एटा के जिला अस्पताल में बुजुर्ग बंदी को हथकड़ी से बांधने वाले बंदी रक्षक को किया बर्खास्त

हथकड़ी से बंधे 84 साल के बाबूराम प्रधान। इंटरनेट द्वारा उपलब्ध फोटो।

एटा जेल में निरुद्ध बंदी की इंटरनेट मीडिया में वायरल हुई थी फोटो। वरिष्ठ अधीक्षक केंद्रीय कारागार ने जांच के बाद किया भेजी बर्खास्त। एटा के थाना सकीट गांव कुल्ला हबीबपुर के रहने वाले 84 साल के बाबूराम प्रधान को हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा हुई है।

Tanu GuptaSat, 15 May 2021 06:04 PM (IST)

आगरा, जागरण संवाददाता। एटा के अस्पताल में सजायाफ्ता बुजुर्ग बंदी को बेड पर हथकड़ी से बांधने वाले बंदी रक्षक अशोक कुमार को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। अस्पताल में भर्ती बुजुर्ग बंदी की फोटो इंटरनेट मीडिया में वायरल हुई थी। इसके बाद जेल अधीक्षक एटा ने बंदी के खिलाफ अपनी जांच रिपोर्ट वरिष्ठ अधीक्षक केंद्रीय कारागार वीके सिंह को भेजी थी। वरिष्ठ अधीक्षक ने बंदी रक्षक के कृत्य को संविधान द्वारा प्रदत्त मूल अधिकार व्यक़्तिगत स्वतंत्रता, मानवीय गरिमा तथा मानव अधिकार के स्थापित विधि व्यवस्था के प्रतिकूल पाया।

एटा के थाना सकीट, गांव कुल्ला हबीबपुर के रहने वाले 84 साल के बाबूराम प्रधान को हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा हुई है। बंदी को इस वर्ष छह फरवरी को जिला जेल एटा में निरुद्ध किया गया था। उसे नौ मई को कमजोरी महसूस होने पर जेल के अस्पताल में भर्ती किया गया। यहां उसका आक्सीजन लेवल कम देखकर उसे जिला अस्पताल में इलाज के लिए भेजा गया थ। वहां पर भी सांस लेने में दिक्कत होने की शिकायत पर बंदी बाबूराम प्रधान को अलीगढ़ के जे.एन मेडिकल कालेज अलीगढ़ के लिए रेफर किया गया।

मेडिकल कालेज में बेड उपलब्ध नहीं होने पर बंदी को वापस एटा के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। बंदी के एक पैर को हथकड़ी से बेड पर बांधने का फोटो इंटरनेट मीडिया में दो दिन पहले वायरल हुआ था। एटा जेल अधीक्षक ने बंदी रक्षक को लापरवाही बरतने के आरोप में निलंबित कर दिया था। मामले में बंदी रक्षक का भी बयान लिया गया था। उन्होंने अपनी पूरी रिपोर्ट वरिष्ठ अधीक्षक केंद्रीय कारागार आगरा को प्रेषित की थी। इसके आधार पर वरिष्ठ अधीक्षक केंद्रीय कारागार वीके सिंह ने बंदी रक्षक अशोक कुमार को जांच के बाद बर्खास्त कर दिया।

बंदी रक्षक ने जेल अधीक्षक को जांच में दिया था यह बयान

अपने खिलाफ हुई कार्रवाई के बाद बंदी रक्षक अशोक कुमार ने जांच में जेल अधीक्षक के सामने अपना पक्ष रखा था। उसका कहना था कि वह बंदी के साथ कारागार से ही उसके पलायन, हमला या असामान्य व्यवहार अथवा किसी विपरीत परिस्थिति के उत्पन्न होने की आशंका के मद्देनजर सुरक्षा की दृष्टि से यह हथकड़ी लेकर आया था। बंदी 13 मई को असामान्य हरकतें कर रहा था। वह अपने बेड से उठकर अपना आक्सीजन मास्क निकालकर इधर-उधर चला जाता था। वार्ड में भर्ती दूसरे मरीजों के पास जाने का प्रयास कर रहा था। अस्पताल के स्टाफ द्वारा उसे बंदी को अन्य मरीजों के पास न जाने देने की कहा गया। इसके चलते उसने कुछ देर के लिए बंदी के बेड पर बैठने के बाद उसके पैर में हथकड़ी लगा दी थी। जेल मैन्युअल में यह प्रावधान है कि चिकित्सालय के प्रभारी चिकित्साधिकारी की अनुमति के बाद बंदी को हथकड़ी लगाई जा सकती है। बंदी रक्षक का कहना था कि बंदी को शांत करने के लिए हथकड़ी लगाई थी, जो दस मिनट बाद उसके सामान्य होने पर निकाल दी गई थी। 

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!

रोमांचक गेम्स खेलें और जीतें
एक लाख रुपए तक कैश अभी खेलें

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.