फर्जी कागजात से नौकरी पाने वाले 130 शिक्षकों पर मुकदमा

फर्जी कागजात से नौकरी पाने वाले 130 शिक्षकों पर मुकदमा

बीएड सत्र 2005 की फर्जी मा‌र्क्सशीट और डिग्री से बने थे शिक्षक एसआइटी की जांच में पाए गए थे फर्जी कोर्ट और शासन के निर्देश पर हुई कार्रवाई

JagranFri, 16 Apr 2021 11:30 PM (IST)

आगरा, जागरण संवाददाता। फर्जी डिग्री और मा‌र्क्सशीट से नौकरी पाने वाले शिक्षकों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। जिला बेसिक शिक्षा विभाग ऐसे 168 शिक्षकों को पहले ही बर्खास्त कर चुका है। अब उनमें से 130 के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।

जिला बेसिक शिक्षाधिकारी (बीएसए) राजीव कुमार यादव ने बताया कि एसआइटी जांच में 249 शिक्षकों के नाम शामिल थे, जिनमें से 195 पर आरोप था कि उन्होंने डा. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की बीएड सत्र 2005 की फर्जी मा‌र्क्सशीट और डिग्री से बेसिक शिक्षा परिषद में नौकरी पाई है। जांच के बाद विभाग ने पहले चरण में 24 शिक्षकों को बर्खास्त कर उनके खिलाफ थाना शाहगंज में मुकदमा दर्ज कराया था। दूसरे चरण में विभाग ने कोर्ट और शासन के आदेश पर शेष 168 शिक्षकों को बर्खास्त किया था। अब सभी ब्लाक के खंड शिक्षाधिकारी अपने यहां के चिन्हित बर्खास्त शिक्षकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा चुके हैं। इनमें से 130 शिक्षकों के खिलाफ अलग-अलग थानों में मुकदमा दर्ज कराया गया है।

बीएसए का कहना है कि शासन ने सभी बर्खास्त शिक्षकों पर मुकदमा कराने के निर्देश खंड शिक्षाधिकारियों को दिए हैं, 130 पर मुकदमा दर्ज हो चुका है। शेष 30 शिक्षकों के खिलाफ भी एक-दो दिन में मुकदमा दर्ज कराकर रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। हालांकि यह काम शनिवार तक होना था, लेकिन पंचायत चुनाव और कुछ थानों से पर्याप्त सहयोग न मिलने के कारण तहरीर देने के बाद भी मुकदमा दर्ज नहीं हो सका है, जिससे के लिए एसएसपी को पत्र लिखकर कार्रवाई जल्द कराने की अपील की गई है।

इससे पहले भी कई शिक्षकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा चुका है।

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों से जुड़ी प्रमुख जानकारियों और आंकड़ों के लिए क्लिक करें।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.