Abhishek Bacchan: अभिषेक के जेल से बाहर आते ही खुशी से उछल पडीं लड़कियां, बोलीं Hello Abhi!

सेंट्रल जेल से शूटिंग कर बाहर निकलते अभिनेता अभिषेक बच्‍चन।

सेंट्रल जेल में चल रही हैं फिल्म दसवीं की शूटिंग। अभिषेक बच्चन को देखने के लिए जेल तक पहुंची प्रशंसक। मायूस होकर लौटने को हुईं तो इसी दौरान अभिषेक को जेल से बाहर आते देख उनकी मन की मुराद पूरी हो गई। अभिनेता को देखकर वह खुशी से उछल पड़ीं।

Prateek GuptaThu, 25 Feb 2021 09:40 AM (IST)

आगरा, जागरण संवाददाता। सेंट्रल जेल में चल रही फिल्म दसवीं की शूटिंग के तीसरे दिन अभिषेक बच्चन को देखने के लिए छात्राएं कोचिंग से सीधे जेल पर पहुंच गईं। करीब आधा घंटे तक जेल के मुख्य गेट से दूर तारों के पीछे खड़े होकर अभिषेक का इंतजार करती रहीं। मायूस होकर लौटने को हुईं तो इसी दौरान अभिषेक को जेल से बाहर आते देख उनकी मन की मुराद पूरी हो गई। अभिनेता को देखकर वह खुशी से उछल पड़ीं और तेजी से चिल्‍लाकर हलो अभि, बोला लेकिन शायद शोरगुल के चलते उनकी आवाज अभिषेक बच्‍चन के कानों तक नहीं पहुंच पाई।

सेंट्रल जेल में अभिषेक बच्चन और यामी गौतम की फिल्म दसवीं की शूटिंग सोमवार से चल रही है। इसकी जानकारी आसपास के लोगों को होने के बाद अभिनेता के प्रशंसक रोज वहां पहुंच रहे हैं। हालांकि पुलिस ने जेल परिसर के आसपास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की हुई है। मुख्य गेट के सामने परिसर में जहां अभिषेक बच्चन की वैनिटी वैन खड़ी है, वहां पर किसी भी बाहरी व्यक्ति के जाने पर रोक है। इसके चलते प्रशंसक दूर से उनकी झलक देख पा रहे हैं।

आवास विकास कालोनी की एक कोचिंग पढ़ने वाली छात्राओं को अभिषेक बच्चन के शूटिंग करने की जानकारी मिली थी। बुधवार को पांचों छात्राएं दोपहर में जेल के मुख्य गेट के बाहर तारों की बाड़ तक पहुंच गई। अभिनेता की झलक पाने के लिए पांचों काफी देर से इंतजार कर रही थीं। वह मायूस होकर लौटने को थीं, इसी दौरान अभिषेक बच्चन अपना शाॅॅट पूरा करने के बाद जेल से बाहर निकले। उन्हें वैनिटी वैन की ओर जाते देख छात्राएं खुशी से खिल उठीं।

रोज पहुंच रहे प्रशंसक पुलिस के लिए बने सिरदर्द

फिल्म की शूटिंग देखने के लिए रोज आ रहे प्रशंसकों की भीड़ पुलिस के सिरदर्द साबित हो रही है। पीएसी ने सेक्टर आठ की ओर खाली पड़े पड़े मैदान में कंटीले तार की बाड़ लगा दी है। इसके बावजूद शूटिंग देखने और अभिनेता से रूबरू होने की ललक लिए लोग वहां पहुंच जाते ह्रैं। वह तारों की बाड़ को हटाने का प्रयास करते हैं। जिन्हें कई बार लाठी फटकार करके तो कभी समझाकर लौटाना पड़ता है। 

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