Life Style: अजब है मुश्किल, घर में बैठे-बैठे बच्चों का साइज 36 से हो गया 40, Parents हैं परेशान, क्‍या करें अब

कक्षाएं खेल दोस्तों से मुलाकात सब कुछ आनलाइन ही हो रहा है। इस वजह से बच्चों में मोटापे की समस्या लगातार बढ़ रही है। डेढ़ साल से घर में रहने से बच्चे हो रहे मोटे मोटापे के साथ घेर रही अन्य समस्याएं भी।

Prateek GuptaMon, 14 Jun 2021 09:39 AM (IST)
कोरोना वायरस संक्रमण काल के चलते घरों में बंद रहे बच्‍चों में मोटापे की समस्‍या देखने को मिल रही है।

आगरा, प्रभजोत कौर। कोरोना वायरस संक्रमण के कारण पिछले साल मार्च से बच्चे घर पर हैं। उनकी शारीरिक गतिविधियां कम होती जा रही हैं। कक्षाएं, खेल, दोस्तों से मुलाकात सब कुछ आनलाइन ही हो रहा है। इस वजह से बच्चों में मोटापे की समस्या लगातार बढ़ रही है। छह से 14 साल के बच्चों में यह शिकायत सबसे ज्यादा आ रही है। चिकित्सकों और डाइटीशियनों के पास लगातार अभिभावकों के फोन आ रहे हैं और वे बच्चों का वजन कम करने के तरीके पूछ रहे हैं।

नहीं हो पा रहा खेलना

कोरोना से पहले बच्चे स्कूल में, घर में, शाम को पार्क में खेलते थे। अपने दोस्तों के साथ शाम को साइकिल चलाते थे। जो अब पिछले डेढ़ साल से बिल्कुल बंद हो गया है। जैसे-तैसे हालात सामान्य हुए थे, पर स्थिति अब फिर वैसी ही हो गई है। घर के बाहर खेलने नहीं जाना तो कई-कई घंटे बैठकर मोबाइल गेम, वीडियो गेम, टीवी देखना आदि कर रहे हैं। इससे उनका वजन बढ़ रहा है। इससे बच्चों में कम उम्र में ही जोड़ों का दर्द, कमर दर्द, कब्ज आदि की समस्याएं बढ़ रहीं हैं। इस बारे में डा. अरूण जैन का कहना है कि 10 साल तक के बच्चे ग्रोइंग एज यानी बढ़ती उम्र में होते हैं, इसके बाद अगर मोटापा बढ़ना शुरू हुआ तो दिक्कतें ज्यादा होती हैं। हर रोज आठ से 10 अभिभावकों के फोन आ रहे हैं, जो बच्चों के मोटापे से हो रही परेशानियों के बारे में बता रहे हैं।

बनवा रहे हैं डाइट चार्ट

कोरोना काल में बच्चों को मांओं ने उनकी पसंद का हर पकवान बना कर दिया, चाहे वो पिज्जा हो या बर्गर। इससे उनकी खान-पान की आदतें बिगड़ गईं। डाइटीशियन शिल्पा अग्रवाल बताती हैं कि अभिभावक अपने बच्चों के लिए डाइट चार्ट बनवा रहे हैं। बच्चों का बीएमआइ यानी बाडी मास इंडेक्स 25 से कम होना चाहिए। बीएमआइ मापने के के लिए लंबाई को वजन से भाग दिया जाता है। हम बच्चों के लिए हरी सब्जियां, फल आदि खाने का सलाह ज्यादा देते हैं, जिससे उनके शरीर में जरूरी पोषक तत्व पहुंचे लेकिन मोटापा न बढ़े। पिज्जा के लिए उसका बेस रोटी का ले लें, हरी सब्जियों का इस्तेमाल ज्यादा करें। बच्चों को खिचड़ी, दलिया आदि देने से भी मोटापा कंट्रोल किया जा सकता है।

कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

- तीन साल के बच्चे को लगभग 1000 से लेकर 1400 कैलोरी की जरूरत होती है। 9-13 साल के किशोरों को लगभग 1400 से 2200 कैलोरी की जरूरत पड़ती है।

- खाने में विटामिन, फाइबर और जरूरी मिनरल्स जरूर होने चाहिए। मेवे भरपूर दें, इसमें कैल्शियम और मैग्नीशियम होता है।

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