MGNREGA: ताजनगरी में मनरेगा से संवार दीं दो नदियां, जानिए कहां, क्या चल रहा काम

मनरेगा के तहत किवाड़ और उटंगन नदी का पुनरुद्धार किया जा रहा है।

MGNREGA आगरा मंडल की नदियों के दिन संवर रहे हैं। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत किवाड़ और उटंगन नदी का पुनरुद्धार किया जा रहा है। इन दोनों नदियों में वर्ष 1996 से पानी नहीं आया।

Publish Date:Mon, 18 Jan 2021 08:02 AM (IST) Author: Tanu Gupta

आगरा, जागरण संवाददाता। विलुप्त होती किवाड़ और उटंगन नदियों को जीवनदान मिला है। अनदेखी की भेंट चढ़ चुकीं ये नदियां फिर से अविरल धारा के लिए तैयार हो रही हैं। इससे फसलों की सिंचाई के लिए पसीना बहाने वाले किसानों को राहत मिलेगी। आसपास का भूमिगत जलस्तर सुधरेगा, वह अलग।

आगरा मंडल की नदियों के दिन संवर रहे हैं। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत किवाड़ और उटंगन नदी का पुनरुद्धार किया जा रहा है। इन दोनों नदियों में वर्ष 1996 से पानी नहीं आया। अनदेखी के चलते दोनों नदियां गंदगी से पट गई हैं। अब किवाड़ नदी का 34.2 किमी के हिस्से को पुनर्जीवित किया जा रहा है। 22.4 किमी हिस्से का काम पूरा हो चुका है। लक्ष्य के अनुसार, पूरा काम होने के बाद खेरागढ़ और जगनेर ब्लाक की आठ ग्राम पंचायतों के लोग लाभान्वित होंगे। इसी प्रकार, उटंगन नदी के 41.70 किमी हिस्से को संवारने की कवायद की जा रही है। 32.64 किमी का काम पूरा हो गया है। इस नदी के पुनरुद्धार के बाद खेरागढ़, पिनाहट, फतेहाबाद और सैंया ब्लाक की 19 ग्राम पंचायतों लाभान्वित होंगी। जहां खोदाई की जरूरत है, वहां मजदूरों के माध्यम से खोदाई कराई जा रही है। इसके साथ ही सफाई के कार्य भी हो रहे हैं। नदियों के पुनर्जीवित होने से इन क्षेत्रों के किसानों को काफी लाभ होगा। उन्हें फसलों की सिंचाई के लिए पानी की समस्या से नहीं जूझना होगा। पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध होने से फसलों की उत्पादन क्षमता पर भी असर पड़ेगा। कृषि के लिए पानी की कमी नहीं रहेगी। 

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