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मुखड़ा पिया का देखकर, दुल्हनें शर्मा गईं, जानिए क्यों

आगरा, जागरण संवाददाता।

दुल्हन के लिबास में सजी, हाथों में मेहंदी रचाए, सोलह श्रृंगार किए, पूरे दिन की भूखी-प्यासी सुहागनों ने जैसे ही चांद को देखा, उनकी सारी थकावट उतर गई। छलनी में से आसमान के चांद को देखकर अपने चांद के लिए दुआ मांगी। अ‌र्घ्य दिया और व्रत खोला।

हिदू पंचाग के मुताबिक कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवाचौथ मनाया जाता है। गुरुवार को महिलाओं ने अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखा और पूजा की। ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सरगी खाई और उसके बाद व्रत शुरू किया। दोपहर तक घर के काम निपटाए और शाम का इंतजार शुरू किया। शाम को सोलह श्रृंगार के बाद अपने-अपने घरों में या कॉलोनियों में समूह में करवाचौथ की कहानी पढ़ी गई। उसके बाद चांद का इंतजार शुरू हुआ। चांद निकला समय से

गुरुवार को मौसम विभाग के अनुसार चांद रात में 8:18 पर निकलना था। एक-दो मिनट की देरी से चांद ने अपना दीदार करवाया। चांद निकलते ही कई घरों में आतिशबाजी भी हुई। हालांकि चांद का इंतजार नई-नवेली दुल्हनों को भारी पड़ गया। पूरा दिन भूखा रहने के बाद बार-बार छत पर जाकर या इंटरनेट-टीवी को चैक करती रहीं। कॉलोनियों और अपार्टमेंट्स में हुई सामूहिक पूजा

करवाचौथ की पूजा का मजा मिलकर करने से आता है। तभी तो पता चलता है कि किसने क्या पहना है। इसीलिए इस बार कॉलोनियों और अपार्टमेंट्स में शाम के समय सभी महिलाओं ने मिलकर एक साथ पूजा की। कुछ बुजुर्ग महिलाओं से कथा सुनी। पंजाबी समाज में थाली भी घुमाई गई। व्रत के दिन भी की शॉपिंग

कई महिलाएं व्रत के बावजूद बाजारों में शॉपिंग करती हुई दिखीं। कुछ मेहंदी लगवाने के लिए आईं थी तो कुछ लास्ट मिनट शॉपिंग के लिए। किसी को कॉस्मेटिक खरीदना था तो किसी की मैचिंग चूड़ियां ही रह गई थीं। करवे, कैलेंडर और सींखों को खरीदने के लिए भी महिलाएं बाजारों में पहुंची।

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