आगरा के श्री पारस अस्पताल के संचालक का अदालत में समर्पण, जमानत मंजूर

सीजेएम कोर्ट ने 20-20 हजार के जमानती व्यक्तिगत बंधपत्र पर दी जमानत। आक्सीजन की कथित माकड्रिल को लेकर उप मुख्य चिकित्साधिकारी ने दर्ज कराया था मुकदमा। वीडियो वायरल होने के बाद कई पीड़ित सामने आए और माकड्रिल के चलते अपने मरीजों की मौत होने का आरोप लगाया।

Prateek GuptaWed, 27 Oct 2021 12:22 PM (IST)
आगरा के श्री पारस अस्‍पताल के संचालक की जमानत मंजूर हो गई है।

आगरा, जागरण्‍ संवाददाता। कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान ऑक्‍सीजन की कथित मॉकड्रिल को लेकर देश में चर्चाओं में रहे श्री पारस अस्पताल के संचालक डाक्टर अरिंजय जैन ने मंगलवार को मुख्य न्याययिक मजिस्ट्रेट की अदालत में समर्पण कर दिया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रदीप कुमार सिंह ने आरोपित डाक्टर को 20-20 हजार रुपये के दो जमानती व इतनी ही राशि का निजी मुचलका प्रस्तुत करने पर रिहाई के आदेश किए। अस्पताल में आक्सीजन की कमी को लेकर कथित माकड्रिल का वीडियो इंटरनेट मीडिया में वायरल होने पर उप मुख्य चिकित्साधिकारी ने डाक्टर के खिलाफ न्यू आगरा थाने में मुकदमा दर्ज कराया था।

श्री पारस अस्पताल के संचालक डाक्टर अरिंजय जैन का सात जून को कथित वीडियाे इंटरनेट मीडिया में वायरल हुआ था। जिसमें वह अस्पताल में आक्सीजन की कमी को लेकर बात कर रहे थे। आरोप है कि डाक्टर ने दम घोटू आक्सीजन माकड्रिल की भी बात कही थी। वीडियो वायरल होने के बाद कई पीड़ित सामने आए और माकड्रिल के चलते अपने मरीजों की मौत होने का आरोप लगाया। उन्होंने अस्पताल संचालक डाक्टर अरिंजय जैन पर मुकदमा दर्ज करने के लिए अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। उप मुख्य चिकित्साधिकारी डाक्टर आरके अग्न्रिहोत्री ने न्यू आगरा थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें डाक्टर अरिंजय जैन के कथित बयान से आम जनमानस में भ्रम की स्थिति पैदा होने का आरोप था।

पुलिस ने गुपचुप लगाई चार्जशीट

न्यू आगरा थाने मेें श्री पारस अस्पताल के संचालक डाक्टर अरिंजय जैन के खिलाफ धारा 188, 505, आपदा अधिनियम की धारा 52 व 54 एवं महामारी अधिनियम की धारा तीन के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। सात साल से कम सजा का प्रावधान होने पर पुलिस ने 19 जून को डाक्टर अरिंजय जैन को थाने से जमानत दे दी थी। चर्चित मामले में पुलिस ने गुपचुप चार्जशीट लगा उसे अदालत में दाखिल कर दिया। सीजेएम कोर्ट ने आरोप पत्र पर संज्ञान लेते हुए आरोपित को मुकदमे के विचारण के लिए तलब किया था। डाक्टर ने वरिष्ठ अधिवक्ता केके शर्मा और सुब्रत मेहरा के माध्यम से अदालत में कथन किया कि उन पर आक्सीजन की माक ड्रिल कर 22 लोगाें की जान लेने का आरोप आधारहीन है। डाक्टर ने खुद को बीमार बताते हुए मेडिकल बोर्ड की जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की। सीजेएम ने डाक्टर को 20-20 हजार के दो जमानती व इसी राशि के व्यक्तिगत बंधपत्र पर रिहाई के आदेश किए।

लैब से पुलिस ने नहीं ले सकी डीवीआर और मोबाइल की रिपोर्ट

चर्चित मुकदमे में पुलिस ने शुरू से ही लापरवाही दिखाई। उसने अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों की डीवीआर तत्काल जब्त नहीं की। मामला इंटरनेट मीडिया के माध्यम से सुर्खियाें में आने के बाद वह हरकत में आई। डीवीआर जब्त किया लेकिन वह कई दिन तक लखनऊ और आगरा फोरेंसिक लैब के बीच घूमती रही। पुलिस ने एक युवक और सर्राफ का मोबाइल भी जब्त किया था। जिनसे वीडियो बनाने का शक था। ये मोबाइल भी फोरेंसिक लैब भेजे गए थे। जिनकी जांच रिपोर्ट पुलिस अभी तक नहीं मंगा सकी।

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