बगैर भवनों के ही चलेगी गांवों की सरकार

मिनी सचिवालय में होगा ग्राम प्रधान का कार्यालय इंटरनेट सुविधायुक्त कंप्यूटर व स्कैनर की व्यवस्था पंचायत सहायक व कंप्यूटर आपरेटर की नियुक्ति भी की जाएगी

JagranWed, 01 Dec 2021 06:00 AM (IST)
बगैर भवनों के ही चलेगी गांवों की सरकार

जागरण टीम, आगरा। हर गांव में मिनी सचिवालय बनाने के प्रदेश सरकार के निर्णय के तहत ग्राम प्रधान का कार्यालय, इंटरनेट सुविधा युक्त कंप्यूटर, स्कैनर आदि की व्यवस्था की जानी है। भवन निर्माण के बाद एक पंचायत सहायक व कंप्यूटर आपरेटर की नियुक्ति की जाएगी। सरकार की मंशा है कि इससे प्रत्येक जनपद में सैकड़ों युवाओं के लिए रोजगार के द्वार खुलेंगे। कुछ ग्राम पंचायतों में भवन बने लेकिन अव्यवस्थित हैं। इनकी मरम्मत होनी है। जहा नए बनाए जाने हैं वहा इनका निर्माण किया जाएगा। भवन निर्माण, पंचायत सहायक व कंप्यूटर आपरेटर की तैनाती आदि पर होने वाले व्यय वित्त आयोग, मनरेगा, ग्राम निधि और अन्य प्रशासनिक मद में अनुमन्य धनराशि से खर्च किए जाने को मंजूरी दी गई है। अधिकाश ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जिनमें भवन ही नहीं हैं। अव्यवस्थित भवनों की लंबी फेहरिस्त है। कहीं जमीन का विवाद चल रहा है तो कहीं जमीन उपलब्ध नहीं। ऐसी स्थिति में फिलहाल गाव की सरकार चलाना मुश्किल है। फतेहाबाद की आठ पंचायतों में नहीं हैं सचिवालय

फतेहाबाद के विकास का खाका तैयार होने के अलावा स्वास्थ्य, विकास और राजस्व विभाग के अफसरों की उपस्थिति भी हो। छोटे-छोटे मामलों का निस्तारण भी यहीं बैठक कर सहमति के आधार पर हो, स्वयं सहायता समूह बैंक स्थापित हो। गाव के लोगों को आय, जाति, निवास, पेंशन प्रमाण पत्र, खसरा, खतौनी की नकल, बच्चों में टीकाकरण के लिए स्थानीय स्तर पर सुविधाएं मिल सकें। सरकार की योजना अभी सफल होती नहीं दिख रही। वजह यह है कि फतेहाबाद ब्लाक की शाहवेद, जटपुरा, महाराजपुर, पलिया, कृपाल, बेगमपुर, धौर्रा, मोहम्मदपुर, साकुरी कला, बिचौला, बिहारी, नीचा खेड़ा, बेहड़ी, मडाइना, प्रतापपुरा, रामगढ़, सलैमपुर धनगर और सिकतरा बरौली अहीर की एत्मादपुर मदरा, इकतरा, लोधई, समोगर, सरवतपुर में सचिवालय ही नहीं है।

इसी तरह फतेहाबाद की बिचौला, बिहारी, नीचा खेड़ा, बेहड़ी, मडाइना, प्रतापपुरा, रामगढ़, सलैमपुर धनगर, सिकतरा और बरौली अहीर की ककरीली, बरौली अहीर, बरौली गूजर, बुढ़ाना, महुआखेड़ा, भाहई शमशाबाद की बागुरी, विसेरी, गोरवा, गवरारी, मीरपुर, फूलपुर, सेवला अहीर, कुर्राचित्तरपुर में भी मिनी सचिवालयों की हालत जीर्ण-शीर्ण हैं। भवन सरकारी, फैसला न पड़ जाए भारी

अछनेरा विकास खंड में 52 ग्राम पंचायतें हैं। यहा जिन पंचायतों में भवन बनकर तैयार हैं उनमें से अधिकाश में कंप्यूटर ही नहीं लगे हैं। इंटरनेट कनेक्शन तो अभी दूर की बात है। निर्माणाधीन भवनों में धन के आभाव के चलते कुछ ग्राम पंचायतों में काम बंद पड़ा है। महुअर, सहाई, बबरौद, गोपउ, अगनपुरा, खड़वाई, लोहकरेरा, बसैया राजपूत, पनवारी, जनूथा, गोबरा, मुबारिजपुर, खेड़ा साधन, धनौली, नागर, कीठम, मई, अरसैना, सींगना, रैपुरा अहीर, सकतपुर, मंगूरा, मागरौल गूजर, गढ़ीमा, साधन, फतेहपुरा, मागरौल जाट आदि ग्राम पंचायतों में भवन लगभग बनकर तैयार हैं। वहीं रायभा, कचोरा, बस्तई, छहपोखर, सहता, सहाई, कुकथला, अरदाया, अभैदोंपुरा, झारौटी, कठवारी, नगला अरुआ, भड़ीरी, हंसेला, मुरेंडा, अकबरा, भिलावटी, बरौली, गढ़ी चंद्रमन, अरुआ खास, व्यारा, विद्यापुर आदि में कहीं मरम्मत कार्य हो रहा है तो कहीं भवन निर्माणाधीन हैं। पुरामना, अटूस और रुनकता में भूमि ही उपलब्ध नहीं है। सरकारी फैसला अब विकास कार्यो पर भारी पड़ता प्रतीत हो रहा है। अपनी ढपली अपना राग, अलापते विभाग

जिन ग्राम पंचायतों में सचिवालयों की भूमि पर विवाद की स्थिति है, वहा राजस्व ग्राम्य विकास विभाग में तालमेल की कमी है। दोनों अपनी ढपली, अपना राग की तर्ज पर चल रहे हैं। विकास विभाग की जमीन दिलवाने की माग पर राजस्वकर्मी बहाना ढूंढ लेते हैं। न्यायालय जाने तक को कह दिया जाता है। नए और पुराने भवनों पर खर्च भी तय

सरकारी फरमान के तहत आठ कमरों के नए सचिवालय निर्माण पर 40 लाख, मिनी सचिवालयों पर 20 लाख और मरम्मत कार्य पर करीब तीन लाख रुपये खर्च किए जाने हैं।

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