Traffic Jam: आगरा-दिल्ली हाईवे पर दो किलोमीटर तक भीषण जाम, फंसे सैकड़ों वाहन

आइएसबीटी से लेकर गुरु का ताल तक हाईवे की एक लेन और सर्विस रोड जाम। आइएसबीटी पर फ्लाईओवर का निर्माण कार्य चल रहा है। यहां वैकल्पिक मार्ग बनाए गए थे। बारिश के कारण गहरे गड्ढे हो गए हैं। एनएचएआइ के अधिकारियों ने इन्हें ठीक कराने की सुध नहीं ली।

Nirlosh KumarSat, 25 Sep 2021 04:51 PM (IST)
गड्ढों के कारण वाहनों की रफ्तार रहती है कम।

आगरा, जागरण संवाददाता। आगरा-दिल्ली हाईवे पर शनिवार दोपहर भीषण जाम लग गया। करीब तीन किमी तक वाहनों की लाइन लग गई। लोग जाम से जूझते रहे और खीझते रहे। मगर, वहां जाम खुलवाने को पुलिसकर्मी नजर नहीं आए।

आइएसबीटी पर फ्लाईओवर का निर्माण कार्य चल रहा है। इसके चलते यहां वैकल्पिक मार्ग बनाए गए थे। बारिश के कारण इन मार्गों पर गहरे गड्ढे हो गए हैं। इसके बाद भी एनएचएआइ के अधिकारियों ने इन्हें ठीक कराने की सुध नहीं ली। गड्ढों के कारण हाईवे पर वाहनों की रफ्तार धीमी रहती है। यहां से जल्दी निकलने के चक्कर में शनिवार दोपहर सिकंदरा से खंदारी की ओर जाने वाली लेन पर जाम लग गया। इसके बाद जाम बढ़ता गया। यहां ट्रैफिक संचालित करने को न ट्रैफिक पुलिस थी और न ही थाना पुलिस पहुंची। इसके कारण जाम बढ़ता गया। शाम चार बजे तक गुरु का ताल तक वाहनों की लाइन लग गई। जाम से बचने को लोग अंदर के रास्तों पर गए तो वहां भी जाम लग गया। हालात ऐसे बन गए कि दो मिनट का रास्ता तय करने में लोगों को दो घंटे तक लग गए। सैकड़ों की संख्या में दोपहिया और चार पहिया वाहन जाम में फंस गए। लोग पुलिस पर खीझते रहे। शाम चार बजे बारिश के कारण और मुश्किल हो गई। खबर लिखे जाने तक हाईवे पर जाम बढ़ता जा रहा था और इससे निजात दिलाने को न तो जिम्मेदार पुलिसकर्मियों ने सुध ली और न ही पुलिस अधिकारियों ने इसकी सुध ली थी। लोग एक दूसरे पर अपना गुस्सा उतार रहे थे।

कई जगह हुए झगड़े

जाम में फंसे लोग जल्दी निकलने के चक्कर में एक दूसरे से भिड़ गए। हाथापाई की नौबत तक आ गई। अन्य राहगीरों ने समझाकर किसी तरह मामला शांत कराया।

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.