Yamuna Pollution: आगरा में सिसकती यमुना की पीर बढ़ा रहे हैं नाले, तमाम आदेशों के बाद भी नहीं रुकी गंदगी

मथुरा से आगरा तक यमुना में सीधे गिर रहे हैं नाले। सीवेज ट्रीटमेंट नहीं कर रहे काम जांच में हो चुके हैं फेल। बारिश के सीजन को छोड़ दें तो हथिनीकुंड के बाद यमुना में पानी के नाम पर केवल सीवर और प्रदूषित पानी ही रहता है।

Prateek GuptaWed, 28 Jul 2021 09:48 AM (IST)
ये है यमुना का हाल। नालों के साथ गंदगी सीधे नदी में मिल रही है।

आगरा, जागरण संवाददाता। ब्रज में भगवान श्रीकृष्ण की पटरानी यमुना प्रदूषण से सिसक रही है। द्वापर युग के अंत में भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पूजा कर प्रकृति संरक्षण और कालिय नाग का मर्दन कर यमुना को प्रदूषण से मुक्त रखने का संदेश दिया था। जो यमुना कभी शहर की प्यास बुझाती थी, आज उसका पानी नहाने लायक भी नहीं बचा है। यमुना में सीधे गिर रहे नाले और बोझ बन चुके सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) उसकी पीर को निरंतर बढ़ा रहे हैं।

मानसून के मेहरबान होने से इन दिनों यमुना में पानी नजर आ रहा है, मगर इसी पानी के साथ पिछले दिनों मथुरा से बहकर आईं मृत मछलियों ने शहरवासियों की धड़कनें बढ़ा दी थीं। उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने अपनी रिपोर्ट में गोकुल बैराज से छोड़े गए प्रदूषित पानी की वजह से यमुना में डिजाल्व आक्सीजन कम होने से मछलियों के मरने की बात कही है। बारिश के सीजन को छोड़ दें तो हथिनीकुंड के बाद यमुना में पानी के नाम पर केवल सीवर और प्रदूषित पानी ही रहता है। ऊपर से आ रहे प्रदूषित पानी को मथुरा और यमुना में गिरते नाले जहरीला बना रहे हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा मार्च, 2021 में आगरा में संचालित एसटीपी के आउटलेट पर लिए गए सैंपल मानकों पर फेल साबित हो गए थे। एसटीपी का संचालन देख रही वबाग के काम पर भी इससे सवाल उठ रहे हैं।

आगरा में यमुना में गिरते हैं 92 नाले

आगरा में यमुना में 92 नाले गिरते हैं। इनमें से 61 नाले सीधे यमुना में गिर रहे हैं और 28 नाले टैप हैं। आगरा में बिचपुरी के सदरवन-1 व सदरवन-2, बूढ़ी का नगला, जगनपुर, पीलाखार, धांधूपुरा 78 एमएलडी व धांधूपुरा 24 एमएलडी, देवरी रोड एसटीपी वर्तमान में चालू हैं।

मथुरा में यमुना में गिर रहे हैं 28 नाले

मथुरा में यमुना में 28 नाले सीधे गिर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा यमुना की दशा पर नाराजगी जताए जाने के बाद भी यह नाले टैप नहीं हुऐ हैं। मथुरा में दो एसटीपी निर्माणाधीन हैं, अक्टूबर में इनका काम पूरा होने की उम्मीद है।

यमुना में सीधे गिर रहे नाले उसे प्रदूषित कर रहे हैं। एसटीपी मानकों पर खरे नहीं उतर रहे। सरकार का ध्यान यमुना को प्रदूषण मुक्त करने पर नहीं है। मछलियों की मौत के लिए जिम्मेदार दोषियों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

-डा. शरद गुप्ता, पर्यावरणविद्

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