Ahoi Astami: खास है ये राधा कुंड, श्रीकृष्‍ण ने दिया था वरदान, निसंतान के हो जाएगी संतान, पढ़ें क्‍या है मान्‍यता

जिला मथुरा के राधाकुंड में आज अर्ध रात्रि को निसंतान दंपति लगाएंगे गोते। संतान सुख की चाहत में पहुंचे भक्तों को सज गया राधारानी का दरबार। श्रीकृष्ण ने वरदान दिया कि जो भी निसंतान दंपति अहोई अष्टमी की रात यहां स्नान करेगा उसे सालभर के भीतर संतान की प्राप्ति होगी।

Prateek GuptaThu, 28 Oct 2021 11:46 AM (IST)
गोवर्धन के राधा कुंड में आज रात अहोई अष्‍टमी के व्रत के बाद निसंतान दंपत्ति स्‍नान करेंगे।

आगरा, रसिक शर्मा। हसरत भरी निगाह, आंखों से बरसता निसंतान का दर्द, होठों पर करुण पुकार, सूनी गोद भरने को आंचल फैलाती ममता, हे राधारानी, मेरी भी सूनी झोली भर दो! दुनिया भर का दर्द समेटे दंपति जल स्वरूपा राधारानी यानी राधाकुंड में विश्वास के गोते लगाते नजर आएंगे। गुरूवार को अहोई अष्टमी का व्रत कर आधी रात को राधाकुंड में संतान सुख की कामना लिए विश्वास के गोते लगाएंगे। इसके लिए राधाकुंड भी अपनी सुंदरता पर इठला रहा है। भारी संख्या में श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार अहोई अष्टमी पर राधाकुंड में आधी रात स्नान करने वाले दंपती को संतान की प्राप्ति होती है। स्नान के उपरांत एक पसंदीदा फल छोड़ने का विधान है तो पेठा फल का दान भी परंपरा में शामिल है। तमाम देशी और विदेशी दंपती यहां आकर अपना आंचल फैलाएंगे। वहीं संतान की सुख प्राप्त करने वाले दंपती इस रात राधारानी का आभार जताने के लिए भी स्नान करेंगे। पंडित कृष्ण मुरारी उपाध्याय के अनुसार मान्यता है कि निसंतान दंपति कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी की मध्य रात्रि राधाकुंड में स्नान करते हैं तो जल्द ही उनके घर बच्चे की किलकारियां गूंजने लगती हैं।

श्रीकृष्ण ने दिया था राधारानी को वरदान

राधाकुंड अरिष्टासुर की नगरी अरीठ वन थी। अरिष्टासुर बलवान व तेज दहाड़ वाला राक्षस था। उसकी दहाड़ से आसपास के नगरों में गर्भवती के गर्भ गिर जाते थे। गाय चराने के दौरान अरिष्टासुर ने बछड़े का रूप रखकर भगवान कृष्ण को मारने की कोशिश की। कान्हा के हाथों बछड़े का वध करने से उन्हें गोहत्या का पाप लग गया। प्रायश्चित के लिए श्रीकृष्ण ने बांसुरी से कुंड बनवाया और तीर्थों का जल यहां एकत्रित किया। इसी तरह राधारानी ने भी अपने कंगन से कुंड खोदा और तीर्थों का जल एकत्र किया। जब दोनों कुंड भर गए तो कृष्ण और राधा ने रास किया। श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि जो भी निसंतान दंपति अहोई अष्टमी की रात यहां स्नान करेगा, उसे सालभर के भीतर संतान की प्राप्ति होगी। इसका उल्लेख ब्रह्मा पुराण व गर्ग संहिता के गिर्राज खंड में है।

अनूठी भक्ति का अद्भुत विश्वास

दुनिया भर की चिकित्सा से निराश दंपति जब जल स्वरूपा राधारानी के दरबार में अपना आंचल फैलाते हैं तो दरबार सजाए बैठी राधारानी अपना आशीष भरा हाथ उनके सर पर फेरती हैं। यह विश्वास उन सूनी आंखों में चमक बिखेर देता है, जब बगल में बैठे दंपति अपनी संतान के साथ कृपा का आभार प्रकट करने को गोते लगाते हैं। यह विश्वास ही है, जो हर साल दंपति की संख्या में इजाफा कर देता है। यह स्नान राधाकुंड में गुरुवार को रात 12 बजे होगा। तमाम भक्त शाम 10 बजे से ही घाटों पर बैठ जाते हैं।

फल छोड़ने का है विधान

संतान सुख की चाहत में राधाकुंड में आधी रात को गोते लगाने वाले श्रद्धालु राधारानी को श्रंगार का सामान समर्पित करते हैं। इसके साथ ही एक फल भी राधाकुंड में समर्पित किया जाता है। जो फल समर्पित किया जाता है कि उसे वे दंपति संतान होने तक नहीं खाते। हालांकि इसमें पैंठा फल छोड़ना परंपरा में शामिल है।

कुल दीपक को भी लगाते हैं गोते

तमाम ऐसे दंपति भी जल स्वरूपा राधारानी के दरबार में पहुंचते हैं, जिन्हें बेटी तो है लेकिन बेटा होने की भी चाहत है। बेटे की चाहत में भी तमाम लोग स्नान करने पहुंचते हैं।

अंदर प्रवेश नहीं कर सकेंगे वाहन

पूर्व के मेला अनुभवों के आधार पर मेले के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में हो सकती है इसलिये कस्बे के अंदर वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। सीओ गौरव त्रिपाठी के अनुसार बस आदि बडे़ वाहनों को राधाकुंड से लगभग दो किलोमीटर पहले ही रोक दिया जायेगा। छोटे वाहनों के लिये कस्बे के बाहर पार्किंग स्थल बने हुये हैं। गोवर्धन मार्ग से आने वाले बडे़ वाहन कुसुम सरोवर पर तथा छोटे वाहन कैला देवी मंदिर के पास। छटीकरा से आने वाले वाहनों को चरकुला स्कूल के पास, कोन्हई की तरफ और गोवर्धन उद्धव कुंड की तरफ से आने वाले वाहनों को रामलीला मैदान पर रोक दिया जायेगा।

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