FasTag: कैसे हो समय की बचत, पर्यावरण में सुधार, बिना फास्टैग दौड़ रहे वाहन

मंगलवार को लखनऊ एक्सप्रेस-वे टोल प्लाजा से 25 फीसद वाहन बिना फास्टैग के गुजरे।

FasTag सप्ताहभर से फास्टैग है अनिवार्य। वाहन स्वामी नहीं हो रहे जागरूक। कोरई टोल प्लाजा से 15 फरवरी की रात 12 बजे से 23 फरवरी दोपहर 12 बजे तक कुल 83975 वाहन गुजरे। इसमें से 10722 वाहन कैशलेन के माध्यम से दोगुना टैक्स देकर गुजरे।

Tanu GuptaWed, 24 Feb 2021 11:36 AM (IST)

आगरा, अंबुज उपाध्याय। प्रदूषण घटाने और टोल प्लाजा पर बर्बाद होने वाले समय को बचाने के लिए फास्टैग अनिवार्य हुए सप्ताहभर बीत गया है। इसके बाद भी चंद लापरवाह लोगों के कारण ये व्यवस्था प्रभावी नहीं हो पा रही है। टोल प्लाजा पर दोगुना टैक्स भरकर गुजरने वाले वाहनों का आंकड़ा घट नहीं रहा है। अनिवार्यता के बाद जाजऊ टोल प्लाजा से कैशलेन से गुजरने वाले वाहन 10 फीसद से कम है, लेकिन कोरई टोल प्लाजा से 13 फीसद वाहन बिना फास्टैग के गुजरे। वहीं दोनों एक्सप्रेस वे पर अभी फास्टैग प्रभावी नहीं है।

अनिवार्यता के बाद से आठ दिन का आंकड़ा खंगाला गया तो ये स्थिति सामने आई है। कोरई टोल प्लाजा से 15 फरवरी की रात 12 बजे से 23 फरवरी दोपहर 12 बजे तक कुल 83975 वाहन गुजरे। इसमें से 10722 वाहन कैशलेन के माध्यम से दोगुना टैक्स देकर गुजरे। वहीं 3255 वाहन निश्शुल्क निकले। वहीं अनिवार्यता के बाद से मंगलवार दोपहर 12 बजे तक जाजऊ टोल से कुल 124880 वाहन गुजरे, जिसमें से 105966 फास्टैग वाले थे। वहीं कैशलेन से 10972 वाहन गुजरे और 7942 निश्शुल्क गुजरने वाले वाहन थे। यमुना एक्सप्रेस-वे पर फास्टैग की अनिवार्यता नहीं है। यहां सभी वाहन कैशलेन से गुजर रहे हैं। मंगलवार को लखनऊ एक्सप्रेस-वे टोल प्लाजा से 25 फीसद वाहन बिना फास्टैग के गुजरे। एक्सप्रेस-वे पर कैशलेन से गुजरने वाले वाहनों से भी दोगुना टोल टैक्स नहीं लिया जा रहा है।

ऐसे बनवा सकते हैं फास्टैग

फास्टैग बनवाने की अलग-अलग प्रक्रिया हैं। इसको कुछ सरकारी एवं निजी बैंक से बनवाया जा सकता है। निजी बैंकों द्वारा अपने प्रतिनिधि टोल प्लाजा, कुछ पेट्रोल पंप पर तैनात कर प्रक्रिया को कराया जा रहा है। बनवाने का शुल्क तो लगभग 100 रुपये हैं, लेकिन विभिन्न बैंक, ई-वालेट की योजना अलग-अलग हैं। एक ई-वालेट 500 रुपये में फास्टैग बना रहा है। इसमें 150 रुपये बैलेंस मिलता है, जबकि 250 रुपये रिफंडेवल सिक्योरिटी जमा कर ली जाती है। बचे हुए 100 रुपये को फीस माना जा सकता है।

कैशलेन से गुजरने वाले वाहनाें का आंकड़ा 10 फीसद से अधिक ही है। फास्टैग बनवाने वालों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है।

मनीष रंजन, प्रबंधक, कोरई टोल प्लाजा 

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