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Agra Weather: आसमान में तनी कोहरे की चादर,जानिए क्‍या रहेगा आने वाले दिनों में मौसम का हाल Agra News

आगरा, जागरण संवाददाता। ताजनगरी में कोहरे की दस्तक होने के कारण लोगों का सर्दी का अहसास होने लगा है। सुबह लोगों की नींद खुली तो बाहर कोहरा देख लोग ठंड से सिहर उठे। गर्म कपड़े पहनने के बावजूद बच्चे ठिठुरते हुए स्कूल जाते नजर आए। हादसों की संभावना को देखते हुए हाईवे पर धीमी गति से वाहन दौड़ते नजर आए। शहर की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों में घना कोहरा रहा, जिससे ग्रामीणों की मुश्किल बढ़ गई। न्‍यूनतम तापमान 9.7 डिग्री सेल्सियम दर्ज किया गया। मौसम विभाग का अनुमान है कि 9 दिसंबर से मौसम साफ रहेगा। 12 दिसंबर के फिर मौसम बदलेगा और हल्‍की बारिश के आसार हो सकते हैं।

दिसंबर माह के पहले सप्ताह में ही कोहरे ने दस्तक दे दी है। शुक्रवार को सुबह आसमान में घना कोहरा छाया रहा। सुबह घना कोहरा देखकर लोगों की मुश्किल बढ़ गई। सर्दी बढऩे के कारण स्कूल जाने वाले बच्चे भी परेशान दिखे। सुबह बच्चों को गर्म कपड़े पहनाकर स्कूल भेजा गया। इसके बावजूद बच्चे ठंड से ठिठुरते हुए नजर आए। अभिभावकों ने बच्चों को बाइक पर आगे बिठाने की बजाए बीच में बिठाकर स्कूल तक पहुंचाया, जिससे सर्दी अधिक न लगे। कोहरे के कारण सुबह पार्कों में टहलने वाले लोगों की संख्या भी कम दिखी।

सुबह शहर की अपेक्षा ग्रामीण अंचलों में कोहरा अधिक रहा। घने कोहरे के कारण ग्रामीण अंचलों में कुछ भी नजर नहीं आ रहा था। यमुना एक्‍सप्रेस वे और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे के साथ नेशनल हाइवे पर घने कोहरे के कारण सुबह चालक परेशान दिखे। हादसे की संभावना को देखते हुए धीमी गति से वाहन चलाते नजर आए। सुबह नौ बजे के बाद हल्की धूप निकली, लेकिन सर्दी से कोई खास राहत नहीं मिली। दोपहर दो बजे के बाद आसमान में बादल छाए रहे। शाम होते-होते सर्दी भी बढ़ गई है।

बुजुर्ग सर्दी से बचाव के करें पुख्ता इंतजाम

वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. अतुल कुलश्रेष्‍ठ का कहना है कि बुजुर्गों को सर्दी से बचाव का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इससे स्ट्रोक का खतरा होता है। सुबह न तो जल्दी उठकर सैर को जाएं और न ठंडे पानी से नहाएं। जूस व फल लेने से बचें। सर्दी, जुकाम व बुखार आने पर चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।

धुंध ले सकती जान, न भरें लापरवाही का फर्राटा

सर्दी में कोहरा बढ़ते ही सड़क दुर्घटनाओं के ग्राफ तेजी से बढऩे लग जाता है। आए दिन होती घटनाएं सिहरन पैदा करती हैं। किसी न किसी घर का दीप बुझ जाता है। ये हादसे सतर्क और जागरूक करने के लिए काफी हैं। इसके बावजूद लोग बार-बार लापरवाही को दोहराते हैं। इसलिए बहुत जरूरी है, नियमों को कंठस्थ कर लेना। इस कार्य में आधा काम तो तकनीक भी करने लगी है। कई वाहनों में ऐसे उपकरण लगाए जा रहे हैं, जो हादसों से बचाव कर सकें। इधर, ट्रैफिक पुलिस ने भी सुरक्षा के इंतजाम को कवायद शुरू कर दी है। एक्सप्रेस-वे और एनएच पर जगह-जगह रिफ्लेक्टर लगाए जा रहे हैं। जिससे खतरे को काफी हद तक टाला जा सके।

इन नियमों को अपनाएं

- दोपहिया वाहन पर दोनों सवारी अनिवार्य रूप से हेलमेट लगाएं।

- चार पहिया वाहन में बैठे लोग सीट बेल्ट का प्रयोग करें।

- नशे में गाड़ी न चलाएं।

- वाहन गति को नियंत्रित रखें।

- रिफ्लेक्टर जरूर लगाएं, भले लाइट लगी हो।

- फॉगलाइट का प्रयोग करें।

- नशे में गाड़ी न चलाएं

- आपातकाल में टोल फ्री नंबर 112 का उपयोग करें।

 

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