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World Migratory Birds Day: आगरा में बढ़ रही प्रवासी पक्षियों की प्रजातियां और ठिकाने, जानिए किस देश के मेहमान आते हैं सबसे ज्यादा

आगरा की कीठम झील में कलरव करते प्रवासी पक्षी। फाइल फोटो

World Migratory Birds Day विश्व भर में संकटग्रस्त श्रेणी के प्रवासी पक्षियों के संरक्षण हेतु जागरूकता अभियानों द्वारा विलुप्त होने से रोकने के लिए विश्व प्रवासी पक्षी दिवस मनाया जाता है। यह दिवस साल में दो बार मनाया जाता है।

Tanu GuptaSat, 08 May 2021 12:58 PM (IST)

आगरा, जागरण संवाददाता। कोरोना महामारी ने भले ही पूरे संसार में सिवाये नुकासान के कुछ और न किया हो लेकिन इसके कारण लगने वाले लाकडाउन ने पर्यावरण को लाभ ही पहुंचाया है। प्रकृति फिर से मुस्कुराने लगी है और भगवान के डाकिये यानि पक्षी दूर देशों से अपने पसंदीदा ठिकानों पर पहुंच रहे हैं। इन्हीं सबसे पसंदीदा ठिकानों में आगरा भी शामिल हो गया है। 

सर्दियों के मौसम में आगरा में प्रवासी पक्षियों की कई प्रजातियों का आगमन होता है। जैसे जैसे अप्रैल से मई के बीच आगरा का मौसम गर्म होने लगता है वैसे ही प्रवासी पक्षी वापस लौटने लगते हैं। इसके अतिरिक्त मानसून काल मे स्थानीय प्रवासी पक्षियों को भी आगरा में रिकार्ड किया जा रहा है।

साल में दो बार मनाया जाता है विश्व प्रवासी पक्षी दिवस

विश्व भर में संकटग्रस्त श्रेणी के प्रवासी पक्षियों के संरक्षण हेतु जागरूकता अभियानों द्वारा विलुप्त होने से रोकने के लिए विश्व प्रवासी पक्षी दिवस मनाया जाता है। यह दिवस साल में दो बार मनाया जाता है। पहला मई के दूसरे शनिवार और दूसरा अक्तूबर के दूसरे शनिवार को। बीआरडीएस के अध्यक्ष पक्षी विशेषज्ञ डॉ केपी सिंह के अनुसार अधिकतर पक्षी विश्व भर में उत्तर से दक्षिण और कुछ पश्चिम से पूर्व दिशा की ओर प्रवास करने चले आते हैं। इन्हीं पक्षियों को प्रवासी पक्षी कहते हैं। पक्षियों का यह माइग्रेशन मुख्यतः भोजन की तलाश में अथवा प्रजनन स्थलों के चयन के लिए होता है और यह प्रतिवर्ष होने वाली पक्षियों की स्वाभाविक प्रक्रिया है।

यूरोप व मध्य एशियाई देशों से आते हैं प्रवासी पक्षी

डाॅ केपी सिंह के अनुसार प्रवासी पक्षियों के ठहरने के लिए वेटलैंड की दशा, पानी की गुणवत्ता, भोजन की उपलब्धता एवं सुरक्षा प्रमुख कारक होते हैं। आगरा में मुख्यत: यूरोप व मध्य एशियाई देश अलास्का, फ्रांस, जर्मन, नीदरलैंड, साइबेरिया, रूस, मंगोलिया, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, तिब्बत, बांग्लादेश आदि देशों के प्रवासी पक्षियों का आगमन होता है।

इन प्रवासी पक्षियों को रास आता है आगरा

आगरा मे प्रवासी पक्षियों में मुख्य रूप से डोमीसाइल क्रेन, पेन्टेड स्टार्क, बार-हेडेड गूज, ग्रेटर फ्लेमिंगो, रोजी पेलिकन , डालमेशन पेलिकन, नार्दन शोवलर, स्कीमर, नाब-बिल्ड डक, क्रिस्टिड पोचार्ड, काॅमन पोचार्ड, गार्गेनी, गेडवाल, काॅटन पिग्मी गूज, यूरेशियन कर्ल्यू, ब्लैक टेल्ड गोडविट, टफ्टिड डक, लेशर विशलिंग डक, ब्लूथ्रोट, पाइड एवोसेट , नार्दन पिनटेल , काॅमन टील, ग्रे लैग गूज , स्पून विल्ड डक, रेडी शैल्ड डक, लिटिल स्टिंट, टैमिनिक स्टिंट , स्पाट विल्ड डक, काॅमन कूट , ब्लैक विंग स्टिल्ट , बुड सेन्डपाइपर , ब्लिथ रीड बैबलर, चेस्टनट मुनिया, ट्राइकलर मुनिया , व्हाइट ब्राउडेड वेगटेल, व्हाइट वेगटेल, सिट्रिन वेगटेल, यलो वेगटेल, रोज फिंच, पैराडाइज फ्लाईकेचर, ग्रे हेडेड केनरी फ्लाईकेचर , रोजी स्टर्लिंग आदि प्रमुख हैं।

प्रवासी पक्षियों ने आगरा में यहां तलाशे नये ठिकाने

पक्षियों पर अध्ययन करने वाली संस्था बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डवलपमेंट सोसायटी के सदस्यों द्वारा आगरा में प्रवासी पक्षियों के नये ठिकाने दर्ज किये गये हैं। आगरा मे सूर सरोवर पक्षी विहार कीठम, चंबल क्षेत्र बाह - पिनाहट, ताज नेचर वाक एवं यमुना नदी के किनारे, सेवला वेटलैंड ग्वालियर रोड के क्षेत्र परम्परागत रूप से प्रवासी पक्षियों के ठिकाने हैं। इनके अतिरिक्त प्रवासी पक्षियों के नये ठिकाने दर्ज किये गये हैं जिनमें धांधूपुरा, महुआ खेडा, महताब बाग, पोइया घाट दयालबाग, ककरैठा, खारी नदी किरावली, फतेहपुर सीकरी, अछनेरा, खेरा सांधन प्रमुख हैं।

आगरा में इस बार अप्रेल के अंत तक रूके प्रवासी पक्षी

अधिकतर प्रवासी पक्षी मार्च से वापसी माइग्रेशन शुरू कर देते हैं। लेकिन इस साल अप्रेल के अंत तक सेवला वेटलैंड पर गार्गेनी और स्पाॅट-विल्ड डक को रिकार्ड किया गया और आठ नाब-बिल्ड डक को मई की 6 तारीख तक रिकार्ड किया गया है। इस वेटलैंड पर लेशर विशलिंग डक ने प्रजनन प्रारंभ कर दिया है। ग्वालियर रोड स्थित सेवला वेटलैंड पर इस साल बड़ी संख्या में नोर्दन शोवलर रिकार्ड किये गए हैं। अपने वापसी माइग्रेशन के दौरान छोटे छोटे वेटलैंड्स पर भोजन की उपलब्धता के कारण प्रवासी पक्षी कुछ दिन ठहरकर जाते हैं । 

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