शहर हमारा आवाजों का जंगल

शहर हमारा आवाजों का जंगल

एसएन मेडिकल कालेज में प्रति वर्ष 50 हजार लोग आते हैं कम सुनने की शिकायत लेकर ध्वनि प्रदूषण और तेज आवाज संगीत लोगों में सुनने की क्षमता को कर रहा कम

JagranWed, 03 Mar 2021 01:36 AM (IST)

विश्व श्रवण दिवस पर विशेष

आगरा, जागरण संवाददाता। एमजी रोड और हाईवे पर सुबह से रात तक वाहनों की तेज आवाजें, समारोहों में डीजे पर बजता कानफोडृू संगीत, बाजारों में तेज आवाज में बजते लाउड स्पीकर। यह सब शहर को आवाजों के जंगल में बदल रहे हैं। लोगों के सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंच रहे हैं। लगातार बढ़ते ध्वनि प्रदूषण समेत अन्य कारण लोगों में बहरेपन का कारण बन रहे हैं।

दुनिया भर मे तीन मार्च को बहरेपन को रोकने, सुनने की क्षमता की देखभाल के लिए विश्व श्रवण दिवस मनाया जाता है। शहरी जीवन शैली और ध्वनि प्रदूषण, ईयरफोन से लगातार तेज आवाज में संगीत ताजनगरी के लोगों की सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंचा रहा है। एसएन मेडिकल कालेज के ईएनटी विभाग में हर वर्ष करीब 50 हजार लोग सुनने की क्षमता की शिकायत लेकर पहुंचते हैं। इनमें नवजात से लेकर 90 वर्ष की आयु तक के लोग शामिल होते हैं।

दस फीसद बुजुर्गों में यह समस्या उनकी आयु के चलते है। जबकि दो फीसद नवजात में यह समस्या जन्म के समय ज्वाइंडिस होने, मां के गर्भवती होने के दौरान किसी दवा के साइड इफेक्ट्स आदि कारणों से हो रही है। इसी तरह 20 फीसद में कान बहने और इंफेक्शन के चलते सुनने की क्षमता का नुकसान होता है। वहीं, युवा और प्रौढ़ आयु के लोगों में ध्वनि प्रदूषण समेत अन्य कारक हैं। ऐसे बरकरार रखें सुनने की क्षमता

-यदि शोरगुल वाली जगह जैसे फैक्ट्री या कारखाना आदि जगहों पर काम करते हैं तो कानों की सुरक्षा के लिए ईयर प्लग लगा सकते हैं।

-चौराहों पर आठ से 12 घंटे खड़े होने वाले ट्रैफिक पुलिसकर्मी वाहनों की ध्वनि लगातार सुनते हैं। इससे बचने के लिए वह कानों में ईयर प्लग लगा सकते हैं।

-90 डेसीबल ये कम आवाज कानों के लिए ठीक है। इससे तीव्र आवाज कानों के लिए हानिकारक होती है, इससे बचें।

-आइपाड, एमपी-3 प्लेयर को हेडफोन या ईयरबड्स की मदद से जरूरत से ज्यादा तेज आवाज और लगातार लंबे समय तक सुनना हमारी सुनने की क्षमता को कम कर सकता है।

-संगीत सुनते समय वाल्यूम हमेशा मीडियम या उससे नीचे रखें। शोरगुल वाली जगह पर तेज आवाज में संगीत सुनने से कानों को नुकसान हो सकता है।

---------- क्या कहते हैं विशेषज्ञ

नवजात शिशु में कई कारणों से सुनने की क्षमता का नुकसान हो सकता है। छह से आठ महीने का कोई बच्चा यदि तेज आवाज पर प्रतिक्रिया नहीं देता है तो इसे गंभीरता से लें। उसका टेस्ट कराने के बाद जरूरी होने पर काकलियर इंप्लांट कराएं। एक से दो साल की आयु में इंप्लांट कराने से बच्चा जल्दी रिकवर करता है।

डाक्टर धर्मेंद्र कुमार ईएनटी विभागाध्यक्ष एसएन मेडिकल कालेज

---------- इनके लिए 60 डेसीबल से ज्यादा ध्वनि है नुकसान दायक

काकलियर इंप्लांट या हियरिग हेड लगाने वाले बच्चों की स्पीच थेरेपी करने वाले प्रकाश कहते हैं कि ऐसे बच्चों के लिए 60 डेसीबल से तेज ध्वनि कानों के लिए नुकसान दायक है। यह ध्वनि आवाज की जगह शोर पैदा करती है। ज्यादा देर तक उसे सुनने से नुकसान होता है।

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.