इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी से जूझ रहा आगरा का खेल जगत, कैसे तैयार होंगे यहां ओलिंपियन

क्रिकेट को छोड़कर अन्य खेलों में नहीं है अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर। कई खेलों में एकलव्‍य स्‍टेडियम में अच्छे कोचों का है अभाव। 50 लाख से अधिक की आबादी वाले शहर का कोई खिलाड़ी ओलिंपिक में नहीं ले रहा भाग। स्‍पोर्ट्स हॉस्‍टल से लेकर अन्‍य बुनियादी सुविधाओं के इंतजार में खिलाड़ी।

Prateek GuptaMon, 26 Jul 2021 11:28 AM (IST)
आगरा के स्‍टेडियम को मूलभूत सुविधाओं का इंतजार है।

आगरा, जागरण संवाददाता। टोक्यो में ओलिंपिक चल रहा है। भारत का अब तक का सबसे बड़ा दल ओलिंपिक में भाग लेने गया है मीराबाई चानू ने वेटलिफ्टिंग में शनिवार को रजत पदक जीतकर भारत को अच्छी शुरुआत दिलाई तो ताजनगरी में खेलप्रेमियों ने देश को मिले पहले पदक पर जश्न मनाया। मगर, एक सवाल निरंतर खेल प्रेमियों और शहरवासियों को कचोट रहा है। 50 लाख से अधिक की आबादी होने के बावजूद आगरा के खिलाड़ी आखिर क्यों ओलिंपिक में भाग नहीं ले पाते हैं। हाकी खिलाड़ी जगबीर सिंह और अंकित शर्मा के अलावा कोई और ओलिंपिक नहीं खेल सका। क्रिकेट को छोड़ दें तो अन्य खेलों में इंफ्रास्ट्रक्चर का नितांत अभाव है। इंफ्रास्ट्रक्चर के अभाव में खेलों के महाकुंभ तक खिलाड़ी पहुंचें भी तो आखिर कैसे...

इंफ्रास्ट्रक्चर का है अभाव

-शहर में स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर का अभाव है।

-एकमात्र एकलव्य स्पोर्ट्स स्टेडियम है, जिसे अब पूरी तरह कायाकल्प की जरूरत है।

-स्पोर्ट्स अवेयरनेस के लिए कोई मुहिम सरकार या प्रशासन के स्तर पर नहीं है।

-स्पोर्ट्स हास्टल और अच्छे कोच का अभाव है।

-आगरा में केवल जिमनास्टिक, कबड्डी के हास्टल हैं, अन्य खेलों के हास्टल नहीं हैं।

-हम अपने स्टार आइकन की पहचान को हाईलाइट नहीं कर पाए हैं।

स्टेडियम में डेढ़ वर्ष से नहीं हैं कोच

एकलव्य स्पोर्ट्स स्टेडियम में पिछले डेढ़ वर्ष से अधिकांश खेलों में कोच नहीं हैं। यहां केवल टेबल टेनिस, जिमनास्टिक, एथलेटिक्स और फुटबाल के ही कोच हैं। कुश्ती, निशानेबाजी, हाकी, क्रिकेट, बास्केट बाल, वालीबाल, स्वीमिंग, लान टेनिस, बैडमिंटन, कबड्डी, मुक्केबाजी, ताइक्वांडो, तलवारबाजी समेत अन्य खेलों में कोच ही नहीं हैं।

आगरा से होनी चाहिए बदलाव की शुरुआत: जगबीर सिंह

ओलिंपियन जगबीर सिंह ने कहा कि ओलिंपिक के हर खेल में एक पूर्व खिलाड़ी को स्पोर्ट्स कमिश्नर बनाया जाना चाहिए। उसे खेल को संचालित करने का पूरा अनुभव होना चाहिए। उसे दफ्तरों के चक्कर नहीं लगवाए जाएं। ओलिंपिक खेलों की कमेटी हो जो अपने विचार व योजनाएं सरकार के सामने रखे। आगरा से इस बदलाव की शुरुआत होनी चाहिए। मैं सबसे आगे बढ़कर इसकी जिम्मेदारी लूंगा, लेकिन किसी के चक्कर नहीं लगाऊंगा। आगरा में मेडिसिटी और इंडस्ट्रियल एरिया के लिए जगह चिह्नित की जा रही हैं, लेकिन स्टेडियम या स्पोर्ट्स कांप्लेक्स के लिए कुछ नहीं हो रहा। स्पोर्ट्स कांप्लेक्स बनाए जाएं, जहां ओलिंपिक खेलों कबड्डी व हाकी के लिए ग्राउंड, एथलेटिक्स ट्रैक, मल्टीपर्पज हाल हों, जहां बैडमिंटन, बास्केट बाल, वालीबाल आदि के खिलाड़ियों को सभी सुविधाएं मिलें। इंफ्रास्ट्रक्चर होगा तो टूर्नामेंट हो सकेंगे। स्टार खिलाड़ी आएंगे तो अन्य खिलाड़ियों को उनसे प्रेरणा मिलेगी।

शहर में सुविधाओं का अभाव है। यहां प्रतिभाओं की कमी नहीं है। अगर यहां पर खेलने के लिए स्पोर्ट्स कांप्लेक्स हों और सरकार सुविधाएं दे तो मेडलों की कमी नहीं हो। हम चीन से भी बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।

-राधा ठाकुर, बैडमिंटन खिलाड़ी

डेढ़ वर्ष से स्टेडियम में कोई कोच नहीं है। टूर्नामेंट के आयोजन न के बराबर हो गए हैं। स्कूल स्तर पर टूर्नामेंट नहीं होने से खिलाड़ियों को मौके नहीं मिल पा रहे हैं। स्कूल स्तर पर आयोजन हो तो हाकी फिर लोकप्रिय होगी।

-शाहरुख मलिक, हाकी खिलाड़ी 

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