खंदौली में सब इंस्पेक्टर की शवयात्रा देख बहे आंसू, वाहन पर बरसाए फूल

पड़ाव चौराहे पर लोगों ने नम आंखों से दी दारोगा प्रशांत यादव को श्रद्धांजलि

JagranFri, 26 Mar 2021 06:00 AM (IST)
खंदौली में सब इंस्पेक्टर की शवयात्रा देख बहे आंसू, वाहन पर बरसाए फूल

जागरण टीम, आगरा। आंखों में आंसू और चेहरे पर गुस्सा। शहीद सब इंस्पेक्टर प्रशांत यादव का पार्थिव शरीर गुरुवार को उनके पैतृक गांव छतारी, बुलंदशहर ले जाया जा रहा था। इससे पूर्व ही बड़ी संख्या में लोग हाथों में फूल लिए खंदौली के पड़ाव चौराहे पर पहुंच गए। लोगों का कहना था कि पुलिस के साथ दुस्साहसिक वारदात करने वाले को सख्त सजा मिले।

सुबह 11 बजे पुलिस वाहन में सब इंस्पेक्टर का पार्थिव शरीर पड़ाव चौराहे पर पहुंचा, लोगों ने प्रशांत यादव अमर रहे.., इंकलाब जिंदाबाद.. और वंदे मातरम के नारे लगाने शुरू कर दिए। उन्होंने पुलिस वाहन पर पुष्प वर्षा की। यह दृश्य देख कई की रुलाई फूट पड़ी। कहने लगे, दारोगा प्रशांत यादव सरल व्यवहार के धनी थे। उनकी जान लेने वाले हत्यारोपित को जल्द गिरफ्तार कर सख्त सजा दिलाई जाए। इस मौके पर मुकेश गुप्ता, राजू ठेकेदार, डा. उमाशंकर पचौरी, धर्मेंद्र शर्मा, ब्रजेंद्र माहौर आदि मौजूद रहे। दुकानदारों ने नहीं खोले अपने प्रतिष्ठान

सब इंस्पेक्टर की शवयात्रा खंदौली से गुजर नहीं गई, तब तक खंदौली का पड़ाव चौराहा स्थित बाजार बंद रहा। एक भी दुकान नहीं खुली। दुकानदार अपने प्रतिष्ठानों के बाहर ही खड़े रहे। उनके हाथों में फूल थे। पुलिस वाहन देखते ही उन्होंने पुष्प वर्षा की। पुलिस वाहन के गुजरने के बाद ही दुकानें खोली गई। दूसरी बार भी मुश्किल से बची सिपाही की जान

खंदौली थाने में तैनात सिपाही चंद्रसेन उन खुशनसीब इंसानों में से हैं जो दुस्साहसिक हमले में अपनी जान बचा पाए। तीन साल से थाने में तैनात चंद्रसेन के हंसमुख स्वभाव के लोग कायल हैं। वे सेमरा हल्का के बीट सिपाही रहे हैं। वर्ष 2019 में भी उन्होंने बहादुरी का परिचय दिया था। तब बेकाबू भीड़ एक हत्यारोपित को मारने पर आमादा थी। वह जान बचाते हुए एक कमरे में घुस गया था। चंद्रसेन पहुंचे और लोगों को हाथ जोड़कर समझाया और कमरे का बाहर से ताला लगा दिया। बाद में पुलिस फोर्स पहुंची और आरोपित को सुरक्षा में अपने साथ ले गई। उग्र भीड़ उनकी जान भी ले सकती थी लेकिन चंद्रसेन ने इसकी परवाह नहीं की। उन्होंने बताया कि बुधवार शाम को दारोगा प्रशांत यादव संग वे नहर्रा गए थे। भागने के दौरान अचानक विश्वनाथ ने दारोगा पर गोली चला दी लेकिन चंद्रसेन ने पीछा नहीं छोड़ा। यह देख उन पर फायरिग करते हुए विश्वनाथ भाग निकला।

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