चयन के बाद भी शिक्षकों को नहीं मिल रही नियुक्ति, विसंगति और गलतियों से अभ्यर्थी परेशान, वसूली का आरोप

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड द्वारा चयनित हैं अभ्यर्थी। विद्यालयों में पद और पाठ्यक्रम नहीं फिर भी हुआ विद्यालय आवंटित। विद्यालय प्रबंधक व डीआइओएस स्तर से अधियाचन भेजने में बड़ा घपला व गड़बड़ी की गई है।

Tanu GuptaMon, 29 Nov 2021 05:47 PM (IST)
उप्र माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड द्वारा चयनित हैं अभ्यर्थी।

आगरा, जागरण संवाददाता। उप्र माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड द्वारा माध्यमिक विद्यालयों में प्रवक्ता व प्रशिक्षित स्नातक वेतनक्रम में सहायक अध्यापकों की चयनित सूची में अनेक विसंगतियां व त्रुटियां हैं। इस कारण चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति-पत्र जारी कर कार्यभार ग्रहण कराने में कठिनाई हो रहा है। इसके एवज में उनसे सुविधा शुल्क वसूला जा रहा है। यह आरोप राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्रदेश कार्यसमिति वरिष्ठ उपाध्यक्ष डा. देवी सिंह नरवार ने लगाए हैं।

उनका कहना है कि मिढ़ाकुर स्थित जनता इंटर कालेज में हिंदी विषय में एक सहायक अध्यापक का पद रिक्त है, जबकि चयन बोर्ड ने हिंदी विषय के पांच सहायक अध्यापक चयनित करके भेज दिए हैं। इसी तरह यहां सामाजिक विज्ञान का एक रिक्त पद के सापेक्ष सामाजिक विज्ञान के चार सहायक अध्यापक चयनित करके भेजे हैं। संस्कृत प्रवक्ता का कोई पद व विषय नहीं होने पर भी संस्कृत विषय का प्रवक्ता चयनित करके भेज दिया है। इस कारण वहां पांच सहायक अध्यापक असंगत विषयों के भेजे गए, जिन्हें कार्यभार ग्रहण नहीं कराया जा सका।

वहीं तुलाराम उच्चतम माध्यमिक विद्यालय में कृषि और संस्कृत विषय के 14 एलटी ग्रेड सहायक अध्यापक भेजे गए हैं, जबकि वहां कृषि और संस्कृत विषय पढ़ाए ही नहीं जाते। जैंगारा स्थित गांधी स्मारक इंटर कालेज, शीतलकुंड स्थित जवाहर इंटर कालेज, फतेहाबाद स्थित जनता इंटर कालेज में भी रिक्त पदों के सापेक्ष अधिक अध्यापक चयनित करके भेजे हैं। अभ्यर्थियों को कार्यभार ग्रहण न कराए जाने से उनको परेशानी हो रही है। वहीं कागारौल स्थित किदवई इंटर कालेज में इतिहास प्रवक्ता को कार्यभार ग्रहण नहीं कराया गया।

अधियाचन भेजने में किया घपला

उनका कहना है कि इस मामले में उन्होंने चयन बोर्ड के अधिकारी एसएन चौरसिया से वार्ता की, तो उन्होंने बताया कि जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआइओएस) के माध्यम से जो अधियाचन बोर्ड को भेजा गया, उन्हीं के सापेक्ष चयनित अभ्यर्थी भेजे गए हैं। इसलिए विद्यालय प्रबंधक व डीआइओएस स्तर से अधियाचन भेजने में बड़ा घपला व गड़बड़ी की गई है, जिसकी जांच जरूरी है। ताकी दोषियों को चिन्हित कर कार्रवाई की जा सके। 

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