Yamuna Expressway: कोहरे में सफर के दौरान बरतें सावधानी, आपात स्थिति में इमरजेंसी कॉल बॉक्‍स भी ढूंढे से नहीं मिलते

यमुना एक्‍सप्रेस वे पर 48 सीसीटीवी कैमरों में से अधिकांश खराब 11 ब्लैक स्पाट पर नही लगे स्पीड कैम। दोनों ओर आठ-आठ लेन दो-दो पर फास्टैग। मनचाहे अंदाज में टोल प्‍लाजा पर खोले जाते हैं काउंटर्स। दिन में पेट्रोलिंग और रात में टीमें गायब।

Prateek GuptaSun, 05 Dec 2021 09:49 AM (IST)
यमुना एक्‍सप्रेस वे पर रात और कोहरे के वक्‍त सफर करना खतरे से खाली नहीं है।

आगरा, जागरण संवाददाता। यमुना एक्सप्रेस वे पर यात्रियों से प्रति वाहन कम से कम 635 रुपये का टोल वसूलने के बाद भी सुविधाओं में कटौती की जा रही है। रोड सेफ्टी के मानकों में से एक इमरजेंसी काल बाक्स एक्सप्रेस वे शुरू होने के समय लगवाए गए थे। कुछ दिन बाद ही ये खराब हाे गए। अब इन्हें जड़ से उखाड़ लिया गया है। एक्सप्रेस वे पर अब कहीं भी इमरजेंसी काल बाक्स दिखाई नहीं दे रहे। 48 स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरो में से अधिकांश खराब हैं। खंदौली टोल प्लाजा पर दोनों साइड 15-15 लेन बनी हैं। इसमें से 3-3 लेन दो पहिया वाहनों के लिए हैं, जबकि 12-12 लेन से चारपहिया या उससे अधिक के वाहनों का आवागमन के लिए है पर वर्तमान में दोनो ओर आठ-आठ लेन सक्रिय है। दो-दो लेन में फास्टैग है। 20 ब्लैक स्पाट में से आदेश के बाद भी अभी तक 11 स्थानोंं पर स्पीड कैम नहीं लगे है, जिस कारण निर्धारित गति से तेज वाहन दौड़ाने या मानकों का उल्लंघन करने वालों के ई-चालान नही कट पा रहे है। यह स्थिति तब है जब यातायात पुलिस के अनुसार यमुना एक्सप्रेस वे पर 23.42 प्रतिशत हादसे ओवर स्पीड के कारण होते हैं। 12 प्रतिशत टायर फटने व 4.74 प्रतिशत कोहरे के चलते हादसे होते हैं।

आगरा से नोएडा तक 165 किमी लंबे यमुना एक्सप्रेस का उदघाटन वर्ष 2012 में हुआ था। इस पर विश्वस्तरीय सुविधाओं का दावा किया गया। सीसीटीवी कैमरे, स्पीड रडार से लेकर इमरजेंसी काल बाक्स तक लगाए गए थे। रोड सेफ्टी के मानकों के हिसाब से यमुना एक्सप्रेस वे पर 164 स्थानाें पर इमरजेंसी काल बाक्स यानि ईसीबी लगाए गए थे। एक्सप्रेस वे पर हादसा होने पर या अन्य किसी आपात स्थिति में इस काल बाक्स में लगे हैंड सेट से काल करके कंट्रोल रूम में सूचना दी जा सकती थी। यमुना एक्सप्रेस वे के टोल फ्री नंबर पर इससे काल करने कालर तक मदद पहुंचाने का सिस्टम था। मगर, यह सिस्टम कुछ समय तक ही चल सका। सोलर एनर्जी से संचालित ये इमरजेंसी काल बाक्स कुछ दिन चलने के बाद ही बंद हो गए। किसी की बैटरी चोरी हो गई तो किसी का हैंड सेट। रखरखाव की ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया। शनिवार को जागरण की टीम ने कुबेरपुर से लेकर मथुरा तक एक्सप्रेस वे की पड़ताल की। यहां कहीं भी ईसीबी नहीं दिखे। ऐसे में वाहन की गति पर नियंत्रण नही हो पा रहा है। एक्सप्रेस वे पर 48 सीसीटीवी कैमरों से टोल के आसपास कैमरे सही है पर अन्य स्थानों पर कैमरे चलते दिखाई नही दिए। एक्सप्रेस वे पर वाहनों की पहचान के लिए 25 व्हीकल आइडेंटीफिकेशन डिवाइस लगाई गई हैं इनमें से नौ काम नहीं कर रही हैं। एक्सप्रेस वे पर केमिस्ट शॉप व एटीएम खुलने थे, लेकिन दोनों सुविधाएं नहीं शुरू हो पाई हैं।

करीब एक माह पहले हुए एक्सप्रेसवे के निरीक्षण में कई सुविधाएं ठीक मिली हैं। 48 सीसीटीवी कैमरों में से तीन-चार कैमरे तकनीकि कारणों के कारण खराब मिले थे। एक्सप्रेस वे पर पेट्रोलिंग के लिए लगाए गए व्हीकल मिले। क्यूआरटीए क्रेन, मौसम चेतावनी बोर्ड, एंबुलेंस, स्पीड गन आदि दुरुस्त पाए गए हैं। यमुना एक्सप्रेस वे पर दी जा रही सुविधाओं का सत्यापन शीघ्र कराया जाएगा। -डॉ अरुणवीर सिंह, सीईओ यमुना प्राधिकरण

इमरजेंसी काल बाक्स एक्सप्रेस के शुभारंभ के दौरान लगाए गए थे पर अधिकांश लोगोंं ने तोड दिए है। पुन: ये बाक्स नही लगवाए गए है। खंदौली टोल प्लाजा से दोनों साइड 15-15 लेन बनी हैं। इसमें से 3-3 लेन दो पहिया वाहनों के लिए हैं, जबकि 12-12 लेन से चारपहिया या उससे अधिक के वाहनों का आवागमन के लिए है पर वर्तमान में दोनो ओर आठ-आठ लेन सक्रिय है। दो-दो लेन में फास्टैग है। 15 दिसंबर से खंदौली के साथ-साथ जेवर व मथुरा टोल प्लाजा पर अतिरिक्त 6-6 लेन में व्यवस्था लागू हो जाएगी। सुरक्षा को लेकर पुलिस पेट्रोलिंग व निजी सुरक्षा पेट्रोलिंग के लिए सुरक्षाकर्मियों (प्राइवेट गार्ड) की संख्या भी बढ़ाई गई है। एक्सप्रेस वे पर लाइटें बढ़ाने का कार्य तेज गति से चल रहा है। -तुलसी राम गुर्जर खंदौली टोल प्रभारी

रात के सफर से इस समय बचें

नोएडा से आगरा या आगरा से नोएडा जाने के लिए यमुना एक्‍सप्रेस वे पर रात के सफर बचें, इसी में भलाई है। घने कोहरे के बीच सड़क पर दृश्‍यता शून्‍य रहती है। रात ही क्‍या सुबह नौ बजे तक हाल यही रहता है। अभी तो इस सीजन में घना कोहरा पड़ना शुरू नहीं हुआ है। अगले सप्‍ताह से कोहरा छाने की आशंका है। ऐसे में हादसे होने की आशंका भी बढ़ जाती है।

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