RTI: आगरा के अधिवक्ता की याचिका पर केंद्र समेत राज्य सरकारों को नोटिस, सुप्रीम कोर्ट ने उठाया कदम

सूचना अधिकार अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन को दायर की थी याचिका। 28 राज्य सूचना आयोगों व राज्य सरकारों को सुप्रीम कोर्ट ने दिया नोटिस। सूचना आयोग को वर्चुअल सुनवाई की सुविधा देनी चाहिए जैसा कि केंद्रीय सूचना आयोग व छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग में सुविधा है।

Prateek GuptaSat, 19 Jun 2021 12:51 PM (IST)
सुप्रीम कोर्ट ने आगरा के अधिवक्‍ता की याचिका पर केंद्र व राज्‍य सरकारों को नोटिस भेजा है।

आगरा, जागरण संवाददाता। आगरा के अधिवक्ता केसी जैन की जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सूचना अधिकार अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन को केंद्र सरकार समेत देश के 28 राज्य सूचना आयोगों व राज्य सरकारों को नोटिस जारी किए गए हैं। तीन सदस्यीय बेंच ने यह आदेश 20 अप्रैल को किया था।

केसी जैन ने बताया कि राज्य सूचना आयोगों द्वारा अपील और शिकायतों की सुनवाई व्यक्तिगत रूप से की जाती है। इसमें अपीलकर्ता व शिकायतकर्ता काे लंबी यात्रा करके सूचना आयोग के कार्यालय में सुनवाई को स्वयं जाना पड़ता है। इसमें उन्हें कई मुश्किलों का सामना करने के साथ खर्चा भी करना पड़ता है। 90 फीसद आवेदक सूचना आयोग तक पहुंच नहीं पाते हैं। उन्होंने याचिका में यह मुद्दा उठाया था कि अधिनयम में सूचना पाने को आवेदकों को मात्र 10 रुपये का शुल्क देना होता है, लेकिन यदि सूचना नहीं मिलती है तो राज्य सूचना आयोग में सुनवाई को बड़ी रकम यात्रा व अन्य खर्चों में करनी पड़ती है। सूचना आयोग को वर्चुअल सुनवाई की सुविधा देनी चाहिए, जैसा कि केंद्रीय सूचना आयोग व छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग में सुविधा है।

याचिका में यह भी की है मांग

-राज्य सूचना आयोगों के डिजिटल पोर्टल में सभी सुविधाएं उपलब्ध हाें।

-पोर्टल के माध्यम से आनलाइन आरटीआइ अपील व शिकायतें दर्ज करने की सुविधा हो।

-पोर्टल में दायर अपील व शिकायत का स्टेटस दिखे।

-सूचना आयोग द्वारा पारित आदेश, वाद सूचियां व वार्षिक रिपोर्ट पोर्टल पर दिखें।

-सूचना आयोग द्वारा अपील व शिकायतें चार माह में निर्णीत हों।

-राज्य सूचना आयोग के मुख्य राज्य सूचना आयुक्त यह मानक निर्धारित करें कि प्रत्येक सूचना आयुक्त प्रति कार्यशील दिवस में कितने मामलों का निर्णय करेगा।

-राज्य सूचना आयोगों द्वारा सूचना अधिकार अधिनियम की धारा 25 (1) के अंतर्गत वार्षिक रिपोर्ट नियमित रूप से तैयार की जाए।

-राज्य सूचना आयोगों द्वारा सूचना अधिकार अधिनियम के कार्यान्वयन की स्थिति की विवेचना की जाए, जैसा कि अधिनयम की धारा 25 (5) के अंतर्गत किया गया है।

-सूचना नहीं देने वाले जनसूचना अधिकारियों के खिलाफ अधिनियम की धारा 20 (1) के अंतर्गत दंड लगाकर वसूली की जाए। शिकायतकर्ताओं को अधिनियम की धारा 19 (8) (ख) के तहत क्षतिपूर्ति दिलाई जाए।

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