Check Dishonor: आगरा में चेक डिसओनर होने पर पूर्व विधायक जगन प्रसाद गर्ग के पुत्र अदालत में तलब

महिला ने दस लाख रुपये का चेक डिसओनर होने पर प्रस्तुत किया था वाद। दिवंगत पूर्व विधायक जगन गर्ग के पुत्रों वैभव व सौरभ तीन दिसंबर को अदालत में तलब। वहीं मेट्रो रेल में नौकरी के नाम पर ठगी के आरोपित को जमानत नहीं मिली है।

Prateek GuptaFri, 17 Sep 2021 12:25 PM (IST)
अदालत ने पूर्व विधायक जगन प्रसाद गर्ग के बेटों को तलब किया है।

आगरा, जागरण संवाददाता। दस लाख रुपये का चेक डिसओनर होने के मामले में अदालत ने दिवंगत पूर्व विधायक जगन गर्ग के पुत्रों वैभव गर्ग और सौरभ गर्ग को तलब किया है। अतिरिक्त न्यायालय संख्या के पीठासीन अधिकारी ने दोनाें को तीन दिसंबर को प्रस्तुत होने के आदेश दिए हैं।

खंदारी के चर्च रोड स्थित शांति निकेतन अपार्टमेंट की रहने वाली पूनम पत्नी नवीन कुलश्रेष्ठ ने न्यायालय में मुकदमा प्रस्तुत किया है। पूनम कुलश्रेष्ठ के अनुसार उनके पति की दिवंगत पूर्व विधायक जगन गर्ग से मित्रता थी। एक दूसरे के यहां आना-जाना था। पूनम कुलश्रेष्ठ का आरोप है कि दिसंबर 2017 मेंं गर्ग और उनके पुत्रों वैभव सौरभ गर्ग ने अपनी फर्म नीरज डेयरी के लिए जरूरत बताते हुए दस लाख रुपये उधार लिए थे। जगन गर्ग ने इसके बदले में फर्म की मुहर एवं अपने हस्ताक्षर किया हुआ दस लाख रुपये का चेक वादिनी मुकदमा के नाम से दिया था।

यह चेक 25 अगस्त 2019 की तारीख का था। विधायक जगन प्रसाद गर्ग का 10 अप्रैल 2019 को निधन हो गया। पूनम कुलश्रेष्ठ का आरोप है कि नियत तारीख पर चेक बैंक में लगाने पर वह डिसओनर हो गया। जिस पर वादिनी ने अपने अधिवक्ता रोहित रठौर के माघ्यम से विधिक नोटिस के बाद अदालत में मुकदमा प्रस्तुत किया। अतिरिक्त न्यायालय संख्या दो के पीठासीन अधिकारी ने नीरज डेयरी के साझीदार वैभव गर्ग और सौरभ गर्ग को तीन दिसंबर को तलब किया है।

मेट्रो रेल में नौकरी के नाम पर ठगी के आरोपित को नहीं मिली जमानत

मेट्रो रेल में नौकरी के के नाम पर ठगी के आरोपित को अदालत से जमानत नहीं मिल सकी। अपर जिला जज महेंद्र कुमार ने आरोपित प्रवीन चौधरी के जमानत प्रार्थना पत्र को खारिज करने के आदेश दिए।

सदर इलाके के रहने वाले सुधांशु साहनी ने 10 अगस्त को सदर थाने में नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया था। सुधांशु चौधरी के अनुसार उन्होंने दिल्ली और यूपी मेट्रो में नौकरी के लिए उन्होंने एक वेबसाइट के माध्यम से आवेदन किया था।

आरोपित प्रवीन चौधरी ने शैक्षणिक प्रमाण पत्र देखने के बाद एमपी सिंह व रोहित सिंघल नाम के व्यक्तियों से बात करा नौकरी के नाम पर 35 हजार रुपये अपने खाते में जमा करा लिए। जिसके बाद आरोपितों ने न तो नौकरी दिलवाई और ना ही रकम वापस की। जिस पर पीड़ित ने मेट्रो रेल में जानकारी की तो पता चला कि ईमेल आईडी फर्जी है। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

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