अब तक 50 लोगों ने किए प्लाज्मा डोनेट

अब तक 50 लोगों ने किए प्लाज्मा डोनेट
Publish Date:Sun, 20 Sep 2020 07:00 AM (IST) Author: Jagran

आगरा, जागरण संवाददाता। ताजनगरी में कोरोना संक्रमितों का ग्राफ जितनी तेजी से ऊपर जा रहा है, उतनी ही तेजी से ठीक होने वालों की संख्या भी बढ़ रही है। गंभीर मरीजों के लिए कोरोना से जंग जीत चुके लोगों का प्लाज्मा काफी लाभदायक है। शहर में अब तक सिर्फ 50 लोगों ने प्लाज्मा डोनेट किया है, जबकि ठीक होने वालों की संख्या 4000 से ज्यादा है।

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क्या है प्लाज्मा थेरेपी?

कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके एक व्यक्ति के खून से कोरोना पीड़ित चार लोगों का इलाज किया जा सकता है। यह उपचार प्रणाली इस धारणा पर काम करती है कि वे मरीज जो किसी संक्रमण से उबर जाते हैं उनके शरीर में संक्रमण को बेअसर करने वाले एंटीबॉडीज विकसित हो जाते हैं। ठीक हो चुके मरीज का प्लाजमा चढ़ाकर विकसित एंटीबॉडीज के जरिए नए मरीज के शरीर में मौजूद वायरस को खत्म किया जाता है। कोरोना से ठीक हो चुके व्यक्ति के शरीर से 14 दिन बाद प्लाज्मा लिया जाता है। रोगी का कोरोना टेस्ट दो बार किया जाता है। ठीक हो चुके मरीज का एलिजा टेस्ट भी किया जाता है, ताकि यह पता चल सके कि उसके शरीर में एंटीबॉडीज की मात्रा कितनी है। यह हैं मिथक-

-एक बार एंटी बॉडी प्लाज्मा के रूप में निकाल ली तो हम जल्दी-जल्दी बीमार होंगे।

-प्लाज्मा निकालने से कोरोना फिर से हो सकता है।

-शरीर में कमजोरी आ जाएगी, आम जिदगी नहीं जी पाएंगे। सच-

-खून में से सिर्फ प्लाज्मा ही लिया जाता है, बाकी के सारे तत्व खून में ही रहते हैं।

-सामान्य रूप में भी शरीर से एंटीबॉडी चार महीने बाद खत्म हो जाती हैं। इसे शरीर में सुरक्षित नहीं रखा जा सकता है। इम्यूनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता मेमोरी सेल मजबूत करते हैं। इसे लैब में एक साल के लिए प्रिजर्व रखा जा सकता है।

तीन डोनर बार-बार कर रहे प्लाज्मा डोनेट

आगरा में पहली बार डॉ. आरके सिंह ने प्लाज्मा डोनेट किया था। उसके बाद अब तक 50 लोग प्लाज्मा डोनेट कर चुके हैं। शुक्रवार को पांच लोगों ने प्लाज्मा डोनेट किया, स्त्री एवं प्रसूति विभाग के डॉ. लोकेश त्रिपाठी 50वें डोनर बने। शहर के ही तीन लोग ऐसे हैं, जो बार-बार प्लाज्मा डोनेट कर रहे हैं। एसएन मेडिकल कालेज ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. नीतू चौहान ने बताया कि जागरूकता के लिए कोविड अस्पतालों के बाहर पोस्टर लगाए जा रहे हैं। प्लाज्मा डोनेट करने वालों को मैडल और सर्टिफिकेट भी दिए जाते हैं। स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल द्वारा प्लाज्मा डोनेट कर चुके लोगों को एक अक्टूबर को राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस पर सम्मानित किया जाएगा।

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