आंबेडकर विवि में जांच समिति ने पूछा, डिग्री और अंकतालिका वितरित करने के क्या उपाय अपनाए

आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा में विधानसभा की आश्वासन समिति की टीम ने की बैठक। एक पटल पर सालों से टिके कर्मचारियों की मांगी जानकारी दिए कार्यवाही के निर्देश। समिति ने निर्देश दिए लंबित डिग्री और अंकतालिकाओं के वितरण के लिए अभियान चलाया जाए।

Prateek GuptaTue, 27 Jul 2021 10:15 AM (IST)
विधानसभा की आश्‍वासन समिति ने आंबेडकर विवि में आकर जांच की है।

आगरा, जागरण संवाददाता। डा. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में विधानसभा की आश्वासन समिति की टीम ने कई बिंदुओं पर जांच की। अंकतालिकाओं व डिग्री के वितरण समेत जो कर्मचारी सालों से एक ही पटल पर टिके हैं, उनकी जानकारी मांगी गई। समिति ने एक महीने में दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्यवाही के निर्देश दिए।

विश्वविद्यालय परिसर में बृहस्पति भवन में समिति की टीम ने जांच के लिए बैठक की। बैठक की अध्यक्षता फिरोजाबाद विधायक सदर मनीष असीजा ने की। शासन की ओर से विशेष सचिव मनोज कुमार भी उपस्थित थे। समिति ने वर्ष 2013-14, 2014-15, 2015-16 तीन वर्षों में कितनी अंकतालिकाएं और डिग्री अवितरित रह गई हैं, उसकी जानकारी मांगी। यह भी पूछा गया कि उनको वितरित करने के क्या उपाय किए गए हैं। परीक्षा नियंत्रक अजय कृष्ण यादव ने बताया कि डिग्री और अंकतालिका वितरण का काम चल रहा है। इसके लिए आनलाइन हेल्प डेस्क बनाई गई है, जहां आनलाइन आवेदन करने वाले छात्रों को जल्द-जल्द से डिग्री व अंकतालिका दिलाने के प्रयास हो रहे हैं। समिति ने निर्देश दिए लंबित डिग्री और अंकतालिकाओं के वितरण के लिए अभियान चलाया जाए। समिति ने विश्वविद्यालय द्वारा छात्रों को दी जाने वाली सुविधाओं की जानकारी भी मांगी। इसके बाद समिति ने 94 ऐसे कर्मचारियों की जानकारी दी, जो पिछले बीस सालों से एक ही पटल पर टिके हुए हैं। समिति ने ऐसे कर्मचारियों के लिए नीति बनाने के निर्देश दिए।

नहीं है डाटा सेंटर और सर्वर

समिति ने वित्त अधिकारी से कहा कि अगर आपके पास कई सौ करोड़ रुपये रिजर्व में हैं, जो आप अभी तक अपना डाटा सेंटर और सर्वर क्यों नहीं है। समिति ने सुझाव दिए कि एग्जामिनेटस मैनेजमेंट सिस्टम का अलग विभाग बनाया जाए। उसमें एक डाटा सेंटर और सर्वर विश्वविद्यालय का खुद का हो। ओएमआर प्रणाली आधारित परीक्षा कराई जाए, जिससे पारदर्शिता आएगी।

क्यों नहीं हुई कार्यवाही

2015-16 में प्रयोगात्मक परीक्षाओं के लिए 100 महाविद्यालय एक ही शिक्षक को संबद्ध कर दिए गए थे।इसकी जांच हुई थी, जिसमें शिक्षक दोषी पाया गया था। समिति ने सवाल किए कि अब तक उस शिक्षक के खिलाफ कार्यवाही क्यों नहीं की गई है। विधि सम्मत कार्यवाही के निर्देश दिए।

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