UP Board Exams 2021: कदम-कदम पर बाधा, बोर्ड परीक्षा से पहले और भी हैं संकट

यूपी बोर्ड की परीक्षाओं पर इस साल शुरू से ही कोई न कोई ग्रहण बना रहा।

शुरुआत से ही संकट में फंसी तैयारियां और व्यवस्थाएं। परीक्षा फार्म केंद्र निर्धारण और घोषणा सबकुछ हुआ देरी से। स्थिति यह है कि इस बार दिसंबर तक बोर्ड परीक्षा फार्म भरे गए जबकि परीक्षा तीन बार टाली जा चुकी है। अब भी परीक्षा कब और कैसे होगी? कोई नहीं जानता।

Prateek GuptaTue, 20 Apr 2021 08:50 AM (IST)

आगरा, जागरण संवाददाता। कोरोना संकट से पैदा हुई विपरीत परिस्थितियों से अन्य बोर्ड भले धीरे-धीरे ही सही थोड़ा-बहुत उबर आए हों, लेकिन उप्र प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) लाॅॅकडाउन के बाद से अब तक इससे नहीं उबर पाया है। स्थिति यह है कि इस बार दिसंबर तक बोर्ड परीक्षा फार्म भरे गए, जबकि परीक्षा की तिथि तीन बार टाली जा चुकी है। अब भी परीक्षा कब और कैसे होगी? कोई नहीं जानता।

स्थिति यह है कि यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा में कदम-कदम पर बाधा आ रही है। किसी को याद नहीं कि पहले इसके आयोजन में कभी इतनी मुसीबत झेलनी पड़ी हो। इस असमंजस और ऊहापोह की स्थिति के कारण जिले के एक लाख 20 हजार से ज्यादा पंजीकृत विद्यार्थी परेशान हैं।

तीन बार टली परीक्षा, दो बार बदला कार्यक्रम

विद्यार्थियों के असमंजस में होने का सबसे बड़ा कारण परीक्षा घोषित होने के बाद एक के बाद एक, तीसरी बार टलना है। फरवरी में प्रस्तावित परीक्षा इस बार शुरू से ही देरी का शिकार थी, जिसके चलते इसे 24 अप्रैल को कराने की घोषणा की गई। परीक्षा कार्यक्रम भी जारी हो गया। लेकिन बीच में हाईकोर्ट के आदेश से पंचायत चुनाव में नया परिसीमन लगाना पड़ा और 24 अप्रैल से शुरू होने वाली बोर्ड परीक्षा को स्थगित कर आठ मई से कराने की घोषणा की गई। संशोधित कार्यक्रम भी जारी हो गया, लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण परीक्षा तीसरी बार टली और इसे 20 मई तक के लिए टाल दिया गया। अब परीक्षा कब होगी, इस पर फैसला प्रस्तावित बैठक में लिया जाएगा।

और भी हैं मुश्किल

यह मुश्किलें यहीं खत्म होती नहीं दिख रही। प्रधानाचार्य परिषद के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष और आरबीएस कालेज के प्रधानाचार्य डा. यतेंद्र पाल सिंह का कहना है कि बोर्ड परीक्षा के लिए जिले में 156 केंद्र बनाए गए हैं, जो वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए नाकाफी हैं। एक-एक केंद्र में संसाधनों की कमी के बावजूद 800 से 1200 विद्यार्थी आवंटित कर दिए गए हैं। ऐसे में शारीरिक दूरी का पालन करते हुए उन्हें बैठाना और सुरक्षित परिवेश में परीक्षा कराना संभव नहीं होता। लिहाजा परीक्षा से पहले केंद्र संख्या बढ़ाने पर गंभीरता से विचार करना होगा, नहीं तो कोरोना संक्रमण फैलने की आशंका बनी रहेगी और विद्यार्थियों के साथ शिक्षक भी संक्रमित हो सकते हैं।

बता दें कि 25 नवंबर को जारी केंद्र निर्धारण नीति में कोरोना को देखते हुए शारीरिक दूरी बनाए रखने के उद्देश्य से प्रत्येक विद्यार्थी के लिए 36 वर्गफीट (3.34 वर्गमीटर) का क्षेत्रफल निर्धारित किया गया था। 21 जनवरी को इसे संशोधित कर 25 वर्गफीट (2.32 वर्गमीटर) कर दिया गया।

दुरुस्त करें संसाधन

प्रधानाचार्य परिषद के प्रदेश महामंत्री डा. रामलखन यादव का कहना है कि परीक्षा से पहले शासन और माध्यमिक शिक्षा विभाग को केंद्रों पर संसाधन दुरुस्त कराने होंगे। वर्तमान परिस्थिति नहीं हैं कि इतने विद्यार्थियों की परीक्षा सुरक्षित परिवेश में कराई जाए। ऐसे में जिम्मेदारी विभागीय अधिकारियों की होगी। 

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