RTI: पुलिस के डंडे पर भारी सूचना के अधिकार की चाबी, आगरा में लोगों ने बनाया इसे अपना हथियार

अपनी शिकायत पर हुई कार्रवाई के लिए अब नहीं काटने पड़ते थानों के चक्कर। दस रुपये खर्च कर सूचना के अधिकार के तहत हासिल कर लेते हैं जानकारी। पुलिस विभाग को उनका जवाब देना होता है। शिकायतों पर कार्रवाई के लिए अब थानों के चक्कर नहीं काटते।

Nirlosh KumarTue, 12 Oct 2021 02:51 PM (IST)
सूचना का अधिकार में लोग पुलिस से आसानी से जानकारी हासिल कर पा रहे हैं।

आगरा, अली अब्बास। नाई की मंडी के रहने वाले संतोष कुमार ने सगे संबंधी से परेशान होकर उसके खिलाफ इस साल 10 जून को एसएसपी कार्यालय में शिकायत की। उनके प्रार्थना पत्र पर पुलिस ने क्या कार्यवाही की। इसे जानने के लिए उन्होंने कई बार थाने और अधिकारियों के चक्कर काटे। मगर, उन्हें कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। संतोष इसे लेकर परेशान थे। उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि दर्जनों प्रार्थना-पत्रों के बीच उनकी शिकायत कहां गुम हो गई, इसकी जानकारी कैसे मिले। एक दिन बातों ही बातों में उन्होंने अपनी इस समस्या का जिक्र पड़ोस की बस्ती में रहने वाले परिचित देवी सिंह से किया। जिसके बाद उन्हें चुटकियों में इसका समाधान भी मिल गया। अगले ही दिन संतोष कुमार एसएसपी कार्यालय पहुंचे। दस रुपये शुल्क जमा किया और सूचना के अधिकार के तहत अपने प्रार्थना पत्र पर पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की जानकारी मांग ली।

संतोष को रास्ता बताने वाले देवी सिंह को भी दाे साल पहले इसी तरह की समस्या का सामना करना पड़ा था। तब उन्होंने दस रुपये खर्च करके सूचना के अधिकार के तहत सारी जानकारी मांग ली थी। पुलिस ने एक महीने के अंदर उन्हें खुद फोन करके बुलाया। उनकी शिकायत पर हुई कार्रवाई के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई, जिसके बाद से देवी सिंह को सूचना के अधिकार की ताकत का पता चला। पुलिस के डंडे पर सूचना के अधिकार की चाबी भारी पड़ रही है। संतोष और देवी सिंह जैसे लोग अपने द्वारा की गई शिकायतों पर कार्रवाई के लिए अब थानों के चक्कर नहीं काटते। संबंधित थाने या विभाग ने उनकी शिकायत पर क्या कार्रवाई की। इसे जानने के लिए वह दस रुपये का शुल्क जमा करके सूचना के अधिकार का प्रयोग करते हैं। पुलिस विभाग को उनका जवाब देना होता है।

12 अक्टूबर, 2005 को लागू हुआ था सूचना का अधिकार

सूचना का अधिकार 12 अक्टूबर, 2005 काे लागू हुआ था। पुलिस विभाग में 12 अक्टूबर, 2005 से 31 दिसंबर, 2005 के दौरान सिर्फ नौ लोगों ने सूचना के अधिकार का प्रयोग किया था।

वर्ष सूचना का अधिकार प्रयोग करने वालों की संख्या

2005       9

2006      82

2007    533

2008    569

2009    979

2010   1477

2011   1408

2012   1702

2014   2400

2015   1800

2017    2833

2018    2186

2019    2080

2020   1450

2021  1321

(नोट: इस साल एक जनवरी से 30 सितंबर, 2021 तक का आंकड़ा)

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