Inner Ring Road: डेढ़ करोड़ खर्च फिर भी आगरा के इनर रिंग रोड में नहीं विकसित हुई हरियाली

Inner Ring Road एडीए के पास है रखरखाव का जिम्मा पांच साल पूर्व बनकर तैयार हुई थी पहले चरण की रोड। साढ़े दस किमी लंबी रोड पर हर साल लगाए जाते हैं पौधे। नेशनल हाईवे-19 को ग्वालियर रोड से जोड़ने के लिए इनर रिंग रोड का निर्माण किया जा रहा।

Tanu GuptaFri, 30 Jul 2021 01:03 PM (IST)
नेशनल हाईवे-19 को ग्वालियर रोड से जोड़ने के लिए इनर रिंग रोड का निर्माण किया जा रहा है।

आगरा, जागरण संवाददाता। आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) इनर रिंग रोड के पहले चरण में पौधारोपण में खेल कर रहा है। डेढ़ करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी हरियाली विकसित नहीं हुई है। रोड के दोनों साइड जिस तरीके से पौधे लगाए गए हैं, उस हिसाब से पौधे नजर नहीं आ रहे हैं। यह गैर बात है कि कागजों में हरियाली लहलहा रही है।

नेशनल हाईवे-19 को ग्वालियर रोड से जोड़ने के लिए इनर रिंग रोड का निर्माण किया जा रहा है। सपा शासनकाल में इसका निर्माण चालू हुआ था। तीन चरण में बन रही रोड का पहला चरण पूरा हो गया है। पहला चरण साढ़े दस किमी लंबा है। यह हाईवे-19 से लेकर फतेहाबाद रोड को जोड़ता है। इस रोड का निर्माण 350 करोड़ रुपये में हुआ है जबकि हर साल हरियाली विकसित करने के नाम पर 20 से 25 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इस साल भी एडीए अफसरों ने चालीस हजार पौधों के लक्ष्य के सापेक्ष 50 फीसद पौधे इनर रिंग रोड के पहले चरण में लगाए हैं।

जिस स्थल पर पौधे लगाए जाने हैं। पहले वहां मिट्टी की जांच होनी चाहिए। कौन सा पौधा उस स्थल के लिए उपयुक्त रहेगा। जांच से इसका पता चल जाएगा। इसी के बाद पौधारोपण करना चाहिए। इनर रिंग रोड में पांच साल पूर्व जो भी पौधे लगाए गए थे। वह काफी बड़े हो जाने चाहिए लेकिन हरियाली कहीं पर भी नजर नहीं आती है।

डा. शरद गुप्ता, पर्यावरणविद

पौधारोपण के नाम पर एडीए ने खेल किया है। इस मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। इसमें एडीए के कई अफसर फंसेंगे। जांच में पूरा मामला खुलकर सामने आ जाएगा।

अशोक कुशवाहा, समाजसेवी

इनर रिंग रोड के दोनों साइड हर साल पौधारोपण किया जाता है। जिस तरीके से पौधे लगाए जाते हैं। उस हिसाब से हरियाली होनी चाहिए लेकिन स्थिति इसके विपरीत है।

किशन अग्रवाल, क्षेत्रीय निवासी ताजनगरी फेज-2

- इनर रिंग रोड में हरियाली विकसित करने के लिए हर कदम उठाया जा रहा है। हरसाल पौधे लगाए जा रहे हैं।

राजेंद्र प्रसाद, सचिव एडीए 

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