UP Board Result 2021: यूपी बोर्ड परीक्षा परिणाम फार्मूले की औपचारिक घोषणा बाकी, शुरू हुआ विरोध

UP Board Result 2021 मुख्यमंत्री की स्वीकृति का हो रहा इंतजार 20 जून को होगा फैसला। आल प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने कहा विद्यार्थियों के साथ अन्याय करेगा फार्मूला। परीक्षा परिणाम का फार्मूला तैयार करने के लिए प्रदेश भर से 3910 सुझाव मिले थे।

Tanu GuptaSat, 19 Jun 2021 02:54 PM (IST)
परीक्षा परिणाम का फार्मूला तैयार करने के लिए प्रदेश भर से 3910 सुझाव मिले थे

आगरा, जागरण संवाददाता। उप्र माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा का परिणाम जारी करने का फार्मूला लगभग तय है। मुख्यमंत्री की मुहर लगते ही इसे लागू कर दिया जाएगा। फार्मूले में हाईस्कूल के विद्यार्थियों को कक्षा नौवीं के 50 फीसद और हाईस्कूल प्री-बोर्ड के प्राप्तांक के 50 फीसद के आधार पर प्रोन्नत किया जाएगा। वहीं इंटरमीडिएट में हाईस्कूल के 50 फीसद, 11वीं के 40 फीसद और इंटर प्री-बोर्ड के सिर्फ 10 फीसद अंकों को ही आधार माना जाएगा।

इस फार्मूले के ड्राफ्ट को अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा आराधना शुक्ला की अध्यक्षता में गठित कमेटी में तैयार किया गया है, जिसमें मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक डा. मुकेश अग्रवाल के सुझावों को भी गंभीरता से लेते हुए समाहित किया गया है। बता दें, परीक्षा परिणाम का फार्मूला तैयार करने के लिए प्रदेश भर से 3910 सुझाव मिले थे, जिनमें से विशेष सुझावों का आंकलन कर ड्राफ्ट तैयार किया गया, जिसे 20 जून को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने प्रस्तुत किया जाना है। उनकी मुहर लगते ही फार्मूला लागू कर दिया जाएगा।

वित्तविहीन स्कूल संचालक करने लगे विरोध

हालांकि अभी तक शासन ने बोर्ड परीक्षा परिणाम फार्मूले की औपचारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन इस फार्मूले पर मुहर लगना लगभग तय माना जा रहा है। इसका वित्तविहीन विद्यालय संचालकों ने विरोध करना शुरू कर दिया है। आल प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन (अप्सा) प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार सक्सैना का कहना है कि 50-40-10 फीसद के फार्मूले से विद्यार्थियों के साथ अन्याय होगा क्योंकि परीक्षाफल इंटर का घोषित होना है, तो इंटर के नंबरों को प्राथमिकता देनी चाहिए, जैसे सीबीएसई ने दी है। उनका प्रस्ताव बेहतर है। यूपी बोर्ड के फार्मूले से विद्यार्थियों के कम अंक आएंगे। हालांकि शुरुआत में जब बोर्ड ने इंटर प्री-बोर्ड के अंक मांगें थे, तो तमाम वित्तविहीन विद्यालयों ने परीक्षा न कराने का बयान देकर हाथ खड़े कर दिए थे, लेकिन सूत्रों की मानें, तो बाद में वित्तविहीन विद्यालयों ने जो अंक बोर्ड भेजे, उससे बोर्ड का माथा ठनका क्योंकि अंक 90 फीसद से भी अधिक थे। इसलिए बोर्ड को इस फार्मूले को फाइनल करना पड़ा। 

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