Youth Connect: सही समय पर लक्ष्य तय कर करें मेहनत, जरूर मिलेगी सफलता

शिवालिक कैंब्रिज कालेज में हुआ दैनिक जागरण का यूथ कनेक्ट कार्यक्रम। एसपी पूर्वी ए. वेंकट अशोक ने विद्यार्थियों से किया संवाद। स्कूल की पढ़ाई को गंभीरता से लें तकनीक फ्रेंडली हों और भविष्य में तकनीक आधारित क्षमताएं विकसित करें।

Nirlosh KumarWed, 22 Sep 2021 02:50 PM (IST)
जागरण यूथ कनेक्ट में एसपी पूर्वी के. वेंकट अशोक ने विद्यार्थियों को दी उपयोगी सलाह।

आगरा, जागरण संवाददाता। मैं कभी स्कूल-कालेज टापर नहीं रहा, फ्रंट नहीं, बैक बैंचर और सामान्य विद्यार्थी था। लेकिन सही समय पर सचेत होकर लक्ष्य निर्धारित किया और करियर को सही दिशा में ले जाने का प्रयास किया। नतीजा यह है कि कल तक मैं आप सबके बीच बैठता था और आज मंच पर खड़ा होकर आपका मार्गदर्शन कर रहा हूं।

यह बातें एसपी पूर्वी के. वेंकट अशोक ने विद्यार्थियों से कहीं। वह दैनिक जागरण द्वारा आवास विकास कालोनी, सेक्टर सात स्थित शिवालिक कैंब्रिज कालेज में आयोजित यूथ कनेक्ट कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने व परिवार ने कभी नहीं सोचा था कि वह आइपीएस अधिकारी बनेंगे। ग्रेजुएशन से पहले वह अपने शहर तिरुपति से बाहर नहीं गए थे। पुणे से एमबीए करने के बाद मल्टीनेशनल कंपनी (एमएनसी) में दो साल स्टेट इंचार्ज के तौर पर काम किया। कई गांव घूमे, तो असली ग्रामीण भारत देखा। गरीबी और लोगों की समस्याएं देख लगा कि यह नौकरी मेरी मंजिल नहीं, इससे लोगों की मदद नहीं कर सकता। इसलिए नौकरी छोड़कर तैयारी की। दो अटेंप्ट के बाद चयनित होकर आपके सामने खड़ा हूं। कार्यक्रम में स्कूल निदेशक एसएस यादव, प्रधानाचार्य आशा कपूर मौजूद रहीं।

80 फीसद युवा डिस्गाइड इंप्लाइड

उन्होंने बताया कि जहां वह रहे, बड़े हुए और जहां नौकरी की, दोनों जगह भले एक थीं, लेकिन अंतर जमीन-आसमान का था। जिले के कई युवाओं को पढ़ने का मौका नहीं मिला, कई के पास सही रोजगार नहीं था। जो काम कर रहे थे, वह दूसरों के लिए कुछ करने की स्थिति में नहीं थे। यही डिस्गाइड इंप्लायमेंट है, जिससे महज पांच, 10 और 15 हजार रुपये में लोग अपनी जिंदगी काट देते हैं, जबकि उनमें क्षमता असीमित है। इस सोच ने मेरे जीवन को निर्णायक मोड़ दिया और मैंने लक्ष्य निर्धारित कर यूपीएससी चुना क्योंकि इसमें सही मायने में देश व समाज सेवा का मौका मिलता है।

जो पसंद हो, वहीं करें

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जरूरी नहीं, हर व्यक्ति यूपीएससी पास करे। हर व्यक्ति की सोच, क्षमता और पसंद भिन्न होती है। इसलिए जो भी आपको पसंद है, उसे अपना करियर बनाएं। मुझे पढ़ना पसंद था, उस पार्ट टाइम काम को मैंने फुल टाइम काम बनाया, तो ऐसी तरक्की मिली कि मेरी पहचान बन गई। आप 11वीं या 12वीं में हैं, यह लक्ष्य निर्धारित करने का सही समय है, स्कूल की पढ़ाई को गंभीरता से लें, तकनीक फ्रेंडली हों और भविष्य में तकनीक आधारित क्षमताएं विकसित करें। मेहनत करेंगे, तो आगामी चार-पांच साल की मेहनत अच्छा भविष्य बनाएगी। साथ में खेलों को जीवन-शैली में पर्याप्त स्थान दें, वहीं से सीखने को मिलता है।

सवाल-जवाब

सवाल: कोरोना काल में क्राइम और नारी उत्पीड़न के मामले बढ़े हैं। इसके लिए जातिवादी व्यवस्था कितनी दोषी है? दिशा कपूर, छात्रा।

जवाब: सामाजिक व्यवस्था में अच्छा-बुराई सभी जगह हैं। लेकिन जहां महिलाएं शिक्षित हैं और उन्हें अपने अधिकारों की जानकारी है, वहां उनके उत्पीड़न की दर कम है। जबकि अशिक्षा के कारण जहां महिलाएं मुखर नहीं हो पातीं, वहां उत्पीड़न होता है। इसलिए महिलाओं को शिक्षित बनाने पर जोर दें, बदलाव दंड से नहीं सोच से आता है।

सवाल: आपने तैयारी के दौरान टाइम मैनेजमेंट कैसे किया? विशाल दिवाकर, छात्र।

जवाब: तैयारी के लिए दिल्ली गया, तो पढ़ने का उत्साह था। इसलिए टाइम मैनेजमेंट की जरूरत नहीं पड़ी। डेली रुटीन में पढ़ना, खाना, सोना, खेलना और मूवी देखना, सब कुछ शामिल था। शुरुआत में तीन घंटे नियमित अखबार पढ़ता था, आदत परिवार से पड़ी। फिर तीन-चार घंटे पढ़ाई, लंच के बाद रुटीन सिलेबस। शाम को थोड़ी देर खेल व योग, फिर पढ़ाई। बीच में थोड़ा बहुत मनोरंजन व मूवी देखता था।

सवाल: स्कूलिंग कैसे और कहां से की? मुस्कान मित्तल

जवाब: मेरी पढ़ाई तिरुपति से ही हुई। ग्रेजुएशन तक कृषि में पढ़ा। पुणे से इंटरनेशनल बिजनेस में एमबीए किया। उसके दो साल तक प्राइवेट जाब की। दिल्ली से यूपीएससी की तैयारी की।

सवाल: यूपीएससी करने के बारे में कब तय किया? ईशा सिंह राजपूत, छात्रा।

जवाब: एमबीए करने के बाद दो साल शहर और ग्रामीण इलाके में नौकरी करने के बाद असली समस्याएं देखीं, तो उन्हें दूर न करने की टीस दिल में थी। इसलिए उस नौकरी को छोड़कर आइपीएस के रूप में सेवा करने की ठानी।

सवाल: आप फ्रंट बैंचर थे या बैक बैंचर? भूमि सारस्वत, छात्रा।

जवाब: मैं स्कूल में सामान्य बैक बैंचर विद्यार्थी था। कभी स्कूल या क्लास टापर नहीं रहा, लेकिन खेल में अच्छा था। जिला व यूनिवर्सिटी स्तर तक खेलों में प्रतिभाग किया। खेलों से ही टीम वर्क और असफलता को सकारात्मकता से लेना सीखा।

सवाल: कोविड काल का अनुभव कैसा रहा? वैष्णवी गुप्ता, छात्रा।

जवाब: तब मैं एएसपी प्रयागराज था। बीमारी व बचाव की ज्यादा जानकारी नहीं थी, पीपीई किट पहनना नहीं आता था। सैनिटाइजर, मास्क आदि का प्रयोग शुरू किया। एक साथी को खोने के बाद भयाभय स्थिति समझ आयी। लेकिन जिंदगी रुकने का नहीं, सीखने और आगे बढ़ने का नाम है। सिलसिला जारी है।

सवाल: अपनी ट्रेनिंग का अनुभव बताएं? अविका शर्मा, छात्रा।

जवाब: मेरी आइपीएस की ट्रेनिंग भोपाल सेंटर से पूरी हुई। वहां सिविलियन से आइपीएस बनना सीखा। सुबह साढ़े चार बजे उठना और फिर शाम साढ़े छह बजे तक सख्त रुटीन था। मैं जब पहली बार एकेडमी गया, तो मेरे बाल और शेविंग लंबी थी। इसलिए ट्रेनिंग आफिसर मुझे कमरे की जगह पहले सैलून ले गए और मेरे बाल व शेविंग कराई।

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