Environment Protection: आगरा जिला जेल के गोवंश बने पेड़ों के प्रहरी, गोकाष्ठ को बनाया लकड़ी का विकल्प

जिला जेल में गोवंश के गोबर से बंदी बना रहे गोकाष्ठ।

Environment Protection जिला जेल में हैं 160 गाय और गोवंश। गोवंश के गोबर से बंदी बना रहे गोकाष्ठ। अंतिम संस्कार में लकड़ियों का बना विकल्प। आगराअलीगढ़ और फीरोजाबाद श्मशान घाट में जाता है बेचा। मई 2019 से दिसंबर 2020 के दौरान बेची 2.13 लाख रुपये का गोकाष्ठ।

Publish Date:Wed, 13 Jan 2021 09:41 AM (IST) Author: Tanu Gupta

आगरा, अली अब्बास। आगरा की गाय और गोवंश पेड़ों के अघोषित प्रहरी साबित हो रहे हैं। वह पेड़ों को कटने से बचाकर पर्यावरण संरक्षित कर रहे हैं। इसके साथ ही जेल प्रशासन और उसके बंदियों के लिए आय का माध्यम भी साबित हो रहे हैं। जिला जेल की गोशाला में वर्तमान में 160 गाय और उनके गोवंश हैं। बंदियों द्वारा गोवंश के गोबर से गोकाष्ठ बनाई जाती है। इसे अंतिम संस्कार के लिए आगरा,फीरोजाबाद और अलीगढ़ के श्मशान घाटों पर बेची जा रही हैं।

जिला जेल में करीब 21 साल पुरानी गोशाला है। इसमें गायों समेत 160 गोवंश हैं। जिला जेल में वर्ष 2019 में पर्यावरण को संरक्षित करने के साथ ही पेड़ाें को बचाने की अनूठी पहल की नींव पड़ी थी।जब 13 मई 2019 को तत्कालीन जिला जज अजय कुमार श्रीवास्तव ने जेल में गोबर से लकड़ी बनाने की ईकाई का उदघाट़्न किया। इस अनूठी पहल के गवाह तत्कालीन डीएम एनजी रवि कुमार, एसएसपी अमित पाठक और डीआइजी कारागार संजीव कुमार त्रिपाठी बने थे। जेल अधीक्षक शशि कांत मिश्रा ने बताया कि गोशाला में काफी मात्रा में गोबर होता है। इसके सदुपयोग काे ध्यान में रखते हुए इस गोबर से लकड़ी या गोकाष्ठ तैयार करने का फैसला किया गया।

जेल अधीक्षक ने बताया 13 मई 2019 को गोबर से गोकाष्ठ बनाने की ईकाई स्थापित की गई। इसकी क्षमता प्रतिदिन पांच कुंतल गोकाष्ठ तैयार करने की है। इस गोकाष्ठ को आगरा में बल्केश्वर श्मशान घाट के अलावा अलीगढ़ और फीरोजाबाद के श्मशान घाट में बेचा जाता है। इसकी बिक्री से होने वाली आय को गोवंश के चारे के लिए प्रयोग किया जाता है। गोकाष्ठ की कीमत पांच रुपये प्रति किलो रखी गई है। जेल अधीक्षक ने बताया कि 13 दिसंबर 2020 के दौरान दो लाख 13 हजार 525 रुपये के गोकाष्ठ की बिक्री हो चुकी है।

होली में भी गोकाष्ठ का प्रयोग

गोकाष्ठ का प्रयोग होली में भी लकड़ी की जगह किया जा रहा है। पिछले करीब डेढ़ साल में गोकाष्ठ होली में भी इसका प्रयोग किया गया था। गोकाष्ठ को बेचने के लिए सामाजिक संस्था सत्यमेव जयते को भी इसमें शामिल किया गया है। 

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