टियां

शहर में 250 से ज्यादा छोटे-बड़े रेस्टोरेंट और ईटिंग पोइंट हैं। लॉक डाउन से पहले यह रेस्टोरेंट वीकेंड पर गुलजार रहते थे। कोरोना के कारण लॉक डाउन में सब कुछ बंद हो गया। दोस्तों और रिश्तेदारों से मुलाकात भी बंद हो गई। इससे भी तनाव में काफी इजाफा हुआ। अनलॉक में रेस्टोरेंट तो नहीं खुले लेकिन एक-दूसरे के घर आना-जाना शुरू हो गया। दोस्तों से मुलाकात, रिश्तेदारों के साथ मुलाकात ने तनाव को कम करने में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बल्केश्वर में रहने वाली सुचि गिल बताती हैं कि कोरोना के कारण हम सभी की जिंदगी में काफी बदलाव आ गया है। तीन महीने सभी अपने घरों में बंद रहे। जैसे-तैसे जिंदगी पटरी पर आ रही थी। वीकेंड वाली पार्टियां तो नहीं पर हम दोस्तों से तो मुलाकात कर ही रहे थे। इससे भी राहत मिलती थी, पर बंदी वीकेंड पर होने से हम तो काफी परेशान हैं।

सदर में रहने वाले संदीप गुप्ता कहते हैं कि धंधा तो कोरोना ने पहले ही खत्म कर दिया है। इस तनाव को वीकेंड पर दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलकर भूलने की कोशिश करते थे। अब वीकेंड की बंदी ने हमारी वो आजादी भी छीन ली है। पूरा हफ्ते काम करने के बाद यही दो दिन तो सभी से मिलने के मिलते थे।

लॉक डाउन के कारण लोगों में काफी तनाव है। अनलॉक में लोग धीरे-धीरे सामान्य हो रहे थे। पर वीकेंड की बंदी उनके तनाव को बढ़ाने का काम ही करेगी। सामान्य सी बात है कि तनाव कम करने के लिए लोग अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलते हैं, अब जब मुलाकात ही नहीं होगी तो तनाव तो बढ़ेगा ही।

- डा. दिनेश राठौर, मनोचिकित्सक

मेरे पास हर रोज कई फोन आते हैं। हम लगातार रिश्तेदारों और दोस्तों से बात करने की सलाह देते हैं, जिससे तनाव कम हो सके। वीकेंड को लेकर एक आम राय है कि यह दो दिन मस्ती और आराम के होते हैं। अब वीकेंड पर ही बंदी से लोग फिर से खुद को घर में कैद समझेंगे। इससे उनके तनाव का स्तर बढ़ेगा।

- डा. पूनम तिवारी, मनोविज्ञान विभाग, आरबीएस कालेज

 

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