कुदरत की मार से खून के आंसू रो रहे किसान

गली-मुहल्ले से लेकर खेत-खलिहान जलमग्न फसल को सुखाते-बीनते हुए बीता दिन

JagranTue, 19 Oct 2021 06:05 AM (IST)
कुदरत की मार से खून के आंसू रो रहे किसान

जागरण टीम, आगरा। कुदरत की मार से किसान खून के आंसू रो रहे हैं। रविवार देरशाम से शुरू हुई बारिश सोमवार को दिन भर जारी रही। इससे गली-मुहल्लों से लेकर खेत-खलिहान तक जलमग्न हो गए। खेतों में पककर तैयार खड़ी बाजरा, धान और उड़द की फसल खेतों में ही बिछ गई। बाजरा को सर्वाधिक नुकसान हुआ है। इसकी बाली टूटकर खेतों में ही बिखर गई है। सरसों और आलू की रोपाई कर चुके किसान भी बर्बाद हो गए हैं। उनकी मेहनत पर पानी फिर गया है। अब उन्हें दोबारा रोपाई करनी पड़ेगी। किसानों ने प्रशासन से आकलन कर नुकसान की भरपाई करने की मांग की है। सोमवार सुबह होते ही किसान अपने-अपने खेतों की ओर दौड़ पड़े। दिन भर बारिश में भीगते किसान अपनी फसल को साफ कर एकत्रित करते रहे।

बाह: लगातार हुई बारिश से खेत तालाब में तब्दील हो गए हैं। खेतों में खड़ी उनकी बाजरा की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। अब उन्हें सरसों व आलू की बोवाई के लिए इंतजार करना पड़ेगा। बाजरा की बिक्री के बाद किसी को ट्रैक्टर-ट्राली खरीदनी थी तो किसी को बेटी का ब्याह रचाना था लेकिन कुदरत ने उन्हें कहीं का नहीं छोड़ा

पिनाहट: क्षेत्र में रविवार से हो रही बारिश सोमवार को दिन भर जारी रही। इससे खेतों में तैयार खड़ी बाजरा, उड़द खेतों में ही पसर गई। बाजरा की बाली टूट गई। किसानों ने कहा कि बाजरा काला पड़ जाएगा। साथ ही रवि की फसल की बोवाई के लिए भी इंतजार करना पड़ेगा।

किरावली: क्षेत्र में धान, सरसों और बाजरा को सर्वाधिक नुकसान हुआ है। लगातार बारिश से फसल खेतों में ही बिछ गई है। सोमवार को अछनेरा के पुरामना, नगल तोड़ू, भवनपुरा, अरदाया, बबरौद, अगनपुरा, कुकथला, अभुआपुरा, अभैंदोपुरा, नगला बहरावती समेत कई गांवों में किसान दिन भर खेतों में फसल बचाने की कोशिश में लगे रहे। क्षेत्र में धान की 30 से 40 फीसद फसल बर्बाद हुई है।

एत्मादपुर: रिमझिम बारिश ने खेती किसानों को जबरदस्त प्रभावित किया है। आलू और सरसों की बोवाई कर चुके किसानों को काफी नुकसान पहुंचा है। उनका कहना है कि इससे रोपी गई फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। बाजरा की भी कटाई चल रही थी। ऐन वक्त पर आई बारिश ने उनके सपने चकनाचूर कर दिए। बारिश से बाजरा की बाल सड़ने की आशंका है।

खेरागढ़: क्षेत्र में बाजारा, मक्का, धान की फसल को नुकसान पहुंचा है। वहीं सरसों, गेहूं और आलू की फसल की बोवाई लेट होगी। इससे उनकी आय पर सीधा असर पड़ेगा। किसानों ने बताया कि बाजरा के अंकुरित होने का खतरा है।

फतेहाबाद: दो दिन से लगातार हुई बारिश ने किसानों की चिता बढ़ा दी है। खेतों में पानी भरने के कारण अब बोवाई 10 दिन बिलंब से होगी।

फतेहपुर सीकरी: लगातार हुई रिमझिम बारिश से गली-मुहल्लों से लेकर खेत जलमग्न हो गए। इससे सरसों का बीज जमीन में ही खराब हो जाएगा। वह अंकुरित नहीं होगा।

शमसाबाद: खेतों में कट चुकी बाजरा की फसल पूरी तरह भीग गई। सोमवार सुबह किसानों ने खेतों की ओर दौड़ लगा दी। दिन भर वे फसल को सुखाते-बीनते नजर आए। बारिश से आलू की बोवाई एक सप्ताह टल गई है। किसानों ने मुआवजे की मांग की है। पूर्व विधायक धर्मपाल ने कई गांवों में जाकर देखे हालात

जागरण टीम, आगरा। तेज हवा और दो दिन लगातार हुई बारिश से धान की फसल जलमग्न हो गई। इसकी जानकारी पर सोमवार सुबह पूर्व विधायक डा. धर्मपाल सिंह ने बरहन, आंवलखेड़ा, खांडा, नगला दयाली, नगला फूटरा आदि क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने किसानों से नुकसान के बारे में जानकारी ली। पूर्व विधायक ने प्रशासन से नुकसान का आकलन कर मुआवजा देने की मांग की है। बाजरा की फसल पककर तैयार थी। बारिश से फसल खेत में ही पसर गई। बाली में फफूंदी लगने और सड़ने का खतरा है। पशुओं के चारे का भी संकट हो गया है।

जितेंद्र उपाध्याय, किसान, बड़ागांव बेमौसम बारिश से बाजरा की फसल बर्बाद होने के बाद आलू व सरसों की बोवाई देरी से होगी। आलू व सरसों के लिए खेत तैयार थे। अब दोबारा जोताई करानी पड़ेगी।

श्रीकृष्ण, किसान, नहटौली 12 बीघा खेत में धान की फसल की थी। दो दिन हुई बारिश से खेत जलमग्न हो गए हैं। हमें काफी नुकसान हुआ है। इस बार मजदूरी भी नहीं निकल पाएगी

अजय कुमार, किसान, नगला तोड़ू आठ बीघा धान की फसल में पानी भर गया है। पूरी फसल बर्बाद हो गई। तीन दिन पहले सरसों के 11 बीघा खेत में बोवाई की थी। वह भी खराब हो गई।

लटूर सिंह, किसान, पुरामना पूरे सीजन की मेहनत पर पानी फिर गया। खेतों में बाजरा की फसल पककर तैयार थी। सोचा था, काट लेंगे लेकिन बारिश ने सब कुछ बर्बाद कर दिया।

- नरायन दत्त उपाध्याय, किसान बाजरा के साथ-साथ सरसों की फसल भी बर्बाद हो गई है। पूरे खेत में पानी भरा हुआ है। बोवाई का पूरा खर्चा चला गया। अब फिर से बोवाई करनी पड़ेगी।

दलवीर सिंह, किसान यह समय आलू की बोवाई का है। हम समेत कई किसानों ने बोवाई कर दी। बारिश से इसका बीज खराब हो गया। अब पुन: बोवाई करनी पड़ेगी। यह बड़ा नुकसान है।

यतेंद्र सिंह जादौन उर्फ मुन्ना, किसान किससे कहें, कुछ समझ नहीं आ रहा। इतना नुकसान हुआ है कि मजदूरी भी अपनी जेब से ही देनी पड़ेगी। मुआवजा मिले बगैर काम नहीं चलेगा।

रूप सिंह, किसान, जौताना अभी कुछ दिन पहले ही बीज बोए थे। नहीं मालूम था कि कुदरत की इतनी बड़ी मार मिलेगी। सब बर्बाद हो गया। फसल को बहुत नुकसान हुआ है।

बनवारी लाल चौधरी, किसान, नगला सराय विधानसभा का विशेष सत्र होने के कारण लखनऊ में हूं। किसानों के नुकसान के बारे में जानकारी मिली है। मुख्यमंत्री ने नुकसान का आकलन के लिए सर्वे के निर्देश दिए हैं।

चौधरी उदयभान सिंह, राज्यमंत्री, उत्तर प्रदेश बाजरा की फसल खेतों में कटी पड़ी थी। सोचा था कि कल काट लेंगे, तभी बारिश हो गई। इससे बाजरा और करब काली पड़ जाएगी।

प्रमोद रावत, किसान, खादरपुरा बारिश से खेतों में तैयार खड़ी बाजरा की फसल जमीन पर बिछ गई है। धूप निकलने पर बाल उपजने का खतरा है। खेतों में देरी से बोवाई होगी।

चरन सिंह, किसान, महारामपुरा

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