Banke Bihari: बांकेबिहारी मंदिर खोलने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू

बांकेबिहारी मंदिर के बाहर धरना देते धर्म रक्षा संघ के सदस्‍य। फोटो: जागरण
Publish Date:Thu, 22 Oct 2020 12:54 PM (IST) Author: Prateek Gupta

आगरा, जेएनएन। ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर खोलने की मांग जोर पकड़ती जा रही है। पहले मामला कोर्ट में पहुंचा और मंदिर परिसर के बाहर धरना शुरू हो गया है। अलग-अलग लोग एक ही मांग कर रहे हैं कि बांकेबिहारी मंदिर खोला जाए। बुधवार से यहां व्यापारी धरने पर बैठ गए थे, वहीं गुरुवार को धर्म रक्षा संघ के सदस्य भी अलग धरने पर बैठने आ गए। धर्म रक्षा संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि मंदिर खोलने की मांग को लेकर उनका आज से अनिश्चितकालीन धरना शुरू हो गया है।

गुरुवार को धरने पर बैठे धर्म रक्षा संघ के मेघश्याम गौतम, देवकी शर्मा, महेश शर्मा, ताराचंद गोस्वामी, श्रीदास प्रजापति ने कहा कि बांकेबिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं का प्रवेश शुरू नही होता तब तक धरना जारी रहेगा। बताते चलें कि बुधवार से वृंदावन के व्यापारी भी अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। करीब सात माह बाद 17 अक्टूबर से ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए गए थे। लेकिन श्रद्धालुओं की भीड़ के आगे व्यवस्था ध्वस्त हो गई। 19 अक्टूबर से फिर मंदिर के पट बंद कर दिए गए हैं। मंदिर के पट खुलवाने को लेकर आंदोलन शुरू हो गया है। इस मामले में सिविल जज जूनियर डिवीजन की अदालत में भी दो वाद दायर हो चुके हैं। इनमें चार नवंबर की तारीख सुनवाई के लिए निर्धारित की गई है। उधर, मंदिर प्रबंधन आॅॅनलाइन पंजीकरण के जरिए श्रद्धालुओं को दर्शन कराने की व्यवस्था कर रहा है।

मंदिर खोलने की मांग पर तीर्थ पुरोहित हुए मुखर

ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर बंद होने के बाद से बेरोजगार हुए तीर्थ पुरोहित पंडा अब मुखर होने लगे हैं। दो दिन मंदिर खोलने के बाद बंद हो गए तो इनके सामने रोजी रोटी का सवाल खड़ा हुआ। अब तीर्थ पुरोहितों ने बैठक कर प्रशासन से जल्द दोबारा मंदिर खोलने की मांग की है। मथुरा मार्ग पर दाऊजी की बगीची पर गुरुवार को तीर्थ पुरोहित पंडा सभा ने बैठक आयोजित की। बैठक में वक्ताओं ने कहा सात महीने से मंदिर बंद होने के कारण श्रद्धालुओं का वृन्दावन आना बंद हो गया है। जबकि उनकी रोजी रोटी श्रद्धलुओं पर ही निर्भर है। पंडा समाज पूरी तरह भुखमरी के कगार पर पहुंच गया है। ऐसे में अगर मंदिर नही खुलता है तो तीर्थ पुरोहित और पंडा समाज आंदोलन के लिए बाध्य होगा।

 

 

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