Mudiya Mela: सदियां गाएंगी मुड़िया मेला के लम्हों की दास्तान, सद्भावना की मिसाल बना इस बार पर्व

Mudiya Mela मुस्लिम-हिंदू ने मिलकर की मुड़िया महंत पर पंखुड़ियों की बारिश। मुड़िया पूर्णिमा मेला बना सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल। गोवर्धन का मुड़िया मेले में सांप्रदायिक सद्भाव के बीज अंकुरित हुए। मुस्लिम समाज के लोगों ने पुष्प वर्षा कर देश-दुनिया की खैरियत मांगी।

Tanu GuptaSat, 24 Jul 2021 05:19 PM (IST)
मुस्लिम समाज के लोगों ने पुष्प वर्षा कर देश-दुनिया की खैरियत मांगी।

आगरा, रसिक शर्मा। मैं मुस्लिम हूं, तू हिंदू है, हैं दोनों इंसान, ला मैं तेरी गीता पढ़ लूं, तू पढ़ ले कुरान, अपने तो दिल में है दोस्त, बस एक ही अरमान, एक थाली में खाना खाए सारा हिंदुस्तान। इन लाइनों में छिपे संदेश को शनिवार को पोर-पोर जिया है गोवर्धन ने। गोवर्धन का मुड़िया मेले में सांप्रदायिक सद्भाव के बीज अंकुरित हुए। मुड़िया शोभा यात्रा में मुस्लिम समाज के लोगों ने पुष्प वर्षा कर देश-दुनिया की खैरियत मांगी।

बड़ा बाजार निवासी मोहम्मद उमर फारुखी, रशीद खान, मोहम्मद शान, मोहम्मद नूर ने व्यापारी नेता संजीव लालाजी, लछमन ठाकुर, पंकज मुखिया के साथ सद्भाव की इस तस्वीर में भाईचारे के रंग भरे।महाप्रभु मंदिर के मुड़िया महंत गोपाल दास का शोभा यात्रा से पूर्व संत सनातन की भजन कुटी पर भव्य स्वागत किया गया। मोहम्मद शान ने मुड़िया महंत गोपाल दास के साफा बांधा, मोहम्मद उमर फारुखी ने फूलों का हार तो मोहम्मद नूर ने नरोत्तम दास को राधा नाम से अंकित दुपट्टा पहनाया। मोहम्मद उमर फारुखी ने विश्वंभर दास और रशीद खान ने सुधा सिंधु दास का स्वागत किया। सांप्रदायिक सद्भाव के इन पलों पर व्यापारी नेता संजीव लालाजी, लछमन ठाकुर, पंकज मुखिया लगातार पंखुड़ियों की बारिश करते रहे। मुस्लिम युवकों ने भी मुड़िया संतों पर जमकर पुष्प वर्षा की। गोवर्धन नगर पंचायत के उपाध्यक्ष रहे मोहम्मद उमर फारुखी ने बताया कि वह गिरिराजजी की परिक्रमा लगाते रहते हैं। उनकी अल्लाह और ईश्वर दोनों में आस्था है। मोहम्मद शान कहते हैं कि गोवर्धन की धार्मिक भूमि से समाज में प्रेम और आपसी भाईचारे का संदेश जाना चाहिए। 

राधाकुंड में संतों ने मनाया मुड़िया पर्व

राधाकुंड में इस बार गुरु पूर्णिमा पर्व साधु संतों द्वारा संक्षिप्त रूप में मनाया गया। बाहर से आने वाले सैकड़ों शिष्य अपने गुरुदेव की पूजा करने को नहीं आ सके। केवल स्थानीय साधु-संतों ने मुंडन करवा कर और पताका हाथ में लेकर गिरिराज परिक्रमा की। रघुनाथ दास गोस्वामी गद्दी से सुबह सूक्ष्म रूप से शोभा यात्रा भी निकाली गई। शोभा यात्रा में मंदिर मठों में रहने वाले साधु संतों ने हिस्सा लिया। यह परंपरा 465 वर्ष पुरानी है। नगर के मंदिरों में अनेकों धार्मिक अनुष्ठान किए गए। स्थानीय लोगों ने भी अपने गुरु की पूजा की ।

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